भोपाल ब्यूरो
मध्य प्रदेश में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ सकता है। आयुष्मान योजना से बाहर किए गए निजी अस्पतालों में से 21 अस्पतालों को एनएबीएच प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए 31 अक्टूबर तक की मोहलत मिली है। इनमें भोपाल के 10, ग्वालियर के आठ और इंदौर के तीन निजी अस्पताल शामिल हैं। हालांकि यह मोहलत मिलने का मतलब यह नहीं है कि इन अस्पतालों में आयुष्मान के तहत इलाज की अनुमति अपने आप बहाल हो गई है। दोबारा योजना में शामिल होने तक इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर इलाज नहीं हो सकेगा और मरीजों को दूसरे संबद्ध अस्पतालों का विकल्प तलाशना पड़ेगा।
निजी अस्पताल संचालकों की शासन के साथ हुई चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है। 21 अस्पतालों को प्रमाणपत्र लेने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। यह मुद्दा सीधे तौर पर प्रदेश के लाखों आयुष्मान कार्डधारियों से जुड़ा है, जो इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं।
शहरवार हालत: भोपाल के 10, ग्वालियर के आठ, इंदौर के तीन
मोहलत पाने वाले 21 अस्पतालों में सबसे ज्यादा भोपाल के 10 अस्पताल हैं। इसके बाद ग्वालियर के आठ और इंदौर के तीन निजी अस्पतालों को यह राहत मिली है। इन अस्पतालों को अब 31 अक्टूबर तक राष्ट्रीय अस्पताल प्रमाणन बोर्ड का प्रमाणपत्र लेना होगा। तय समय में प्रमाणपत्र नहीं मिलने पर इन अस्पतालों की आयुष्मान योजना से दूरी और लंबी खिंच सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रमाणन की शर्त इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी है, इसलिए इसमें कोई ढील नहीं दी जा सकती। अस्पताल संचालकों को तय समयसीमा के भीतर सभी मानक पूरे करने होंगे।
60 अस्पताल एनएबीएच की शर्त पूरी नहीं कर सके
एनएबीएच यानी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का प्रमाणन। आयुष्मान योजना से जुड़े रहने के लिए निजी अस्पतालों को यह प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य किया गया था। निर्धारित शर्त पूरी नहीं करने पर 60 निजी अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया।
इन 60 अस्पतालों में भोपाल के 27, इंदौर के 17, ग्वालियर के नौ और जबलपुर के सात अस्पताल शामिल हैं। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ सकता है जो इन अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को सलाह दी है कि इलाज के लिए जाने से पहले अस्पताल की आयुष्मान योजना में मौजूदा संबद्धता की पुष्टि जरूर कर लें।
67 अस्पतालों पर कार्रवाई: पूरा हिसाब
एनएबीएच की शर्त पूरी न करने वाले 60 अस्पतालों के अलावा भी कुछ अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है। भोपाल के तीन अस्पतालों ने प्रमाणपत्र संबंधी दस्तावेज ही जमा नहीं किए, जबकि एक अस्पताल में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई की गई।
इसके अलावा तीन अन्य अस्पतालों को इसलिए योजना से बाहर किया गया क्योंकि वे पिछले छह महीने से एमपी-एबीएन यानी मध्य प्रदेश आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत मरीजों का इलाज ही नहीं कर रहे थे। इनमें भोपाल के दो और इंदौर का एक अस्पताल शामिल है। इस तरह कुल 67 अस्पतालों पर कार्रवाई के कारण सामने आए हैं, जबकि उपलब्ध जानकारी में बाकी पांच अस्पतालों के कारण दर्ज नहीं हैं।
एनएबीएच प्रमाणन होता क्या है
एनएबीएच का पूरा नाम नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स है। यह अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, दवाओं के प्रबंधन और आपात सेवाओं जैसे मानकों का प्रमाणन देता है। आयुष्मान जैसी बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना में निजी अस्पतालों की भागीदारी के लिए यह प्रमाणन गुणवत्ता की गारंटी माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमाणन की शर्त का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजना के पैसे से मरीजों को घटिया इलाज न मिले। हालांकि अस्पताल संचालकों का तर्क है कि छोटे और मझोले अस्पतालों के लिए प्रमाणन की प्रक्रिया महंगी और समय लेने वाली है, इसलिए उन्हें पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
मरीजों पर असर: इलाज से पहले पुष्टि जरूरी
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। जिन 60 से ज्यादा अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया है, वहां आयुष्मान कार्ड पर अब इलाज नहीं होगा। अगर कोई मरीज बिना जानकारी के ऐसे अस्पताल में पहुंचता है तो उसे इलाज का खर्च खुद उठाना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने साफ कहा है कि मरीज इलाज से पहले अस्पताल की आयुष्मान योजना में मौजूदा संबद्धता की पुष्टि करें। मरीज योजना की हेल्पलाइन या आधिकारिक पोर्टल से यह जानकारी ले सकते हैं कि कौन सा अस्पताल वर्तमान में योजना से जुड़ा है।
एमपी-एबीएन: आंकड़ों में योजना
मध्य प्रदेश आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत प्रदेश के कुल 1,953 सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज होता है। इनमें 813 निजी अस्पताल हैं। अकेले भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में कुल 423 निजी अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं।
इतने बड़े नेटवर्क में 60 से ज्यादा अस्पतालों का बाहर होना एक बड़ी संख्या है, खासकर तब जब चार बड़े शहरों के मरीज इन निजी अस्पतालों पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। यही वजह है कि 21 अस्पतालों को दी गई मोहलत को अहम माना जा रहा है।
आगे क्या: 31 अक्टूबर की डेडलाइन
अब सबकी नजरें 31 अक्टूबर की समयसीमा पर हैं। मोहलत पाने वाले 21 अस्पतालों को इस तारीख तक एनएबीएच प्रमाणपत्र हासिल करना होगा। प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही इन अस्पतालों की आयुष्मान योजना में वापसी का रास्ता साफ होगा।
अस्पताल संचालकों का कहना है कि वे तय समय में प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं मरीज संगठनों ने मांग की है कि जब तक अस्पताल दोबारा योजना में नहीं आ जाते, तब तक प्रभावित मरीजों के लिए वैकल्पिक अस्पतालों की सूची सार्वजनिक की जाए ताकि किसी को इलाज में परेशानी न हो।
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