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रातभर जागा इंदौर: 100 वर्षों से चली आ रही परंपरा की झांकियों का महाकारवां संपन्न

रातभर जागा इंदौर - 22 झांकियों का महाकारवां

इंदौर ब्यूरो।

अनंत चतुर्दशी की रात इंदौर ने अपनी 100 वर्षों से चली आ रही परंपरा को एक बार फिर पूरे उत्साह के साथ निभाया। शुक्रवार शाम 6 बजे खजराना गणेश की झांकी से शुरू हुआ झांकियों का महाकारवां रातभर शहर के मार्गों पर घूमता रहा और अलसुबह तक सभी झांकियां अपने-अपने पड़ाव पर पहुंच गईं। अखबारों के अनुसार इस बार 22 से ज्यादा झांकियों का कारवां निकला, जिसमें मिलों की पारंपरिक झांकियों के साथ नगर निगम, विकास प्राधिकरण और सामाजिक संस्थाओं की झांकियां भी शामिल रहीं।

सबसे पहले खजराना गणेश मंदिर की झांकी निकली — इसमें मंदिर की प्रतिकृति के साथ चंद्रमा पर सवार गणपति की झलक दिखाई गई। अखबारों के अनुसार इसके बाद पुराने क्रम के अनुरूप शास्त्री कॉर्नर नवयुवक मंडल, विकास प्राधिकरण, नगर निगम, होप टेक्सटाइल, कल्याण मिल, मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल, राजकुमार मिल और स्पूतनिक ट्यूटोरियल एकेडमी की झांकियां एक के बाद एक जुड़ती चली गईं। नौ किलोमीटर से ज्यादा लंबे मार्ग — मिल क्षेत्र से मजदूर मैदान, एमजी रोड, कृष्णपुरा, नंदलालपुरा, जवाहर मार्ग, नृसिंह बाजार, गोराकुंड, खजूरी बाजार होते हुए राजवाड़ा तक — दोनों ओर लाखों लोगों की भीड़ जुटी रही। रात 11 बजे तक खजराना गणेश की झांकी बंबई बाजार चौकी पहुंच चुकी थी।

झांकियों में इस बार पौराणिक प्रसंगों के साथ सामाजिक संदेशों की भरमार रही — नशामुक्ति, नारी शक्ति और युवा शक्ति जैसे विषयों पर झांकियां बनाई गई थीं। अखाड़ों के कलाकार पारंपरिक लाठी-पटे और युद्ध कलाओं के करतब दिखाते हुए आगे बढ़ते रहे।

सुरक्षा के लिहाज से पुलिस-प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर नजर रखी। वॉच टावरों, ड्रोन, सीसीटीवी और फेस रिकग्निशन कैमरों से निगरानी की गई। सुरक्षा व्यवस्था को छह संभाग, 12 जोन और 22 सेक्टर में बांटा गया था। झांकियों में धारदार हथियार और नशे पर रोक रही, जबकि डीजे और स्पीकरों के इस्तेमाल को भी नियंत्रित किया गया। रातभर का कारवां शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

प्रदेश के अन्य शहरों में भी शुक्रवार को विसर्जन की रौनक रही। अखबारों के अनुसार राजधानी भोपाल में करीब 1500 झांकियों और गणेश प्रतिमाओं का चल समारोह शाम 7 बजे भारत टॉकीज के पास से शुरू हुआ। प्रेमपुरा, रानी कमलापति, खटलापुरा, बैरागढ़, शाहपुरा, हथाईखेड़ा और मालीखेड़ी घाटों पर बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की गई थी, जहां क्रेन, गोताखोर और फायर ब्रिगेड की टीमें तैनात रहीं। उज्जैन में रात 10 बजे चामुंडा माता मंदिर से शुरू होकर चल समारोह रामघाट और सुनहरी घाट की ओर बढ़ा। ग्वालियर में सागरताल के अस्थायी कुंड और जबलपुर में नर्मदा जल से भरे विशेष कुंड में बड़ी प्रतिमाओं का क्रेन से विसर्जन कराया गया।

इस बीच विसर्जन के दौरान दो दुखद हादसे भी सामने आए। खंडवा में खदान में डूबने से दो किशोर लापता हो गए, जिनकी तलाश में गोताखोरों की टीमें जुटी रहीं। वहीं बदनावर में डैम में डूबने से तीन युवकों की मौत हो गई। दोनों खबरें pradesh24news.in पर पहले ही प्रकाशित हो चुकी हैं।

झांकी और अखाड़ा पुरस्कारों की घोषणा की खबर यहां पढ़ें।

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