नई दिल्ली ब्यूरो। वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की 57वीं बैठक गुरुवार (8 अक्टूबर) को सुबह 11 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम स्थित समिट रूम में होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होंगे। इस बार बैठक का एजेंडा व्यापारियों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है — GST अधिकारियों की ‘गिरफ्तारी’ की शक्ति से लेकर कर चोरी पर ‘मुकदमे’ की सीमा तक, कई बड़े प्रस्तावों पर फैसला संभव है।
बैठक कल सुबह 11 बजे — दो बार बदली तारीख
गौरतलब है कि यह बैठक पहले 12 सितंबर को होनी थी, लेकिन BRICS शिखर सम्मेलन से टकराव के कारण इसे 7 अक्टूबर के लिए टाल दिया गया था। इसके बाद GST Council Secretariat ने 5 अक्टूबर को जारी कार्यालय ज्ञापन में “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला देते हुए बैठक को 8 अक्टूबर तक पुनर्निर्धारित कर दिया (ANI के अनुसार)। दो बार तारीख बदलने के बाद अब यह बैठक गुरुवार को ही होगी।
‘गिरफ्तारी’ की शक्ति पर सबसे बड़ा प्रस्ताव
बैठक के एजेंडे का सबसे चर्चित प्रस्ताव GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति को खत्म या सीमित करने का है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव का मूल सिद्धांत ‘करदाता पर भरोसा’ है (PTI के अनुसार)। प्रस्ताव यह है कि अपराध साबित होने के बाद ही कोई प्रवर्तन अधिकारी अपराधी को गिरफ्तार कर सकेगा — गिरफ्तारी से पहले कर, ब्याज और जुर्माने की वसूली जैसे सिविल उपाय अपनाए जाएंगे। गंभीर मामलों में अदालत के जरिए मुकदमा चलता रहेगा।

₹1 करोड़ से ₹5 करोड़ — मुकदमे की सीमा बढ़ेगी?
अपराधों को गैर-अपराधिक श्रेणी में लाने (डिक्रिमिनलाइजेशन) की दिशा में दूसरा बड़ा प्रस्ताव मुकदमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का है। इसके साथ ही GST कानून के तहत सूचीबद्ध 24 अपराधों को नरम करने, 9 अपराधों को पूरी तरह हटाने और न्यूनतम सजा के प्रावधान को खत्म करने का प्रस्ताव है। हर मामले में जुर्माने का विकल्प मिलेगा, जबकि अधिकतम सजा तीन साल से घटाकर दो साल की जा सकती है। जानबूझकर कर चोरी या गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में अदालत के जरिए मुकदमा जारी रहेगा।
निर्यातकों और छोटे व्यापारियों को राहत
परिषद निर्यातकों के लिए रिफंड प्रक्रिया तेज करने पर भी विचार कर सकती है — जोखिम-जांच के बाद पात्र रिफंड दावों का 90 प्रतिशत स्वतः जारी करने और 10 दिनों के भीतर आवेदन स्वीकार करने (या स्वतः-स्वीकृत मानने) का प्रस्ताव है। इसके अलावा वैध चालान और भुगतान-सबूत होने पर खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट सुरक्षित रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में है, भले ही ऊपर की श्रृंखला में आपूर्तिकर्ता डिफॉल्ट करे। छोटे करदाताओं की विलंब फीस माफ करने और जुर्माने तर्कसंगत बनाने पर भी चर्चा संभव है। ये बदलाव 2027 की शुरुआत में लागू होने की संभावना जताई जा रही है।
स्रोत: PTI
