दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में सांस लेना एक बार फिर मुश्किल हो गया है। शुक्रवार सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 287 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। सुबह के समय राजधानी के आसमान पर धुंध की मोटी चादर छाई रही और दृश्यता भी काफी कम हो गई। एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के अनुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता में सुधार की गुंजाइश नहीं दिखती।
वहीं इकोनॉमिक टाइम्स के लाइव ब्लॉग के अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों में शुक्रवार सुबह एम्स के आसपास AQI 255 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। मौसम वेबसाइट के ताजा आंकड़ों के अनुसार भी दिल्ली का AQI 245 के आसपास रहा और मुख्य प्रदूषक PM2.5 दर्ज किया गया। अलग-अलग समय और निगरानी केंद्रों के आंकड़ों में मामूली अंतर है, लेकिन तस्वीर एक ही है — दिल्ली-एनसीआर की हवा दमघोंटू बनी हुई है और सुबह की धुंध में लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है।
GRAP का पहला चरण लागू, प्रदूषण रोकने के कड़े कदम
हवा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण के उपाय लागू कर दिए हैं। GRAP चार चरणों वाला आपातकालीन ढांचा है, जो AQI के स्तर के हिसाब से क्रमशः सख्त पाबंदियां लागू करता है। पहला चरण ‘खराब’ श्रेणी (AQI 201 से 300) पर लागू होता है, जबकि आगे के चरण ‘बेहद खराब’, ‘गंभीर’ और ‘गंभीर प्लस’ श्रेणियों में सक्रिय होते हैं।
पहले चरण के तहत धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण और तोड़-फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर रोक रहेगी। दिल्ली-एनसीआर के होटल, रेस्टोरेंट और सड़क किनारे लगने वाले खुले फूड स्टॉल पर कोयले या लकड़ी के इस्तेमाल पर पाबंदी रहेगी। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। सड़कों पर पानी का छिड़काव हो रहा है और वैक्यूम मशीनों से धूल के कणों को हटाया जा रहा है। प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि CAQM के दिशा-निर्देशों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सके और स्थिति और अधिक गंभीर न हो।
इसके अलावा 1 नवंबर से BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा। यह फैसला दिल्ली में बाहरी वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए लिया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस संबंध में अंतर-राज्य समन्वय बैठक भी की है, जिसमें नियमों का पालन न करने वाली बसों को दिल्ली की सीमाओं पर मोड़ने और वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) की सख्ती से जांच जैसे फैसलों पर चर्चा हुई।
इस मौसम में क्यों बिगड़ती है दिल्ली की हवा
हर साल अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली की हवा खराब होने के कई कारण एक साथ सक्रिय हो जाते हैं। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से उठने वाला धुआं हवाओं के साथ दिल्ली पहुंचता है। दिवाली के आसपास पटाखों से निकलने वाले प्रदूषक भी हवा में घुलते हैं और कई दिनों तक वातावरण में बने रहते हैं। इसके साथ ही सर्दियों की शुरुआत में तापमान में गिरावट से ‘इन्वर्जन’ की स्थिति बनती है — यानी जमीन के पास ठंडी हवा की परत ऊपर की गर्म हवा को नीचे की ओर दबा देती है, जिससे प्रदूषक फैलने के बजाय सतह के पास ही जमा हो जाते हैं।
वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन और कचरा जलाने की घटनाएं भी इसमें इजाफा करती हैं। कम हवा की गति और धुंध भरी सुबहें इस समस्या को और गंभीर बना देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जब हवा की गति कम होती है और नमी ज्यादा होती है, तो PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण हवा में लंबे समय तक तैरते रहते हैं और सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं।
सेहत पर असर: किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा
खराब हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से खांसी, गले में जलन, आंखों में पानी आना, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं। चिकित्सकों के अनुसार PM2.5 के सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
चिकित्सकों की सलाह है कि AQI खराब श्रेणी में होने पर सुबह की सैर से बचें, घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें और बाहर निकलते समय मास्क पहनें। अस्थमा के मरीज अपनी दवाएं साथ रखें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें। घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है। बच्चों को खुले मैदान में लंबे समय तक खेलने से रोकना बेहतर है। पर्याप्त पानी पिएं और तले-भुने भोजन से परहेज करें, क्योंकि प्रदूषण के दिनों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
आगे क्या: सुधार की उम्मीद फिलहाल नहीं
एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के अनुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता में सुधार की गुंजाइश नहीं दिखती। CAQM स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर GRAP के अगले चरण लागू किए जा सकते हैं। दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियां समन्वय में काम कर रही हैं। यदि AQI ‘बेहद खराब’ श्रेणी (301 से 400) में पहुंचता है, तो GRAP का दूसरा चरण सक्रिय हो जाएगा, जिसमें और सख्त पाबंदियां लागू होंगी।
राहत की एक उम्मीद मौसम से जुड़ी है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में मौसम बदलने के संकेत हैं — तमिलनाडु, पुडुचेरी सहित कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी है और उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब समेत कई राज्यों में भी बारिश की संभावना है, जिससे प्रदूषकों के धुलने में मदद मिल सकती है। हालांकि दिल्ली में बारिश की तीव्रता और असर को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। मध्यप्रदेश में मौसम की ताजा स्थिति पर हमारी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
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