क्या यह साल सच में बदलाव लाएगा,या जनता को अगली त्रासदी का इंतज़ार करना पड़ेगा?या फिर नई जांच, नई फाइल और वही पुराने चेहरे बच निकलेंगे?
अनुषठ चोहान इंदौर भागीरथपुरा का जलकांड अब सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रहा। यह सरकार, सिस्टम और जनप्रतिनिधियों—तीनों की सामूहिक नाकामी का सार्वजनिक पोस्टमार्टम बन चुका है। सरकार हर मंच से कार्रवाई की घोषणा करने में अव्वल है, लेकिन ज़मीन पर हालात जस के तस हैं। सवाल सीधा है—जब हर रिपोर्ट, हर बयान अधिकारीयों की…
