भोपाल ब्यूरो। राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चे का अनिश्चितकालीन धरना आज दूसरे दिन भी जारी है। रविवार से शुरू हुए इस धरने में प्रदेशभर के शिक्षक शामिल हो रहे हैं। मोर्चे ने स्पष्ट किया है कि मांगों का ठोस समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आज जबलपुर संभाग के शिक्षक धरने में शामिल हो रहे हैं।
तीन प्रमुख मांगों पर अड़े शिक्षक
शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगें हैं — सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता खत्म करना, पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना, और स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अनिवार्य के बजाय स्वैच्छिक करना। मोर्चे के पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं होनी चाहिए। सेवा अवधि की सही गणना नहीं होने से सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ — ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और पेंशन — प्रभावित होते हैं। ई-अटेंडेंस को लेकर पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों को अध्यापन के साथ विभागीय और अन्य शासकीय जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं, जिससे कई बार व्यावहारिक परेशानी सामने आती है।
विधानसभा के विशेष सत्र की मांग
टीईटी से छूट के लिए मोर्चे ने मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने और उसे केंद्र सरकार को भेजने की मांग की है। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा है। मोर्चे के अनुसार, अगस्त तक शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों से लगातार संवाद और मुलाकात के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, जिसके बाद आंदोलन का रास्ता चुना गया।

संभागवार कार्यक्रम तय, ई-मेल अभियान भी
धरना चरणबद्ध तरीके से हर दिन अलग-अलग संभाग के शिक्षकों की सहभागिता के साथ चल रहा है। आज जबलपुर संभाग के शिक्षक — जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, सिवनी और नरसिंहपुर — धरने में शामिल हो रहे हैं। 29 सितंबर को ग्वालियर-चंबल, 30 सितंबर को उज्जैन और 1 अक्टूबर को रीवा-शहडोल संभाग के शिक्षक शामिल होंगे। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर इंदौर संभाग के शिक्षक विशेष उपवास कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। 3 अक्टूबर को सागर संभाग और 5 अक्टूबर को शिक्षक दिवस के कार्यक्रम के साथ संभागवार सहभागिता जारी रहेगी।
इसके साथ ही मोर्चे ने मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए ई-मेल अभियान भी चलाया है। संगठन ने प्रतिदिन एक लाख से अधिक ई-मेल भेजने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ई-मेल भेजने का कार्यक्रम तय किया गया है।
स्रोत: अमर उजाला, नईदुनिया
