भोपाल ब्यूरो। राजधानी के आदमपुर खंती में वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ के निस्तारण को लेकर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपना लिया है। सेंट्रल जोन बेंच ने नगर निगम से चार सप्ताह के भीतर एक्शन-टेकन रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी।

2020 से अटका है 4 लाख टन कचरे का निस्तारण
आदमपुर खंती में करीब 0.4 मिलियन मीट्रिक टन यानी लगभग 4 लाख टन लिगेसी वेस्ट जमा है। इसका निस्तारण वर्ष 2020 से अटका हुआ है। नगर निगम ने इसके लिए दो बार ठेके दिए — पहला 23 नवंबर 2020 को ग्रीन रिसोर्स को और दूसरा 18 जून 2025 को सुज्जा जेवी आनंद आटो को — लेकिन दोनों ही कार्यादेश निरस्त करने पड़े। एनटीपीसी के साथ हुआ करार भी धरातल पर नहीं उतर सका।
भानपुर का काम पूरा, ₹1.80 करोड़ के जुर्माने पर रोक
सुनवाई के दौरान निगम की ओर से बताया गया कि भानपुर खंती का बायो-रेमेडिएशन ₹52.38 करोड़ की लागत से पूरा कर लिया गया है। वहीं ₹1.80 करोड़ के पर्यावरणीय मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट की रोक लगी हुई है। कलियासोत कैचमेंट क्षेत्र में हो रही अवैध डंपिंग का मुद्दा भी ट्रिब्यूनल के समक्ष उठा।
अब निगम पर चार हफ्ते की डेडलाइन
एनजीटी के ताजा आदेश के बाद अब नगर निगम को तय समय-सीमा में ठोस कार्ययोजना पेश करनी होगी। आदमपुर खंती के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह राहत की खबर है — वर्षों से उठती दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायतों पर अब ट्रिब्यूनल की सीधी निगरानी रहेगी। चार सप्ताह बाद पेश होने वाली रिपोर्ट ही तय करेगी कि कचरे के इस पहाड़ से शहर को कब निजात मिलेगी।
