मोहाली ब्यूरो
सार: भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने हॉकी एशियन चैम्पियन्स ट्रॉफी का खिताब छठी बार अपने नाम कर लिया है। मोहाली में खेले गए फाइनल में भारत ने जापान को 4-1 से हराकर लगातार तीसरी बार यह ट्रॉफी जीती। मध्य प्रदेश के विवेक सागर प्रसाद ने चौथा गोल दागकर जीत पर मुहर लगाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीम को बधाई दी है।
भारतीय हॉकी टीम ने एक बार फिर एशिया में अपना दबदबा साबित कर दिया है। हॉकी एशियन चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के फाइनल में भारत ने जापान को 4-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया। मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में खेला गया यह मुकाबला शुरू में भारत के लिए मुश्किल रहा, लेकिन टीम ने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की। यह भारत का इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी में छठा खिताब है। इससे पहले भारत 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में भी यह खिताब जीत चुका था। लगातार तीसरी बार खिताब जीतकर भारतीय टीम ने एशियाई हॉकी में अपनी बादशाहत बरकरार रखी है।
पीछे से वापसी: जापान की बढ़त के बाद भारत का पलटवार
फाइनल मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए अच्छी नहीं रही। मैच के तीसरे ही मिनट में जापान के काजुमासा मात्सुमोतो ने रिवर्स हिट पर शानदार गोल करके अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती गोल के बाद जापान की टीम आत्मविश्वास से भर गई और भारतीय रक्षा पंक्ति पर दबाव बनाने लगी। भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह झटका था, क्योंकि वे पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए फाइनल तक पहुंचे थे और उनसे एकतरफा जीत की उम्मीद की जा रही थी।
लेकिन भारतीय टीम ने हार नहीं मानी। खिलाड़ियों ने संयम बनाए रखा और धीरे-धीरे मैच पर नियंत्रण हासिल करना शुरू कर दिया। मिडफील्ड में गेंद पर कब्जा बढ़ाया गया और जापान के पाले में लगातार हमले किए गए। तीसरे क्वार्टर में भारत को बराबरी का गोल मिला, जब शिलानंद लाकड़ा ने पेनल्टी कॉर्नर के एक वेरिएशन पर गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया। इस गोल के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास लौट आया और मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मुड़ गया।
आखिरी क्वार्टर में तीन गोल: दिलप्रीत, जुगराज और विवेक का कमाल
मैच के आखिरी क्वार्टर में भारतीय टीम ने आक्रामक खेल का ऐसा प्रदर्शन किया कि जापान की रक्षा पंक्ति पूरी तरह बिखर गई। दिलप्रीत सिंह ने गोल करके भारत को 2-1 से आगे कर दिया। इसके बाद जुगराज सिंह ने तीसरा गोल दागा और भारत की बढ़त 3-1 हो गई। जापान की टीम इन तेज गोलों से संभल नहीं पाई और उसके खिलाड़ी दबाव में गलतियां करने लगे।

जीत पर अंतिम मुहर 54वें मिनट में लगी, जब मध्य प्रदेश के विवेक सागर प्रसाद ने हाफ-वॉली पर शानदार गोल करके स्कोर 4-1 कर दिया। इस गोल के साथ ही मुकाबला पूरी तरह भारत की झोली में आ गया। बचे हुए समय में जापान ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय रक्षा पंक्ति ने कोई मौका नहीं दिया। अंतिम सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ी जश्न में डूब गए और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने तालियों से टीम का स्वागत किया।
छठा खिताब: लगातार तीसरी बार चैंपियन बना भारत
इस जीत के साथ भारत ने हॉकी एशियन चैम्पियन्स ट्रॉफी छह बार जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। टीम ने 2023 और 2024 के बाद 2026 में भी खिताब जीतकर लगातार तीसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा किया। पूरे टूर्नामेंट में भारत एक भी मैच नहीं हारा। लीग दौर में भी भारत ने जापान को इसी अंतर 4-1 से हराया था, और फाइनल में भी वही अंतर दोहराया गया।
टूर्नामेंट के नौवें संस्करण में भारत की यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि टीम ने घरेलू मैदान पर खिताब बचाया है। पिछली दो बार की तरह इस बार भी भारतीय टीम ने फाइनल में दमदार प्रदर्शन किया। एशियाई हॉकी में भारत की यह बादशाहत लंबे समय से बनी हुई है और इस जीत ने उसे और मजबूत कर दिया है। टीम के युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया।
मध्य प्रदेश के विवेक सागर प्रसाद ने किया निर्णायक गोल
फाइनल में भारत की जीत में मध्य प्रदेश के विवेक सागर प्रसाद की भूमिका खास रही। इटारसी के रहने वाले विवेक ने 54वें मिनट में चौथा गोल करके जीत पक्की कर दी। विवेक भारतीय हॉकी टीम के अहम मिडफील्डर हैं और टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
विवेक के गोल की खबर मिलते ही उनके गृह क्षेत्र इटारसी के चांदौन गांव में जश्न का माहौल बन गया। मध्य प्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि प्रदेश का खिलाड़ी देश की इस बड़ी जीत में निर्णायक भूमिका में रहा। विवेक इससे पहले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं। हॉकी के प्रति उनके समर्पण और मेहनत ने उन्हें भारतीय टीम का भरोसेमंद खिलाड़ी बना दिया है।
कप्तान हरमनप्रीत की अगुवाई और हार्दिक का 200वां मैच
भारतीय टीम की इस जीत में कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई अहम रही। उनके नेतृत्व में टीम ने मुश्किल परिस्थितियों में भी संयम नहीं खोया। शुरुआती गोल खाने के बाद भी टीम ने अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा और धीरे-धीरे मैच अपने पक्ष में कर लिया। कप्तान के अनुभव ने युवा खिलाड़ियों को भी आत्मविश्वास दिया।
इस फाइनल की एक और खास बात यह रही कि उपकप्तान हार्दिक सिंह ने अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। अपने 200वें मैच में टीम की जीत हार्दिक के लिए यादगार बन गई। मिडफील्ड में उनके योगदान ने टीम को संतुलन दिया और जापान के हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई। टीम के अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों ने भी पूरे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया।
लीग दौर में भी जापान को 4-1 से हराया था भारत ने
फाइनल की जीत अचानक नहीं मिली थी। लीग दौर में भी भारत ने जापान को 4-1 के ही अंतर से हराया था। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम अजेय रही और हर मैच में उसने अपना दबदबा दिखाया। आक्रमण में कई खिलाड़ियों का योगदान रहा, जिससे टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं रही। फाइनल में चार अलग-अलग खिलाड़ियों के गोल ने इसी गहराई को साबित किया।
भारत की रक्षा पंक्ति ने भी पूरे टूर्नामेंट में अच्छा काम किया। गोलकीपर सूरज करकेरा ने अहम मौकों पर बचाव किए। फाइनल में शुरुआती गोल खाने के बाद भी रक्षा पंक्ति ने जापान को दूसरा गोल नहीं करने दिया। टीम का यह संतुलित प्रदर्शन ही उसे चैंपियन बनाने में काम आया।
मलेशिया तीसरे स्थान पर, दक्षिण कोरिया को 5-2 से हराया
टूर्नामेंट के तीसरे स्थान के मुकाबले में मलेशिया ने दक्षिण कोरिया को 5-2 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। मलेशिया की टीम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाया और दक्षिण कोरिया को वापसी का मौका नहीं दिया। इस तरह मलेशिया ने पोडियम पर अपनी जगह पक्की की।
हॉकी एशियन चैम्पियन्स ट्रॉफी एशिया की सबसे बड़ी हॉकी प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इस बार इसका आयोजन पंजाब के मोहाली में हुआ। भोपाल में 19 नवंबर से महिला हॉकी एशियन चैम्पियन्स ट्रॉफी का आयोजन होना है, जिसमें भारतीय महिला टीम भी खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। पुरुष टीम की इस जीत से महिला टीम का मनोबल भी बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री की बधाई और आगे का रास्ता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय हॉकी टीम को छठी बार एशियन चैम्पियन्स ट्रॉफी जीतने पर बधाई दी है। उन्होंने टीम के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह जीत पूरे देश के लिए गर्व की बात है। मध्य प्रदेश के खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद के निर्णायक गोल ने प्रदेश के लिए इस जीत को और खास बना दिया है।
भारतीय हॉकी टीम के लिए यह जीत आने वाले बड़े टूर्नामेंटों से पहले आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। टीम ने दिखा दिया है कि एशिया में उससे बेहतर कोई टीम नहीं है। अब नजरें आगे के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर होंगी, जहां भारतीय टीम इसी लय को बरकरार रखना चाहेगी। फाइनल में दिखाया गया जज्बा और आखिरी क्वार्टर में किया गया आक्रामक खेल टीम की पहचान बनता जा रहा है।
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