भोपाल ब्यूरो
मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग के आदेश से भारतीय पुलिस सेवा के पाँच अधिकारियों के कार्यभार में बदलाव किया गया है। पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी मलय जैन को अस्थायी रूप से बालाघाट जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। उन्हें हॉक फोर्स बालाघाट के सेनानी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इस आदेश से नौ दिन से खाली पड़ा बालाघाट एसपी का पद भर गया है, जबकि चार अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को उनके मौजूदा दायित्वों के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।
गृह विभाग ने शुक्रवार, 6 नवंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार पाँच अधिकारियों में से एक को नई पदस्थापना दी गई है, जबकि चार अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ये सभी व्यवस्थाएँ अस्थायी तौर पर अगले आदेश तक लागू रहेंगी। धनतेरस के दिन जारी हुआ यह आदेश ऐसे समय आया है, जब दीपावली के त्योहारी दिनों में प्रदेशभर में पुलिस व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है। जिलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, त्योहारी भीड़ का प्रबंधन करना और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाना पुलिस के सामने प्राथमिक काम हैं।
बालाघाट जिले के लिए यह नियुक्ति विशेष महत्व रखती है, क्योंकि मलय जैन बालाघाट एसपी के रूप में जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान संभालेंगे। जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहाँ जिला पुलिस के साथ हॉक फोर्स भी सक्रिय रहता है। ऐसे में एक ही अधिकारी के पास जिला पुलिस और हॉक फोर्स दोनों की कमान आने से दोनों के बीच तालमेल और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।
गृह विभाग के आदेश में किसे क्या जिम्मेदारी मिली
गृह विभाग के आदेश के अनुसार मलय जैन को बालाघाट जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। उनके साथ ही चार अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी सचिन कुमार अतुलकर को चंबल जोन मुरैना के पुलिस महानिरीक्षक के मौजूदा दायित्व के साथ पुलिस महानिरीक्षक, विशेष सशस्त्र बल ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को उज्जैन के पुलिस अधीक्षक के साथ 32वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल उज्जैन के सेनानी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
2014 बैच की आईपीएस अधिकारी वाहनी सिंह को पुलिस अधीक्षक, पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर के साथ पुलिस अधीक्षक, नारकोटिक्स मंदसौर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके चलते 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिषेक आनंद को मंदसौर नारकोटिक्स के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी नगेंद्र सिंह को सेनानी, 25वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल भोपाल के साथ पुलिस अधीक्षक, रेल भोपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
इस तरह एक नई पदस्थापना और चार अतिरिक्त प्रभारों के साथ कुल पाँच अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये व्यवस्थाएँ अस्थायी हैं और अगले आदेश तक लागू रहेंगी।
मलय जैन बालाघाट एसपी: नौ दिन बाद भरा खाली पद

मलय जैन बालाघाट एसपी के रूप में जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान संभालेंगे। वे 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और अब तक भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे। पुलिस मुख्यालय में रहते हुए वे राज्य स्तर की पुलिस व्यवस्था से जुड़े काम देख रहे थे। अब उन्हें सीधे जिले की कमान सौंपी गई है, जहाँ उन्हें कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और त्योहारी दिनों की पुलिस व्यवस्था की सीधी जिम्मेदारी निभानी होगी।
बालाघाट के पुलिस अधीक्षक का पद 27 अक्टूबर से खाली पड़ा था। उस दिन तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा का तबादला कर उन्हें देवास जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया था। आदित्य मिश्रा 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनके जाने के बाद से बालाघाट में नए पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति का इंतजार था। नौ दिन बाद सरकार ने मलय जैन को इस पद पर नियुक्त करके उस रिक्ति को भर दिया है।
मलय जैन को बालाघाट एसपी की जिम्मेदारी के साथ हॉक फोर्स बालाघाट के सेनानी का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। हॉक फोर्स मध्यप्रदेश पुलिस का विशेष बल है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाता है। बालाघाट में हॉक फोर्स की सक्रियता को देखते हुए एसपी के पास इस बल की कमान भी रहना प्रशासनिक लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बालाघाट में दोहरी जिम्मेदारी क्यों अहम है
बालाघाट मध्यप्रदेश का वह जिला है, जहाँ नक्सल गतिविधियों को लेकर पुलिस लंबे समय से सतर्क रहती है। जिले के जंगली और पहाड़ी इलाकों में हॉक फोर्स के जवान नियमित रूप से गश्त और अभियान चलाते हैं। ऐसे इलाकों में जिला पुलिस और विशेष बल के बीच लगातार समन्वय बनाए रखना जरूरी होता है। जब दोनों की कमान एक ही अधिकारी के पास होती है, तो फैसले तेज गति से लिए जा सकते हैं और सूचनाओं का आदान-प्रदान भी आसान हो जाता है।
दूसरी ओर बालाघाट में विकास की योजनाओं पर भी काम चल रहा है। बालाघाट के 100 गांवों में विकास की योजना के तहत 225 करोड़ रुपये की राशि से गांव-गांव काम शुरू किया गया है। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद जिले में विकास की नई इबारत लिखने की बात कही जा रही है। ऐसे में जिले में स्थिर और मजबूत पुलिस नेतृत्व का होना विकास कार्यों के लिए भी अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करेगा। सुरक्षा और विकास दोनों साथ-साथ चलें, यही जिले के लिए सबसे बड़ी जरूरत बताई जा रही है।
दीपावली के दिनों में बालाघाट सहित पूरे प्रदेश में पुलिस की सक्रियता बढ़ जाती है। बाजारों में भीड़, पटाखों की बिक्री, यातायात का दबाव और संवेदनशील इलाकों में निगरानी — इन सभी मोर्चों पर पुलिस को एक साथ काम करना होता है। नए पुलिस अधीक्षक के आने से जिले की त्योहारी पुलिस व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सचिन अतुलकर को ग्वालियर की अतिरिक्त जिम्मेदारी
2007 बैच के आईपीएस अधिकारी सचिन कुमार अतुलकर को ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल के पुलिस महानिरीक्षक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे फिलहाल चंबल जोन मुरैना के पुलिस महानिरीक्षक हैं। अब वे मुरैना में अपना मौजूदा काम संभालने के साथ ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल की जिम्मेदारी भी देखेंगे।
चंबल जोन अपने आप में संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। मुरैना, भिंड और श्योपुर जैसे जिलों में अपराध और सीमा से जुड़ी चुनौतियाँ पुलिस के सामने रहती हैं। ऐसे में चंबल जोन के पुलिस महानिरीक्षक के पास ग्वालियर के विशेष सशस्त्र बल का अतिरिक्त प्रभार आने से दोनों क्षेत्रों के बीच बलों के समन्वय में मदद मिलने की उम्मीद है। विशेष सशस्त्र बल की वाहिनियाँ कानून-व्यवस्था बनाए रखने, संवेदनशील इलाकों में तैनाती और विशेष अभियानों में अहम भूमिका निभाती हैं।
सचिन कुमार अतुलकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से एक हैं। उनके पास लंबे प्रशासनिक अनुभव के साथ जोन स्तर की जिम्मेदारी पहले से है। ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल की कमान मिलने से उनके कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ है। आदेश के अनुसार यह व्यवस्था भी अस्थायी तौर पर अगले आदेश तक लागू रहेगी।
उज्जैन, इंदौर और भोपाल के अफसरों को भी नए दायित्व
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को 32वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल उज्जैन के सेनानी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। प्रदीप शर्मा 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे उज्जैन जिले की पुलिस व्यवस्था संभालने के साथ अब वाहिनी की कमान भी देखेंगे। उज्जैन धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश का अहम जिला है, जहाँ महाकाल मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। दीपावली के दिनों में भी उज्जैन में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है, इसलिए जिले की पुलिस व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहता है।
इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात वाहनी सिंह को मंदसौर नारकोटिक्स का अतिरिक्त प्रभार मिला है। वाहनी सिंह 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। नारकोटिक्स का काम मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर रोक से जुड़ा है। मंदसौर और उसके आसपास के इलाके अफीम और मादक पदार्थों को लेकर संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में इस प्रभार का महत्व बढ़ जाता है। अभिषेक आनंद को इस अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है, जो 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।
भोपाल में 25वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल के सेनानी नगेंद्र सिंह को पुलिस अधीक्षक, रेल भोपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। नगेंद्र सिंह 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। रेल पुलिस का काम ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा से जुड़ा है। दीपावली के दिनों में ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए रेल पुलिस की भूमिका भी अहम हो जाती है। भोपाल रेल मंडल से जुड़े स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना इस प्रभार की प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
27 अक्टूबर के तबादले से जुड़ी पृष्ठभूमि
बालाघाट के पुलिस अधीक्षक का पद 27 अक्टूबर को खाली हुआ था, जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा का तबादला देवास कर दिया गया था। उस दिन जारी आदेश में कई आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए थे। देवास और सागर के पुलिस अधीक्षक भी बदले गए थे। बालाघाट के पुलिस अधीक्षक को देवास की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि ग्वालियर के प्रभारी पुलिस अधीक्षक को सागर की कमान मिली थी।
उस तबादला सूची के बाद से बालाघाट में पुलिस अधीक्षक का पद रिक्त चल रहा था। नौ दिन तक जिले की पुलिस व्यवस्था बिना स्थायी पुलिस अधीक्षक के चल रही थी। 6 नवंबर के आदेश से यह रिक्ति भर गई है। प्रशासनिक लिहाज से यह सामान्य प्रक्रिया है कि तबादलों के बाद रिक्त पदों को भरने के लिए अलग से आदेश जारी किए जाते हैं।
मध्यप्रदेश में पुलिस अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त प्रभार के आदेश समय-समय पर जारी होते रहते हैं। त्योहारी मौसम से पहले जारी हुआ यह आदेश जिलों में पुलिस नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
अस्थायी व्यवस्था: अगले आदेश तक लागू रहेंगे बदलाव
गृह विभाग के आदेश में यह बात साफ तौर पर लिखी है कि ये सभी व्यवस्थाएँ अस्थायी तौर पर अगले आदेश तक लागू रहेंगी। इसका मतलब है कि मलय जैन की बालाघाट एसपी के रूप में नियुक्ति अस्थायी है, और चारों अधिकारियों को दिया गया अतिरिक्त प्रभार भी अस्थायी है। सरकार आगे चलकर इन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर सकती है और जरूरत पड़ने पर नए आदेश जारी कर सकती है।
अतिरिक्त प्रभार का मतलब यह होता है कि अधिकारी अपनी मौजूदा जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ नया दायित्व भी संभालता है। उदाहरण के लिए सचिन कुमार अतुलकर चंबल जोन मुरैना के पुलिस महानिरीक्षक बने रहेंगे और साथ में ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल की जिम्मेदारी भी देखेंगे। इसी तरह प्रदीप शर्मा उज्जैन के पुलिस अधीक्षक बने रहेंगे और 32वीं वाहिनी के सेनानी का काम भी देखेंगे।
अस्थायी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल प्रशासन में तब किया जाता है, जब किसी पद को तुरंत भरना हो, लेकिन स्थायी नियुक्ति के लिए प्रक्रिया में समय लगता हो। बालाघाट जैसे संवेदनशील जिले में पुलिस अधीक्षक का पद लंबे समय तक खाली रखना उचित नहीं माना जाता, इसलिए अस्थायी नियुक्ति के जरिए इसे भरा गया है।
आगे क्या: जिलों की कानून-व्यवस्था पर नजर
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि मलय जैन बालाघाट एसपी के रूप में कमान संभालने के बाद किन प्राथमिकताओं पर काम करते हैं। जिले में नक्सल विरोधी अभियानों, हॉक फोर्स के साथ तालमेल और त्योहारी दिनों की पुलिस व्यवस्था को लेकर उनके फैसले अहम होंगे। दीपावली के बाद भी जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी की जरूरत बनी रहेगी।
उज्जैन, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और मंदसौर में अतिरिक्त प्रभार मिलने वाले अधिकारियों के कामकाज पर भी नजर रहेगी। रेल पुलिस, नारकोटिक्स और विशेष सशस्त्र बल की वाहिनियों में अतिरिक्त नेतृत्व मिलने से इन इकाइयों की कार्यप्रणाली में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। आने वाले दिनों में गृह विभाग की ओर से और आदेश जारी होते हैं या नहीं, यह भी देखा जाएगा।
कुल मिलाकर 6 नवंबर का यह आदेश प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में एक अहम प्रशासनिक बदलाव है। बालाघाट को नौ दिन बाद मलय जैन बालाघाट एसपी के रूप में नया पुलिस अधीक्षक मिला है, जबकि चार वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ है। त्योहारी मौसम में जारी हुआ यह आदेश जिलों की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
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