Headlines

नक्सलवाद के बाद अब विकास की बारी: बालाघाट के 100 गांवों की बदलेगी तस्वीर, 225 करोड़ की योजना पर गांव-गांव काम शुरू

सांकेतिक चित्र: विकास की राह पर ग्रामीण इलाका सांकेतिक चित्र: विकास की राह पर ग्रामीण इलाका

बालाघाट ब्यूरो

सार: नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बालाघाट जिले के 100 गांवों में विकास की बड़ी पहल अब जमीन पर उतरने लगी है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने इन गांवों के लिए 225 करोड़ रुपये की विकास योजना पर काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया है और अब हर गांव की जरूरत के हिसाब से विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

बालाघाट जिला मध्य प्रदेश के उन इलाकों में गिना जाता रहा है, जहां नक्सलवाद ने लंबे समय तक विकास की रफ्तार को थामे रखा। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं इन गांवों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाईं। अब नक्सलवाद से मुक्ति के बाद सरकार ने इन गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू की है। इस पहल के तहत जिले के 100 चिह्नित गांवों में विकास कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

100 गांवों के लिए 225 करोड़ रुपये की योजना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल और पहले नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बैगा समुदाय के लोगों से संवाद किया। बैगा समुदाय को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह माना जाता है। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने इन क्षेत्रों के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की थी। इस राशि के अलावा विभिन्न विभाग अपनी योजनाओं और विभागीय बजट के माध्यम से भी विकास कार्य कराएंगे। योजना का मकसद सिर्फ बुनियादी ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि इन गांवों में रहने वाले परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

गांव-गांव पहुंचे अधिकारी, ग्रामीणों से सीधा संवाद

सांकेतिक चित्र: विकास की राह पर ग्रामीण इलाका
सांकेतिक चित्र: विकास की राह पर ग्रामीण इलाका

घोषणा को जमीन पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने 100 गांवों को अलग-अलग क्लस्टर में बांटा है। संबंधित विभागों के अधिकारियों को गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याओं को समझने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर सभी चिह्नित गांवों का भ्रमण पूरा करने और विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

26 अक्टूबर को विभागीय टीमों ने पांच विकासखंडों के गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की। लांजी विकासखंड के कट्टीपार, सटोना, बरगुड और देवरबेली गांवों के साथ दडेकसा, बिलालकसा, सोनगुड्डा, लुड, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिथली गांवों में तथा परसवाड़ा के चालीसबोड़ी और मोहनपुर और किरनापुर के सीतापार और बोरवन गांवों में अधिकारियों ने ग्रामीणों की जरूरतों का आकलन किया। 28 अक्टूबर को भी बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंड के गांवों में अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद किया। ग्रामीणों से मिले सुझावों के आधार पर अब विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर

विकास कार्ययोजना में गांवों की बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत सड़क, सिंचाई, पेयजल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की जरूरतों का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन बेहतर बनाने, किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने, पेयजल की समस्याओं को दूर करने और स्वास्थ्य केंद्रों तथा शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने पर है। गांवों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक गांव के हिसाब से विकास की प्राथमिकताएं तय की जा सकें।

खेती, पशुपालन और वनोपज से बढ़ेगी आमदनी

सरकार की योजना केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा, वन उपज पर आधारित आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर लघु उद्योगों और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद मुख्यधारा से जुड़ने की कोशिश

पिछले साल राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश से नक्सलवाद के उन्मूलन की घोषणा की थी। इसके बाद से पहले प्रभावित रहे इलाकों को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिश तेज हुई है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को लेकर स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है। यानी पहले सुरक्षा का माहौल मजबूत हुआ, अब विकास के काम और उसके साथ रोजगार के अवसर गांवों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इस पहल से उन गांवों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास की दौड़ में पीछे रह गए थे।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के भ्रमण और ग्रामीणों से संवाद के बाद अब हर गांव की जरूरत के हिसाब से विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। प्रस्तावों के आधार पर सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े कामों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ भी इन गांवों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि एक ही गांव में कई योजनाओं का समन्वित लाभ मिल सके। आने वाले दिनों में कार्ययोजना को अंतिम रूप देकर विकास कार्यों की शुरुआत की जाएगी। ग्रामीणों को इस पहल से बेहतर सुविधाएं और रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार