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मध्यप्रदेश में एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: हाई कोर्ट ने 1 दिसंबर तक कनेक्शन ब्लॉक करने पर लगाई रोक, नोटिस अवधि पूरी होने पर भी नहीं कटेगा सिलेंडर

सांकेतिक चित्र: रसोई में लाल एलपीजी सिलेंडर और गैस चूल्हा सांकेतिक चित्र

जबलपुर ब्यूरो

सार: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने पीएनजी नेटवर्क वाले क्षेत्रों में एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक करने के केंद्र सरकार के आदेश पर 1 दिसंबर 2026 तक अंतरिम रोक लगा दी है। हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब 90 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने पर भी किसी उपभोक्ता का एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक नहीं किया जा सकेगा और सिलेंडर की आपूर्ति जारी रहेगी। भोपाल सहित प्रदेश के उन हजारों परिवारों को इससे बड़ी राहत मिली है, जिनके इलाके में पाइप्ड गैस का नेटवर्क तो है, लेकिन उनके घर तक पीएनजी कनेक्शन नहीं पहुंचा है। एलपीजी कनेक्शन हाई कोर्ट के इस आदेश से त्योहार से पहले उपभोक्ताओं की बड़ी चिंता दूर हुई है।

मध्यप्रदेश के लाखों एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की सुविधा वाले क्षेत्रों में एलपीजी कनेक्शन बंद करने के केंद्र सरकार के आदेश पर 1 दिसंबर 2026 तक अंतरिम रोक लगा दी है। एलपीजी कनेक्शन हाई कोर्ट के इस आदेश का सीधा मतलब यह है कि जिन उपभोक्ताओं को कनेक्शन बंद करने का नोटिस मिला था, उनकी रसोई गैस की आपूर्ति फिलहाल नहीं रुकेगी। नोटिस की 90 दिन की अवधि पूरी हो जाने पर भी तेल कंपनियां अब एक दिसंबर तक किसी का कनेक्शन ब्लॉक नहीं कर सकेंगी।

यह मामला सिर्फ एक कानूनी आदेश तक सीमित नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है, जिनके घरों में आज भी खाना एलपीजी सिलेंडर पर ही बनता है। राजधानी भोपाल में ही तेल कंपनियों ने पीएनजी नेटवर्क की उपलब्धता का हवाला देकर 10 हजार से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक कर दिए थे। इनमें से करीब 4 हजार कनेक्शन अब भी ब्लॉक पड़े हैं। ऐसे में हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश उन परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो महीनों से अपने सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर परेशान थे।

एलपीजी कनेक्शन हाई कोर्ट के आदेश में क्या कहा गया

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ ने केंद्र सरकार के उस आदेश पर एक दिसंबर 2026 तक अंतरिम रोक लगाई है, जिसके तहत पीएनजी नेटवर्क वाले क्षेत्रों में एलपीजी कनेक्शन बंद करने की कार्रवाई की जा रही थी। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अल्पेश वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने की। याचिका में उपभोक्ताओं के एलपीजी कनेक्शन बंद करने की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।

अदालत के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल एक दिसंबर तक संबंधित उपभोक्ताओं के एलपीजी कनेक्शन बंद करने की कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। यह रोक अस्थायी है, यानी अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। लेकिन जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक उपभोक्ताओं के कनेक्शन सुरक्षित रहेंगे। इस आदेश से उन उपभोक्ताओं को राहत मिली है, जो अब तक एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं और जिनके घरों में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध नहीं है।

केंद्र के आदेश पर क्यों लगी रोक

केंद्र सरकार ने 24 मार्च को एक अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना के तहत उन क्षेत्रों में एलपीजी कनेक्शन बंद करने की व्यवस्था की गई थी, जहां पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा पहुंच चुकी है। सरकार का मकसद पाइप्ड गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा देना था, ताकि ज्यादा से ज्यादा घरों में पाइप से गैस पहुंचाई जा सके। इस व्यवस्था के तहत तेल कंपनियों ने पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में रहने वाले उपभोक्ताओं को 90 दिन का नोटिस देना शुरू कर दिया था। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद उनके एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक किए जा रहे थे और सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी जा रही थी।

याचिका में इसी व्यवस्था पर सवाल उठाया गया। याचिकाकर्ता की दलील थी कि किसी इलाके में पीएनजी नेटवर्क की उपलब्धता का मतलब यह नहीं है कि वहां के हर घर तक पीएनजी कनेक्शन पहुंच गया है। कई कॉलोनियों में पाइप लाइन तो बिछी है, लेकिन बड़ी संख्या में घरों में अब तक पीएनजी का कनेक्शन नहीं लगा है। ऐसे में सिर्फ नेटवर्क की उपलब्धता के आधार पर एलपीजी सुविधा समाप्त कर देना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। अदालत ने इस दलील को गंभीरता से लिया और केंद्र के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

सांकेतिक चित्र: गैस चूल्हे पर नीली लौ
सांकेतिक चित्र

याचिका किसने दायर की और क्या दलील दी गई

यह याचिका अखिल भारतीय उपभोक्ता कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विजय श्रीवास्तव की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने गुरुवार को इस आदेश की जानकारी दी। याचिका में केंद्र सरकार के 24 मार्च के निर्णय को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि पीएनजी नेटवर्क वाले क्षेत्रों में रहने मात्र से उपभोक्ताओं के एलपीजी कनेक्शन नहीं काटे जा सकते।

याचिका में यह बात भी उठाई गई कि एलपीजी सिलेंडर लाखों परिवारों की रसोई की बुनियादी जरूरत है। जब तक किसी घर में पीएनजी का कनेक्शन वास्तव में नहीं लग जाता, तब तक उसका एलपीजी कनेक्शन बंद करना उसे बिना ईंधन के छोड़ देने जैसा है। अदालत ने याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला किया। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। उस सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से भी पक्ष रखा जाएगा।

भोपाल में अब तक क्या हुआ: 10 हजार से ज्यादा कनेक्शन ब्लॉक

इस आदेश का सबसे ज्यादा असर राजधानी भोपाल में देखने को मिला है। भोपाल में तेल कंपनियों ने पीएनजी नेटवर्क की उपलब्धता का हवाला देकर 10 हजार से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक कर दिए थे। इसके बाद शहर में इस नियम को लेकर भारी विवाद हुआ था। बड़ी संख्या में उपभोक्ता अचानक बिना सिलेंडर के रह गए थे, जबकि उनके घरों में पीएनजी का कनेक्शन लगा ही नहीं था।

विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने एक कमेटी बनाई थी। यह कमेटी अलग-अलग कॉलोनियों में जाकर जांच करती है कि वहां सच में पीएनजी की लाइन चालू हालत में है या नहीं। कमेटी की जांच के बाद भी भोपाल में अभी करीब 4 हजार एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक पड़े हुए हैं। इन उपभोक्ताओं को अब हाई कोर्ट के आदेश से उम्मीद जगी है कि उनकी सिलेंडर आपूर्ति फिर से शुरू हो सकेगी।

भोपाल के अलावा प्रदेश के दूसरे शहरों में भी ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्हें पीएनजी नेटवर्क का हवाला देकर नोटिस मिले थे। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहरों में भी पाइप्ड गैस का नेटवर्क धीरे-धीरे फैल रहा है। ऐसे में हाई कोर्ट का आदेश पूरे प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है। जिन उपभोक्ताओं को नोटिस मिला था, वे अब एक दिसंबर तक निश्चिंत रह सकते हैं।

किन उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा राहत मिली

एलपीजी कनेक्शन हाई कोर्ट के आदेश से मिली यह राहत उन क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, जहां पीएनजी नेटवर्क तो उपलब्ध है, लेकिन प्रत्येक घर तक पीएनजी कनेक्शन की पहुंच सुनिश्चित नहीं हुई है। ऐसे में केवल नेटवर्क की उपलब्धता को एलपीजी सुविधा समाप्त करने का आधार बनाने पर न्यायिक हस्तक्षेप हुआ है। अदालत का रुख साफ है कि जब तक हर घर तक पाइप्ड गैस नहीं पहुंच जाती, तब तक एलपीजी को उस घर की जरूरत से अलग नहीं किया जा सकता।

किराए के मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए भी यह आदेश राहत लेकर आया है। कई किराएदारों के पास अपने नाम पर पीएनजी कनेक्शन लेने की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे परिवार सालों से एलपीजी सिलेंडर पर ही निर्भर हैं। बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों के लिए भी सिलेंडर ही सबसे भरोसेमंद ईंधन है। पाइप्ड गैस का कनेक्शन लेने में समय, कागजात और खर्च लगता है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, एलपीजी ही उनकी रसोई का सहारा है।

दीपावली के त्योहार के ठीक पहले आया यह आदेश और भी महत्वपूर्ण हो गया है। त्योहारों के दिनों में रसोई में खाना बनाने का काम बढ़ जाता है। मेहमानों के आने-जाने और पकवान बनाने के लिए गैस की जरूरत ज्यादा होती है। ऐसे समय में सिलेंडर की आपूर्ति रुक जाना किसी भी परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन सकता था। हाई कोर्ट के आदेश ने त्योहार से पहले उपभोक्ताओं की यह चिंता दूर कर दी है।

27 नवंबर की सुनवाई में क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। उस दिन अदालत केंद्र सरकार का पक्ष सुनेगी और याचिकाकर्ता की दलीलों पर आगे विचार करेगी। अंतरिम रोक का मतलब यह है कि अंतिम फैसला अभी बाकी है। 27 नवंबर की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि रोक को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना के पक्ष में तर्क रखे जाएंगे, जबकि याचिकाकर्ता उपभोक्ताओं की परेशानी का पक्ष रखेंगे।

उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि जब तक हर घर में पीएनजी कनेक्शन नहीं लग जाता, तब तक एलपीजी की व्यवस्था बंद नहीं होनी चाहिए। वहीं, पाइप्ड गैस को बढ़ावा देने के पीछे सरकार का तर्क यह है कि पाइप से गैस सस्ती और सुविधाजनक होती है। अदालत को दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना होगा। 27 नवंबर की सुनवाई पर प्रदेश के लाखों एलपीजी उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।

एलपीजी और पीएनजी में क्या अंतर है

एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस वह गैस है, जो सिलेंडर में भरकर घरों तक पहुंचाई जाती है। उपभोक्ता सिलेंडर बुक कराते हैं और डिलीवरी के बाद उसे अपने गैस चूल्हे से जोड़कर इस्तेमाल करते हैं। देश के करोड़ों घरों में आज भी खाना इसी सिलेंडर पर बनता है। 1 नवंबर से वाणिज्यिक सिलेंडर के दाम में बदलाव भी उपभोक्ताओं के लिए चर्चा का विषय रहा था, लेकिन घरेलू सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ था।

पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस पाइप लाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाई जाती है। इसमें सिलेंडर बुक कराने या बदलने की जरूरत नहीं होती। गैस मीटर से नापी जाती है और महीने के अंत में बिल आता है। बड़े शहरों में पीएनजी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में कॉलोनियों और घरों तक यह सुविधा नहीं पहुंची है। जहां पाइप लाइन बिछी भी है, वहां हर घर में कनेक्शन लगने में समय लगता है।

इसीलिए अदालत ने यह साफ किया है कि नेटवर्क की उपलब्धता और घर तक कनेक्शन की पहुंच, दोनों अलग-अलग बातें हैं। जब तक दूसरी बात पूरी नहीं होती, तब तक पहली के आधार पर एलपीजी बंद नहीं की जा सकती।

एलपीजी कनेक्शन हाई कोर्ट के फैसले के बाद उपभोक्ताओं को अब क्या करना चाहिए

जिन उपभोक्ताओं को कनेक्शन बंद करने का नोटिस मिला था, उन्हें अब घबराने की जरूरत नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद एक दिसंबर तक उनका कनेक्शन ब्लॉक नहीं किया जा सकेगा। उपभोक्ता अपने एलपीजी कनेक्शन से जुड़े कागजात, नोटिस की प्रति और बुकिंग की रसीदें संभालकर रखें। अगर किसी उपभोक्ता की सिलेंडर आपूर्ति पहले से रुकी हुई है, तो वह अपने गैस वितरक से संपर्क करके हाई कोर्ट के आदेश की जानकारी दे सकता है।

जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन लगवाना संभव है, वे इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन जब तक पीएनजी का कनेक्शन वास्तव में चालू नहीं हो जाता, तब तक एलपीजी सिलेंडर ही रसोई का भरोसा है। उपभोक्ताओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह रोक अंतरिम है। 27 नवंबर की सुनवाई के बाद अदालत का अगला आदेश ही इस मामले की अंतिम दिशा तय करेगा। तब तक उपभोक्ता अपनी रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर निश्चिंत रह सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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