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प्रधानमंत्री मोदी से मिले एशियाई पैरा गेम्स के चैंपियन: 114 पदकों के रिकॉर्ड प्रदर्शन पर सम्मान, लॉस एंजिल्स 2028 का लक्ष्य तय

सांकेतिक चित्र: पोडियम पर रखे स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली ब्यूरो

इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में सम्मान समारोह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पहुंचे, जहां एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल के खिलाड़ियों से उन्होंने मुलाकात की। इस कार्यक्रम में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से एक-एक करके बातचीत की, उनके अनुभव सुने और देश की ओर से उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में खिलाड़ियों के साथ उनके कोच, पैरालिंपिक समिति और भारतीय ओलिंपिक संघ के अधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि और खेल मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें खिलाड़ियों से मिलने का लंबे समय से इंतजार था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने सिर्फ पदक नहीं जीते, बल्कि करोड़ों देशवासियों का दिल भी जीता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, सबसे ऊंची उड़ान हौसलों से होती है, और भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने इसे सच करके दिखाया है। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से पूरे दल को बधाई दी। मुलाकात के दौरान का माहौल बेहद आत्मीय रहा। खिलाड़ियों ने प्रधानमंत्री को अपने पदक दिखाए, कुछ ने मिठाई खिलाई, कुछ ने ऑटोग्राफ लिए और कई ने अपने खेल के अनुभव साझा किए।

यह मुलाकात प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से पहले ही तय की गई थी। चार नवंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया था कि प्रधानमंत्री पांच नवंबर को दल से मिलेंगे और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मान देंगे। खेलों के समापन के बाद प्रधानमंत्री ने 25 अक्टूबर को भी दल को बधाई दी थी। उन्होंने तब कहा था कि 114 पदकों के साथ भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देश के लिए गर्व और खुशी का अवसर है। गुरुवार की मुलाकात उसी बधाई को व्यक्तिगत सम्मान में बदलने का अवसर बनी।

खिलाड़ियों ने भेंट किए खास स्मृति चिह्न

मुलाकात के दौरान कई खिलाड़ियों ने प्रधानमंत्री को अपने खेल से जुड़े विशेष स्मृति चिह्न भेंट किए। धाविका सिमरन शर्मा ने प्रधानमंत्री को अपने दौड़ के जूते भेंट किए। सिमरन ने महिलाओं की 100 मीटर और 200 मीटर टी12 स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते हैं। उनके जूते भेंट करने का यह क्षण कार्यक्रम की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक रहा।

गोला फेंक के स्वर्ण पदक विजेता सचिन सरजेराव ने प्रधानमंत्री को गोला भेंट किया। सचिन ने एफ45/46 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। खिलाड़ियों की ओर से भेंट किए गए ये स्मृति चिह्न उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहते हैं। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की इन भेंटों को सहर्ष स्वीकार किया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

खिलाड़ियों ने प्रधानमंत्री को बताया कि खेलों के दौरान उन्हें देशभर से जो प्यार और समर्थन मिला, उसने उनका हौसला बढ़ाया। कई खिलाड़ियों ने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय पल है। इस मुलाकात ने खिलाड़ियों को यह भरोसा दिया

कि देश उनके साथ खड़ा है और उनकी मेहनत को पहचान मिल रही है।

सांकेतिक चित्र: दौड़ के ट्रैक पर ब्लेड के साथ दौड़ता पैरा-एथलीट
सांकेतिक चित्र

114 पदक: खेल-दर-खेल प्रदर्शन

भारत ने आइची-नागोया में हुए एशियाई पैरा गेम्स 2026 में कुल 114 पदक जीते, जिनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। दल के 97 खिलाड़ियों ने मिलकर यह पदक तालिका तैयार की। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।

खेल-दर-खेल प्रदर्शन देखें तो पैरा-एथलेटिक्स भारत का सबसे मजबूत खेल रहा, जिसमें 65 पदक आए, जिनमें 22 स्वर्ण पदक शामिल हैं। बैडमिंटन में भारत को 16 पदक मिले, जबकि तैराकी में 11 पदक आए। बाकी पदक अन्य खेलों से आए। खेलों के दौरान भारत के खिलाड़ियों ने पांच विश्व रिकॉर्ड भी बनाए। 34 बेटियों ने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। चार स्पर्धाओं में पूरा पोडियम भारतीय खिलाड़ियों का रहा, यानी स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों पदक भारत के खाते में आए।

पहली बार खेलों में उतरे 61 खिलाड़ियों ने भी पदक जीते, जो भारतीय पैरा खेलों की गहराई को दिखाता है। निशानेबाज मोना अग्रवाल ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया, जबकि पदार्पण करने वाले एक खिलाड़ी ने अपने पहले ही प्रयास में विश्व रिकॉर्ड बना दिया। यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय पैरा खेल अब सिर्फ कुछ सितारों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि एक मजबूत व्यवस्था बन चुकी है।

प्रधानमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय पैरा खेलों की लंबी यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2010 में भारत ने 14 पदक जीते थे और 2026 में यह संख्या 114 तक पहुंच गई है। यह 14 से 114 की यात्रा भारतीय खिलाड़ियों की मेहनत, कोचों के समर्पण और खेल व्यवस्था में हुए बदलाव की कहानी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रगति एक दिन में नहीं आई, बल्कि सालों की तैयारी का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि आइची-नागोया का पोडियम उनके जीवन का आखिरी पड़ाव नहीं है। इसे आगे की तैयारी के लिए लॉन्चिंग पैड की तरह इस्तेमाल करना है। उन्होंने लॉस एंजिल्स 2028 पैरालिंपिक को अगला बड़ा लक्ष्य बताया और कहा कि वहां और ज्यादा खिलाड़ी जाएं और और ज्यादा पदक आएं, यही देश की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से प्रतिभा खोज और नए खिलाड़ियों को तैयार करने में भी मदद करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि खेलों में भारत की प्रगति के पीछे टॉप्स और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं की बड़ी भूमिका है। इन योजनाओं के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, विदेशी एक्सपोजर, उपकरण और आर्थिक सहायता मिलती है। देशभर में खेलो इंडिया केंद्रों के जरिए युवा प्रतिभाओं को खोजा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेड इन इंडिया खेल उपकरणों को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकता है, ताकि भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तरीय सामान के साथ अभ्यास कर सकें।

आइची-नागोया 2026: भारत की ऐतिहासिक यात्रा

एशियाई पैरा गेम्स 2026 का आयोजन जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर तक हुआ था। भारत ने इन खेलों के लिए 168 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जिसमें अधिकारी और सहयोगी कर्मचारी भी शामिल थे। दल के कुल 281 सदस्यों में 168 खिलाड़ी, 98 अधिकारी और सहयोगी कर्मचारी तथा 15 दल कर्मचारी शामिल थे। उद्घाटन समारोह में पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत और धाविका सिमरन शर्मा ने भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए ध्वज थामा था।

खेलों की शुरुआत से पहले ही प्रधानमंत्री ने दल को शुभकामनाएं दी थीं। 18 अक्टूबर को उन्होंने कहा था कि भारतीय पैरा खिलाड़ियों का जज्बा, समर्पण और अदम्य भावना 140 करोड़ भारतीयों को प्रेरित करती है। उन्होंने खिलाड़ियों से आत्मविश्वास के साथ खेलने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की अपील की थी। खेलों के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने हर दिन पदक जीते और देश का नाम ऊंचा किया।

आइची-नागोया में भारतीय दल का प्रदर्शन कई मायनों में खास रहा। पहली बार भारत ने 100 से ज्यादा पदक जीते। महिला खिलाड़ियों ने बड़ी संख्या में पदक जीते। युवा खिलाड़ियों ने पदार्पण में ही विश्व रिकॉर्ड बनाए। यह प्रदर्शन भारतीय पैरा खेलों के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।

हांगझोउ 2023 से 114 तक का सफर

इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हांगझोउ 2023 में रहा था, जहां भारत ने 108 पदक जीते थे, जिनमें 27 स्वर्ण पदक शामिल थे। आइची-नागोया में भारत ने न सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाई, बल्कि स्वर्ण पदकों की संख्या भी 27 से बढ़कर 30 हो गई। यह सुधार तीन साल की मेहनत का परिणाम है।

2010 में गुआंगझोउ में हुए एशियाई पैरा खेलों में भारत ने सिर्फ 14 पदक जीते थे। उसके बाद 2014 में इंचियोन में 33, 2018 में जकार्ता में 72 और 2023 में हांगझोउ में 108 पदक आए। 2026 में 114 पदकों के साथ भारत ने एक नया शिखर छुआ है। यह लगातार बढ़ता ग्राफ भारतीय पैरा खेलों की मजबूत नींव को दर्शाता है।

इस प्रगति के पीछे कई कारण हैं। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलीं। विदेशी कोचों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव बढ़ा। खेल विज्ञान और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं बेहतर हुईं। सरकार की योजनाओं के तहत खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा भी मिली, जिससे वे बिना चिंता के खेल पर ध्यान दे सके।

दिव्यांगजन कल्याण और खेलों की तैयारी

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में हुए हाल के फैसलों का भी जिक्र किया। पिछले महीने केंद्रीय कैबिनेट ने दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता शर्तों में बड़ा बदलाव किया था। अब 80 प्रतिशत दिव्यांगता की जगह 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता पर भी पेंशन मिल सकेगी। 18 साल की न्यूनतम आयु की शर्त भी हटा दी गई है, यानी जन्म से ही पात्र दिव्यांगजनों को पेंशन मिल सकेगी।

इस फैसले के तहत राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दी गई है। योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया गया है, जबकि दिव्यांगजन पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के नाम से जानी जाएगी। पात्र लाभार्थियों को 0 से 79 साल की आयु तक 375 रुपये और 80 साल से ऊपर के लाभार्थियों को 625 रुपये प्रति माह की सहायता मिलेगी। इस बदलाव से लाखों दिव्यांगजनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

दिव्यांगजनों के लिए सांकेतिक भाषा के प्रचार-प्रसार और सुलभ शिक्षा पर भी सरकार का जोर है। स्कूलों की किताबों को सांकेतिक भाषा में उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है। खेलों के क्षेत्र में भी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र और सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, ताकि प्रतिभा किसी भी बाधा के कारण पीछे न रहे।

एशियाई खेलों के चैंपियनों से भी हुई थी मुलाकात

इससे पहले 15 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने एशियाई खेलों के पदक विजेताओं से भी मुलाकात की थी। वह मुलाकात नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में हुई थी। उस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को लॉस एंजिल्स 2028 ओलिंपिक के लिए प्रेरित किया था और भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं पर बात की थी, जिनमें 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी और 2036 ओलिंपिक की मेजबानी का प्रयास शामिल है।

एशियाई खेलों में भारत ने 85 पदक जीते थे, जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल थे। उस मुलाकात में हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह, मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन, भारोत्तोलक मीराबाई चानू और नाविक नेत्रा कुमारन जैसे खिलाड़ियों ने प्रधानमंत्री से अपने अनुभव साझा किए थे। पैरा खिलाड़ियों से मुलाकात उसी सिलसिले की अगली कड़ी है, जो दिखाती है कि सरकार खेलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

प्रधानमंत्री की खिलाड़ियों से नियमित मुलाकात अब एक परंपरा बन गई है। बड़े खेल आयोजनों से पहले और बाद में प्रधानमंत्री खिलाड़ियों से मिलते हैं, उनकी हौसला अफजाई करते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि प्रधानमंत्री की यह व्यक्तिगत रुचि उन्हें बड़ा सपना देखने और उसे पूरा करने की प्रेरणा देती है।

लॉस एंजिल्स 2028: अगला लक्ष्य

अब भारतीय पैरा खिलाड़ियों की नजरें लॉस एंजिल्स 2028 पैरालिंपिक पर हैं। प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि अगला लक्ष्य वहां और ज्यादा खिलाड़ियों के साथ जाना और और ज्यादा पदक जीतना है। इसके लिए तैयारी अभी से शुरू हो गई है। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और खेल विज्ञान की सुविधाओं को और मजबूत किया जा रहा है।

भारतीय पैरा खेलों के सामने अब नई चुनौतियां भी हैं। पदकों की संख्या बढ़ने के साथ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। दूसरे देश भी अपनी तैयारी तेज कर रहे हैं। ऐसे में भारत को अपनी प्रतिभा खोज व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। गांव-गांव से प्रतिभाशाली दिव्यांग खिलाड़ियों को खोजकर उन्हें प्रशिक्षण देना होगा। खेलो इंडिया केंद्रों के जरिए यह काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

आइची-नागोया की सफलता ने भारतीय पैरा खेलों को नई ऊंचाई दी है। 114 पदकों का रिकॉर्ड, पांच विश्व रिकॉर्ड और 61 पदार्पण करने वाले पदक विजेता इस बात के सबूत हैं कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। अब जरूरत है इस गति को बनाए रखने की। लॉस एंजिल्स 2028 में भारतीय दल से और बड़े प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है, और गुरुवार की मुलाकात ने उस तैयारी को नई ऊर्जा दी है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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