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वोट बचाओ रैली से गायब रहने पर निलंबन के बाद युवा कांग्रेस में बगावती सुर: बिना नोटिस कार्रवाई पर आपत्ति, मामला दिल्ली पहुंचेगा

सांकेतिक चित्र: रैली मैदान में जनसमूह और मंच सांकेतिक चित्र

भोपाल ब्यूरो

सार: दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को हुई वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली से अनुपस्थित रहने पर मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारियों को निलंबित किए जाने के बाद संगठन के भीतर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। निलंबित प्रदेश महासचिव रोहित राजौरिया ने बिना कारण बताओ नोटिस के कार्रवाई किए जाने पर आपत्ति जताई है और केंद्रीय संगठन से शिकायत की तैयारी की बात कही है। उधर, प्रदेश युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि निलंबन राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर हुआ है और अनुपस्थिति का कारण मान्य होने पर इस पर पुनर्विचार किया जाएगा।

बिना नोटिस कार्रवाई पर निलंबित नेताओं की आपत्ति

निलंबन के आदेश के बाद मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के भीतर पहली खुली असहमति सामने आई है। निलंबित प्रदेश महासचिव रोहित राजौरिया ने कहा है कि बिना कारण बताओ नोटिस दिए यह कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि किसी भी पदाधिकारी को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना निलंबित करना संगठनात्मक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

राजौरिया ने इस मामले को केंद्रीय संगठन तक ले जाने की बात कही है। उनके अनुसार निलंबित पदाधिकारी केंद्रीय संगठन से शिकायत करेंगे और अपनी बात रखेंगे। इस बयान के बाद यह मामला प्रदेश की सीमा से आगे बढ़कर दिल्ली तक पहुंचने की ओर बढ़ गया है। प्रदेश युवा कांग्रेस के भीतर इस घटनाक्रम को संगठन के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

निलंबित किए गए 60 पदाधिकारियों में नौ जिला अध्यक्ष, पांच उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। इनमें से कई पदाधिकारी लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं। निलंबन के बाद इन पदाधिकारियों की संगठनात्मक भूमिका पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है। आदेश में कहा गया है कि यह निलंबन आगामी आदेश तक जारी रहेगा।

तीन नवंबर को जारी हुआ था निलंबन आदेश

मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ने तीन नवंबर को निलंबन का आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया कि एक नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली में अनुपस्थित रहने के कारण संगठनात्मक अनुशासनहीनता का मामला सामने आया है। इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक निलंबित किया जाता है।

आदेश में यह भी कहा गया कि यह कार्रवाई भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। इसका उद्देश्य संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखना और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना है। निलंबन आदेश पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश प्रभारी शिवी सिंह चौहान तथा सह-प्रभारी रूपेश भदौरिया और यज्ञवल्क्य श्रीकांत जिचकार के हस्ताक्षर हैं।

आदेश में निलंबन की अवधि के बारे में कोई समय-सीमा नहीं बताई गई है। केवल यह कहा गया है कि निलंबन आगामी आदेश तक लागू रहेगा। इसका अर्थ है कि जब तक केंद्रीय या प्रदेश संगठन की ओर से कोई नया आदेश नहीं आता, तब तक निलंबित पदाधिकारी संगठनात्मक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकेंगे।

सांकेतिक चित्र: खाली सभाकक्ष में मंच और माइक
सांकेतिक चित्र

किन-किन पदाधिकारियों पर हुई कार्रवाई

निलंबित किए गए 60 पदाधिकारियों में संगठन के हर स्तर के लोग शामिल हैं। नौ जिला अध्यक्षों में छतरपुर के मानवेंद्र सिंह परमार, मैहर के सौरभ शर्मा, आगर के पृथ्वीराज चौहान, नीमच के मनमोहन शक्तावत, बुरहानपुर के अर्जुन जांगले, अनूपपुर के मानवेंद्र मिश्रा, गुना के पंचम भील, बड़वानी के आदित्य गोयल और भिंड के मनीष पुरोहित शामिल हैं।

पांच उपाध्यक्षों में शिवराज यादव, राजवीर सिंह कुड़िया, योगिता सिंह परिहार, प्रमोद सिंह खरे और नीरज पटेल शामिल हैं। महासचिवों में रोहित राजौरिया, राहुल हितेश ठाकुर, सुमन मौर्य और रिया पटेल सहित कुल 14 पदाधिकारी निलंबित किए गए हैं। इसके अलावा 32 सचिवों पर भी कार्रवाई हुई है।

एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पदाधिकारियों पर कार्रवाई से प्रदेश युवा कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर सीधा असर पड़ा है। नौ जिलों में जिला अध्यक्ष के पद पर काम रुक गया है। प्रदेश स्तर पर भी उपाध्यक्ष और महासचिव स्तर के कई पद खाली हो गए हैं। संगठन को अब इन पदों पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी या निलंबन पर पुनर्विचार करना होगा।

दिल्ली रैली से क्यों जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला एक नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली से जुड़ा है। यह महारैली इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध करना था।

रैली में देशभर से कांग्रेस और गठबंधन के कार्यकर्ताओं और नेताओं को जुटने का आह्वान किया गया था। मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों को भी रैली में शामिल होने के निर्देश दिए गए थे। संगठन की ओर से रैली में भीड़ जुटाने और उपस्थिति दर्ज कराने की जिम्मेदारी तय की गई थी।

रैली के बाद जब उपस्थिति की समीक्षा की गई तो पाया गया कि मध्य प्रदेश के 60 पदाधिकारी रैली में शामिल नहीं हुए थे। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तीन नवंबर को निलंबन का आदेश जारी कर दिया। रैली में शामिल नहीं होने के पीछे क्या कारण रहे, इस पर निलंबित पदाधिकारियों और संगठन के बीच अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।

तीन राज्यों से सात राज्यों तक फैली कार्रवाई

यह कार्रवाई केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रही। पहले चरण में तीन राज्यों के कुल 83 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया। इनमें मध्य प्रदेश के 60, हरियाणा के 10 और हिमाचल प्रदेश के 13 पदाधिकारी शामिल थे। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा पदाधिकारियों पर कार्रवाई हुई।

इसके बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ा। चार नवंबर तक सात राज्यों के 200 से अधिक पदाधिकारी निलंबित किए जा चुके थे। इनमें गुजरात के 49, पश्चिम बंगाल के 26, उत्तर प्रदेश-मध्य के 11, तेलंगाना के 14, हरियाणा के 10, मध्य प्रदेश के 60 और झारखंड के 32 पदाधिकारी शामिल हैं। इस तरह कुल 202 पदाधिकारियों पर कार्रवाई हुई।

भारतीय युवा कांग्रेस ने इन सभी मामलों में एक ही आधार अपनाया है। रैली में अनुपस्थिति को संगठनात्मक अनुशासनहीनता माना गया है और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। देशभर में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में निलंबन से यह संकेत मिलता है कि संगठन रैली में उपस्थिति को अनुशासन का पैमाना मान रहा है।

पार्टी का पक्ष: अनुशासन और राष्ट्रीय निर्देश

प्रदेश युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि निलंबन केंद्रीय संगठन के निर्देश पर हुआ है। उनके अनुसार रैली में शामिल होने के निर्देश पहले से दिए गए थे और अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया है। संगठन का कहना है कि अनुशासन बनाए रखना किसी भी राजनीतिक संगठन के लिए जरूरी होता है।

पार्टी पदाधिकारियों ने यह भी कहा है कि सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। अनुपस्थिति का कारण मान्य होने पर निलंबन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। इसका अर्थ है कि निलंबित पदाधिकारी अपना पक्ष रख सकते हैं और यदि उनका कारण उचित पाया गया तो उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पर पुनर्विचार हो सकता है।

संगठन का यह रुख निलंबित नेताओं के लिए एक रास्ता खोलता है। उन्हें अपनी अनुपस्थिति का कारण बताना होगा और यह साबित करना होगा कि उनकी गैरहाजिरी किसी वैध वजह से थी। इसके बाद ही उनके निलंबन पर पुनर्विचार संभव होगा।

निलंबित नेताओं का पक्ष: सुनवाई का अधिकार

दूसरी ओर, निलंबित नेताओं का कहना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया। निलंबित प्रदेश महासचिव रोहित राजौरिया ने कहा कि बिना नोटिस दिए यह कदम उठाया गया। उनका कहना है कि संगठनात्मक प्रक्रिया में पहले नोटिस देना और फिर जवाब सुनना जरूरी होता है।

राजौरिया ने कहा है कि वे इस मामले की शिकायत केंद्रीय संगठन से करेंगे। उनका मानना है कि केंद्रीय संगठन के समक्ष अपनी बात रखने से न्याय मिल सकता है। इस बयान के बाद यह मामला प्रदेश से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने की ओर बढ़ गया है।

इस विवाद में दोनों पक्षों की अपनी-अपनी बात है। संगठन का कहना है कि अनुशासनहीनता पर कार्रवाई जरूरी थी, जबकि निलंबित नेताओं का कहना है कि प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। अब यह देखना होगा कि केंद्रीय संगठन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

आगे क्या होगा

इस मामले का अगला चरण केंद्रीय संगठन के समक्ष शिकायत पर निर्भर करेगा। निलंबित पदाधिकारियों की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद केंद्रीय संगठन इस पर विचार करेगा। यदि उनकी अनुपस्थिति का कारण मान्य पाया गया तो निलंबन समाप्त हो सकता है। यदि कारण मान्य नहीं पाया गया तो निलंबन जारी रह सकता है।

मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर भी इस विवाद का असर दिखेगा। नौ जिला अध्यक्षों और प्रदेश स्तर के 51 पदाधिकारियों के निलंबन से संगठन की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। संगठन को यह तय करना होगा कि निलंबित पदों पर नई नियुक्तियां की जाएं या निलंबन पर पुनर्विचार कर पदाधिकारियों को वापस लिया जाए।

राजनीतिक रूप से भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन पहले से ही अनुशासन और समन्वय को लेकर सवालों के घेरे में है। एक साथ 60 पदाधिकारियों का निलंबन और फिर उनके विरोध के स्वर संगठन की आंतरिक स्थिति को सामने लाते हैं। आने वाले दिनों में केंद्रीय संगठन का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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