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पराली नियंत्रण में मध्य प्रदेश बनेगा देश का रोल मॉडल: किसान संघ से मिले मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्राकृतिक खेती वाले पशुपालकों को मिलेगा अनुदान

पराली नियंत्रण मध्य प्रदेश — सांकेतिक चित्र: सूर्यास्त के समय कटे हुए खेत में काम करता ट्रैक्टर सांकेतिक चित्र

भोपाल ब्यूरो

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों से चर्चा की। बैठक में पराली नियंत्रण में मध्य प्रदेश को देश के लिए रोल मॉडल बनाने के निर्देश दिए गए, प्राकृतिक खेती करने वाले पशुपालकों और गौशालाओं के संचालकों को अनुदान का लाभ देने की घोषणा की गई, और किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली देने के वादे को पूरा करने का भरोसा दिया गया। किसान संघ ने डिफाल्टर किसानों का ब्याज माफ करने और कम वर्षा वाले जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी बैठक में रखी।

समत्व भवन में किसान संघ से चर्चा, सात सूत्रीय मांग पत्र पर मंथन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। यह बैठक हर तीन माह में होने वाली किसान मंच की बैठक के तहत आयोजित की गई थी, जिसमें किसानों से जुड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक में कृषि, बिजली, सिंचाई और खाद वितरण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

भारतीय किसान संघ ने 13 अक्टूबर को सरकार के सामने किसानों की समस्याओं को लेकर सात सूत्रीय मांग पत्र रखा था। इसमें समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी, कम वर्षा वाले जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने, फसल नुकसान का मुआवजा देने, सिंचाई की समस्याओं के समाधान, अघोषित बिजली कटौती रोकने, खाद की कमी दूर करने और जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने जैसी मांगें शामिल थीं। मंगलवार की बैठक में इन्हीं मांगों पर मुख्यमंत्री से विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में निरंतर फैसले लेगी। उन्होंने कहा कि युवाओं का कृषि पाठ्यक्रमों और कृषि कार्य के प्रति आकर्षण बढ़े, इसके लिए भारतीय किसान संघ भी सहयोगी भूमिका निभा सकता है। किसानों को नई कृषि तकनीक की जानकारियां देने, उन्नत उपकरणों और नए कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए प्रेरित करने का कार्य प्रदेश में किया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष में बड़े स्तर पर ऐसे प्रयास किए गए हैं। बलराम कृषि महोत्सव से कृषि क्षेत्र को समृद्ध और सशक्त बनाने में भरपूर सहयोग मिला है।

पराली नियंत्रण में मध्य प्रदेश बनेगा रोल मॉडल

बैठक का सबसे अहम बिंदु पराली नियंत्रण को लेकर रहा। मुख्यमंत्री ने पराली नियंत्रण के कार्य में मध्य प्रदेश को रोल मॉडल बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन में प्रदेश को देश के लिए एक उदाहरण बनाया जाएगा। फसलों को विभिन्न पशुओं से होने वाले नुकसान की रोकथाम के लिए बोमा कैप्चरिंग पद्धति के प्रयोग प्रदेश में सफल हुए हैं, और इस तरह के व्यावहारिक उपायों को आगे भी बढ़ाया जाएगा।

पराली का मुद्दा हर साल रबी की बुवाई से पहले चर्चा में आता है। धान की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई के निपटान को लेकर किसान अक्सर परेशान रहते हैं। नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है, हवा में धुआं घुलता है और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। ऐसे में पराली के बेहतर प्रबंधन के लिए मशीनों और वैकल्पिक उपायों का उपयोग ही स्थायी रास्ता माना जाता है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर इस दिशा में काम तेज होने की उम्मीद है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने हाल ही में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को पुरस्कृत किए जाने की जानकारी भी दी। विजेताओं को ट्रैक्टर, बुलेट मोटरसाइकिल और स्कूटी प्रदान की गई है। कृषि क्षेत्र से जुड़ी प्रतियोगिताओं के जरिए किसानों और युवाओं को नई तकनीक और बेहतर तरीकों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

सांकेतिक चित्र: गांव के पास चरागाह में चरती देसी गायें
सांकेतिक चित्र

प्राकृतिक खेती करने वाले पशुपालकों को मिलेगा अनुदान

बैठक में प्राकृतिक खेती और गोपालन को प्रोत्साहन देने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गौशालाओं का संचालन करने वाले ऐसे पशुपालकों को भी अनुदान का लाभ देगी, जो जैविक और प्राकृतिक खेती को सशक्त करेंगे। गोवंश से प्राकृतिक खेती में कई तरह से सहयोग मिलता है, और इसी उद्देश्य से किसानों की सहकारी समितियों को गोपालन के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने किसान संघ से प्रदेश स्तर पर सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया को गति देने में सहयोग की अपेक्षा जताई है। सहकारी समितियों के जरिए किसान संगठित होकर गोपालन, प्राकृतिक खेती और कृषि आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ा सकते हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में कृषि आधारित उद्योग स्थापित करने की शुरुआत की गई है, और यह कार्य आगे भी चलता रहेगा।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का मकसद खेती की लागत घटाना और मिट्टी की सेहत सुधारना है। रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके किसान अपनी जमीन को लंबे समय तक उपजाऊ रख सकते हैं। गौशालाओं से जुड़े पशुपालकों को अनुदान मिलने से इस दिशा में काम करने वालों को आर्थिक सहारा मिलेगा।

दिन में 10 घंटे बिजली का वादा और डिफाल्टर किसानों की मांग

भारतीय किसान संघ ने बैठक में डिफाल्टर किसानों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। संघ का कहना था कि कर्जमाफी के कारण बड़ी संख्या में किसान सहकारी समितियों के डिफाल्टर हो गए हैं। इनका ब्याज माफ कर इन्हें मुख्यधारा में जोड़ा जाए। किसानों को दिन में दस घंटे लगातार बिजली मिले, यह मांग भी संघ ने मुख्यमंत्री के सामने रखी।

मुख्यमंत्री ने किसान संघ के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि दस घंटे बिजली देने का वादा है, जिसे पूरा किया जाएगा। बैठक में गेहूं, चना और बाजरा जैसी फसलों की खरीदारी की पहल और पर्याप्त विद्युत आपूर्ति के लिए किए गए प्रबंधन की जानकारी भी दी गई। किसानों की ओर से जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने और अतिरिक्त ट्रांसफार्मर बैंक बनाने की मांग भी पहले से उठाई जा रही है।

बिजली का मुद्दा किसानों के लिए सीधे सिंचाई से जुड़ा है। रबी के मौसम में फसलों को समय पर पानी देना होता है, और इसके लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति जरूरी है। दिन में 10 घंटे बिजली मिलने से किसान दिन के समय ही सिंचाई कर सकेंगे। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अब इस वादे के क्रियान्वयन पर किसानों की नजर रहेगी।

रजिस्ट्री योजना, फार्मर आईडी और खरीदारी की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना से बड़ी संख्या में प्रदेश के किसानों को लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत अब तक 12.87 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं और 15 नवंबर तक 20 लाख का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री की स्थायी व्यवस्था से किसानों को अपनी जमीन और मकान के दस्तावेजों को लेकर सहूलियत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मर आईडी की व्यवस्था से प्रदेश में खाद और यूरिया के स्टॉक की सही जानकारी मिलती है। मध्य प्रदेश इस व्यवस्था का पूरा लाभ ले रहा है। कम वर्षा वाले जिलों में बोरवेल खनन पर प्रतिबंध लगाने की पहल की गई है। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है।

बैठक में गेहूं, चना और बाजरा जैसी फसलों की खरीदारी की पहल पर भी जानकारी दी गई। समर्थन मूल्य पर समय से खरीदी होना किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत होती है। किसान संघ ने समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी की मांग रखी है, ताकि किसानों को अपनी उपज का पूरा दाम मिल सके।

सूखाग्रस्त जिलों का सवाल अभी लंबित

किसान संघ की सबसे बड़ी मांगों में से एक कम वर्षा वाले जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की है। संघ का कहना है कि जिन जिलों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, वहां फसलों को नुकसान हुआ है और किसानों को मुआवजे की जरूरत है। बैठक से पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि सरकार इस दिशा में कोई निर्णय ले सकती है। हालांकि, बैठक के बाद इस पर अभी तक कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।

संघ ने सरकार से खेतों में फसलों का सर्वेक्षण कराने और फसल नुकसान का आकलन करके मुआवजा देने की मांग भी की है। खाद की कमी और सिंचाई की समस्याओं पर भी बैठक में चर्चा हुई। सरकार की ओर से इन मुद्दों पर आश्वासन दिया गया है, लेकिन सूखाग्रस्त घोषणा जैसे फैसले पर अंतिम निर्णय का इंतजार है। किसान संगठनों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर रहेगी।

आगे क्या — किसान कल्याण वर्ष और रबी का मौसम

प्रदेश सरकार इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। बलराम कृषि महोत्सव और किसान मंच की बैठकों के जरिए किसानों से सीधा संवाद किया जा रहा है। रबी के मौसम की शुरुआत के साथ ही पराली प्रबंधन, बिजली आपूर्ति, खाद की उपलब्धता और खरीदारी व्यवस्था पर सरकार के काम की असली परीक्षा होगी।

आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि पराली नियंत्रण को रोल मॉडल बनाने के निर्देश जमीन पर कैसे उतरते हैं, प्राकृतिक खेती करने वाले पशुपालकों और गौशाला संचालकों को अनुदान की प्रक्रिया कब शुरू होती है, और दिन में 10 घंटे बिजली का वादा किस तरह पूरा किया जाता है। सूखाग्रस्त जिलों को लेकर सरकार के फैसले पर भी किसानों की नजर बनी हुई है। किसान संघ ने सरकार को सहयोग का भरोसा दिया है, और सरकार ने किसान हित में फैसले जारी रखने की बात कही है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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