इंदौर ब्यूरो
इंदौर विधानसभा-1 में भाजपा के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। वार्ड-7 की पार्षद भावना मनोज मिश्रा के दीपावली मिलन और उपहार वितरण समारोह के पोस्टर से गायब तस्वीर ने पूरे आयोजन को सियासी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। समारोह के बैनरों और पोस्टरों में नगरीय प्रशासन मंत्री और स्थानीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर नजर नहीं आई, उन्हें कार्यक्रम का न्योता तक नहीं भेजा गया और वे समारोह में पहुंचे भी नहीं। आयोजक ने तस्वीर गायब होने को कार्यकर्ताओं की भूल बताया है, लेकिन कार्यक्रम में मंत्री के विरोधी माने जाने वाले नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
पोस्टर से गायब तस्वीर, कार्यक्रम में भी नहीं पहुंचे मंत्री
बुधवार को आयोजित दीपावली मिलन और उपहार वितरण समारोह से ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर रही कि आयोजन के लिए लगाए गए पोस्टरों में क्षेत्र के विधायक और मंत्री की तस्वीर क्यों नहीं थी। पार्षद भावना मिश्रा की ओर से यह कार्यक्रम पिछले दस वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन इस बार आयोजन से ज्यादा सुर्खियां पोस्टर और उसमें स्थानीय विधायक की तस्वीर नहीं होने को लेकर बनीं। जानकारी के अनुसार पार्षद की ओर से विजयवर्गीय को कार्यक्रम का आमंत्रण भी नहीं भेजा गया था। समारोह में भाजपा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता सहित कई नेता मौजूद रहे, जबकि मंत्री की गैरमौजूदगी सबकी नजर में रही। क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में इसे विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि गुटबाजी को लेकर अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, इसलिए यह चर्चा के स्तर पर ही है।
महावीर बाग में 2,100 परिवारों को दीपावली के उपहार
समारोह महावीर बाग में आयोजित किया गया, जिसमें कमजोर वर्ग के परिवारों को दीपावली मनाने के लिए जरूरी सामग्री वितरित की गई। आयोजन के लिए तैयार किए गए आमंत्रण पत्र में 2,100 परिवारों को 21 दीये, आधा किलो तेल, मिठाई, पटाखे और वंदनवार देने का उल्लेख था। कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की बड़ी तस्वीरें लगाई गई थीं। इसके अलावा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे, विधायक मनोज पटेल, उषा ठाकुर और मालिनी गौड़, पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन, कृष्णमुरारी मोघे, सुदर्शन गुप्ता, डॉ. उमाशशि शर्मा और सावन सोनकर को भी स्थान दिया गया था। सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलू शुक्ला और नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा को भी आमंत्रित किया गया था। दीपावली के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और उपहार सामग्री वितरित की गई।

आयोजक का स्पष्टीकरण: कार्यकर्ताओं की भूल, पुराने फोटो लगे
कार्यक्रम के आयोजक और पार्षद पति मनोज मिश्रा ने बैनरों पर मंत्री की तस्वीर नहीं होने को कार्यकर्ताओं की भूल बताया है। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें लोगों को उपहार वितरित किए गए। बैनरों पर कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं ने बैनर तैयार करवाए थे, उनसे भूल हो गई और पहले से इस्तेमाल हो रहे पुराने फोटो ही बैनरों पर लगा दिए गए। कार्यक्रम में पहुंचे विधायक मनोज पटेल से जब गुटबाजी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आयोजकों ने उन्हें कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया था, इसलिए वह शामिल होने पहुंचे हैं। आयोजक के इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक चर्चाएं थमती नजर नहीं आ रही हैं, क्योंकि मंत्री को आमंत्रण नहीं भेजा जाना और उनकी तस्वीर का बैनरों से गायब रहना, दोनों ही बातें एक साथ सामने आई हैं।
मन की बात से शुरू हुआ था विवाद
विधानसभा चुनाव के बाद विजयवर्गीय और पार्षद पति मनोज मिश्रा के संबंध बहुत अच्छे थे, लेकिन पिछले दिनों एक घटना के बाद मिश्रा ने दूरी बना ली। चर्चा है कि विजयवर्गीय उनके वार्ड के कंडिलपुरा में लाला यादव के घर मन की बात सुनने पहुंच गए थे। उन्हें बुलाया तक नहीं गया था। यह बात मिश्रा को घर कर गई, जिसके बाद से वे बगावत के मूड में आ गए। इस घटना से पहले वे आकाश विजयवर्गीय के सहयोगियों के हस्तक्षेप पर नाराजगी जता चुके थे, लेकिन किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। पार्षद भावना मिश्रा और उनके पति इससे पहले भी विजयवर्गीय के कार्यक्रम से दूरी बनाकर चर्चा में रहे हैं। कुछ समय पहले मन की बात कार्यक्रम को सुनने विजयवर्गीय अपनी विधानसभा के एक कार्यकर्ता के घर पहुंचे थे, उस दौरान पार्षद और उनके पति वहां मौजूद नहीं थे, जबकि वे अपने कार्यालय में बैठकर कार्यक्रम सुन रहे थे। इसके बाद मिश्रा ने अपने कार्यालय का होर्डिंग भी बदल दिया, जिसमें से मंत्री विजयवर्गीय की तस्वीर को छोटा कर दिया गया था। इन घटनाओं के बाद से दोनों के बीच की दूरी लगातार चर्चा में बनी हुई है।
कार्यक्रम में कौन-कौन पहुंचा
दीपावली उपहार वितरण कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और विधायक मनोज पटेल सहित पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। बताया जा रहा है कि आयोजन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विरोधी माने जाने वाले नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था। ऐसे में मंत्री की अनुपस्थिति और बैनरों से उनकी तस्वीर गायब रहने को राजनीतिक नजरिये से देखा जा रहा है। कार्यक्रम में पहुंचे नेताओं में वे चेहरे भी शामिल थे, जिन्हें विधानसभा-1 में विजयवर्गीय के विरोधी खेमे से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि इस आयोजन को केवल एक दीपावली मिलन समारोह के रूप में नहीं, बल्कि विधानसभा क्षेत्र की सियासी खींचतान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन में शामिल नेताओं ने हालांकि मंच से इस विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की और कार्यक्रम उपहार वितरण तक ही सीमित रहा।
विधानसभा-1 में गुटबाजी की चर्चा क्यों तेज है
इंदौर विधानसभा-1 में भाजपा के भीतर खींचतान के संकेत पहले भी सामने आ चुके हैं। नवरात्र के दौरान पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता ने पांच साल बाद एक बार फिर चुनरी यात्रा निकाली थी, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल शामिल हुए थे। बड़ी संख्या में भीड़ के जुटने से गुप्ता क्षेत्र में फिर मजबूती से उभरे थे। इसके बाद अब पार्षद पति मनोज मिश्रा का दीपावली उपहार वितरण कार्यक्रम भी चर्चा में आ गया है। हाल के दिनों में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने एक बयान को लेकर भी चर्चा में रहे थे। इंदौर में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ यात्रा के दौरान एक प्रदर्शनकारी को देखकर की गई उनकी टिप्पणी पर विवाद हुआ था। इन घटनाओं को अलग-अलग देखा जाए तो हर एक का अपना संदर्भ है, लेकिन एक के बाद एक सामने आ रही इन घटनाओं ने विधानसभा-1 की राजनीति को लगातार चर्चा में बनाए रखा है। पार्टी के भीतर मतभेद किसी भी संगठन में सामने आते रहते हैं, लेकिन जब वे सार्वजनिक कार्यक्रमों के पोस्टरों और आमंत्रण पत्रों तक पहुंच जाएं तो चर्चा तेज होना स्वाभाविक है।
मंत्री की ओर से अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले में अब तक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय या उनके कार्यालय की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो पोस्टर से तस्वीर गायब होने पर, न ही आमंत्रण नहीं भेजे जाने पर मंत्री के पक्ष से कोई बयान जारी हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से भी इस आयोजन को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इसलिए यह साफ नहीं है कि इस घटनाक्रम को कार्यकर्ताओं की भूल माना जाए या विधानसभा क्षेत्र में चल रही खींचतान का एक और संकेत। आयोजक की ओर से भूल का स्पष्टीकरण दिया जा चुका है, लेकिन मंत्री की चुप्पी ने सवालों को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या प्रदेश नेतृत्व इस मामले में हस्तक्षेप करेगा या दोनों पक्षों के बीच बातचीत से मामला सुलझाया जाएगा।
आगे क्या होगा
दीपावली के बाद पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में इस घटनाक्रम की चर्चा उठ सकती है। विधानसभा-1 में भाजपा के भीतर चल रही खींचतान को लेकर प्रदेश नेतृत्व की नजर इस आयोजन पर रहेगी। पार्षद पति मनोज मिश्रा और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच संवाद होगा या दूरी और बढ़ेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। इंदौर की राजनीति में विधानसभा-1 हमेशा से अहम मानी जाती रही है, क्योंकि यहां से मंत्री और प्रदेश के बड़े नेता चुनकर आते हैं। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री की तस्वीर का गायब रहना केवल एक भूल भर नहीं माना जा रहा। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या आयोजक और मंत्री के बीच कोई बातचीत होती है, क्या पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मामले में कोई पहल करते हैं और क्या विधानसभा क्षेत्र में चल रही इस खींचतान पर कोई विराम लगता है। फिलहाल इतना तय है कि दीपावली मिलन समारोह के बहाने इंदौर विधानसभा-1 की सियासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।
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