ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
नमस्कार प्रिय Followers
योगों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आज फिर अन्य नये योगों की चर्चा करते हैं।
ध्वज योग
सभी पाप ग्रह अष्टम भाव में हों तथा शुभ ग्रह लग्न में हों तो ध्वज योग बनता है। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं कि इस योग में जन्म लेने वाला जातक सेनापति होता है, जिसके आदेश का अनुकरण अन्य लोग करते हैं। ऐसा जातक व्यवस्थापक और संचालक भी हो सकता है।
सिंहासन योग
सभी ग्रह द्वितीय, षष्ठ, अष्टम और द्वादश भाव में हों तो सिंहासन योग बनता है। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं कि इस योग में जन्म लेने वाला जातक सिंहासन प्राप्त करता है। यह योग राजनीति के लिये श्रेष्ठ होता है।
रज्जू योग
यदि लग्न चर राशि अर्थात मेष, कर्क, तुला और मकर लग्न हो और कई ग्रह चर राशि में हों तो रज्जू योग बनता है। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं कि इस योग में जन्म लेने वाला जातक अत्यंत ambitious होता है और नाम प्रसिद्धि के लिये जगह जगह घूमता है।
आगे के योगों की चर्चा अगली पोस्ट में करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
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