सिवनी ब्यूरो
सार: सिवनी जिले की सिमरिया मंडी में हुए बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से किसानों को संबोधित किया। उन्होंने धान उपार्जन के पंजीयन की अंतिम तिथि 4 नवंबर तक बढ़ाने, रबी फसलों के लिए दिन में 10 घंटे निर्बाध बिजली देने और सिवनी में शीघ्र फूड पार्क स्थापित करने की बात कही।
सिमरिया मंडी में जिला स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव
सिवनी जिले की सिमरिया कृषि उपज मंडी प्रांगण में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को जिला स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव आयोजित हुआ। किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव में जिले के किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रालय से वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े और किसानों को संबोधित किया।
महोत्सव का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, फसल प्रबंधन और कृषि नवाचारों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम स्थल पर कृषि और उससे जुड़े विभागों के प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए, जिनके माध्यम से किसानों को कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं, उनकी पात्रता, लाभ और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों ने किसानों का मार्गदर्शन किया।
बालाघाट-सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद भारती पारधी, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव और सिवनी विधायक दिनेश राय ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। महोत्सव में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार के साथ कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे अग्रणी किसानों ने अपने अनुभव साझा किए।
धान उपार्जन का पंजीयन 4 नवंबर तक

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में धान उपार्जन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा और अधिक से अधिक पात्र किसानों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से धान उपार्जन के पंजीयन की अंतिम तिथि 4 नवंबर तक बढ़ाई गई है। कोई भी पात्र किसान पंजीयन से वंचित न रहे, इस दिशा में आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
यह घोषणा उन किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो किसी कारण से अब तक पंजीयन नहीं करा पाए थे। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन पहली शर्त है, इसलिए अंतिम तिथि बढ़ने से छूटे हुए किसानों को एक और अवसर मिला है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे 4 नवंबर से पहले अपने नजदीकी पंजीयन केंद्र पर जाकर पंजीयन की स्थिति की पुष्टि कर लें और यदि पंजीयन अधूरा है तो उसे समय रहते पूरा करा लें।
इससे पहले बालाघाट जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव में भी यही अंतिम तिथि सामने आई थी, लेकिन सिवनी का यह कार्यक्रम जिले के किसानों के लिए अलग अवसर है, क्योंकि यहां मुख्यमंत्री ने सिवनी की फसलों और स्थानीय संभावनाओं पर विशेष रूप से बात की।
रबी सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों के कल्याण, उनकी आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि इन दिनों प्रदेश में किसानों को खेती-किसानी के कामों के लिए दिन में 10 घंटे बिजली दी जा रही है। रबी फसलों की सिंचाई के लिए दिन के समय 10 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति से किसानों को रात में सिंचाई की मजबूरी से राहत मिलेगी। रात में खेतों तक पानी पहुंचाना किसानों के लिए कठिन और असुरक्षित होता है, इसलिए दिन की बिजली सीधे तौर पर उनकी सुविधा और सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
रबी के मौसम में गेहूं, चना, सरसों और अन्य फसलों की सिंचाई समय पर होना फसल की पैदावार के लिए निर्णायक होता है। दिन में बिजली मिलने से किसान सिंचाई की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं, मजदूरों की व्यवस्था कर सकते हैं और सिंचाई के उपकरणों का उपयोग भी सुरक्षित ढंग से कर सकते हैं।
सिवनी की विशेष पहचान: जीराशंकर चावल और जंबो सीताफल
मुख्यमंत्री ने सिवनी जिले की कृषि विशेषताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिले का जीराशंकर चावल अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है। बड़े आकार और मिठास से भरपूर सिवनी का जंबो सीताफल भी जिले की विशेष पहचान बन रहा है।
जिले में टमाटर, मिर्च, अलसी, सरसों और सूरजमुखी जैसी फसलों की खेती भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत करती है। इन फसलों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि ये किसानों को केवल धान या गेहूं जैसी परंपरागत फसलों पर निर्भर रहने से बाहर निकालती हैं। उद्यानिकी फसलें, तिलहन और दलहन फसलें बाजार की मांग के अनुसार आय का अतिरिक्त स्रोत बन सकती हैं।
सिवनी की पहचान को मजबूत करने के लिए इन विशेष उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच भी उतनी ही जरूरी है, जितनी उनका उत्पादन। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की बात पर विशेष जोर दिया।
सिवनी में शीघ्र स्थापित होगा फूड पार्क
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिले, इसी उद्देश्य से सिवनी में शीघ्र ही फूड पार्क की स्थापना की जाएगी। इससे कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे।
फूड पार्क का सीधा लाभ यह होगा कि किसान अपनी उपज को कच्चे रूप में दूर के बाजारों तक पहुंचाने की मजबूरी से कुछ हद तक मुक्त हो सकेंगे। स्थानीय प्रसंस्करण से उपज का मूल्य बढ़ता है, भंडारण और परिवहन का नुकसान घटता है और युवाओं के लिए अपने ही जिले में काम के अवसर बनते हैं। टमाटर, मिर्च, सीताफल और धान जैसे उत्पादों के प्रसंस्करण से अचार, पल्प, चावल प्रसंस्करण और अन्य मूल्य वर्धित उत्पादों की संभावनाएं खुलती हैं।
मुख्यमंत्री ने मत्स्य बीज उत्पादन की दिशा में जिले के जेवनारा मत्स्य बीज प्रक्षेत्र की बड़ी भूमिका की बात भी कही। मत्स्य बीज की स्थानीय उपलब्धता से मछली पालन करने वाले किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, क्योंकि बीज के लिए दूर पर निर्भरता घटती है और पालन की लागत व जोखिम कम होता है।
किसान कल्याण वर्ष 2026: आय के अतिरिक्त स्रोत
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके माध्यम से खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाने के साथ किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोतों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परंपरागत फसलों के साथ दलहन, तिलहन, उद्यानिकी और नकदी फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि बाजार की मांग के अनुरूप किसान फसल उत्पादन कर सकें और कृषि जोखिम को भी कम कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि को केवल परंपरागत खेती तक सीमित न रखते हुए उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों से जोड़कर किसानों की आय के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। किसानों के परिश्रम से ही मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
इस सोच का अर्थ यह है कि किसान की आय अब केवल एक फसल की पैदावार और उसके भाव पर निर्भर न रहे। पशुपालन से दूध, मत्स्य पालन से मछली, उद्यानिकी से फल-सब्जी और प्रसंस्करण से मूल्य वर्धित उत्पाद — ये सभी मिलकर किसान परिवार की आय को स्थिरता दे सकते हैं। एक फसल के खराब होने पर भी दूसरा स्रोत परिवार को संभाल सकता है।
रजिस्ट्री योजना और ग्रामीण परिवहन की बात
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से ग्रामीण आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का सर्वेक्षण कर पात्र हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख और रजिस्ट्री उपलब्ध कराई जा रही है।
इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 60 लाख से अधिक ग्रामीणों को उनके पट्टे की संपत्ति की पक्की रजिस्ट्री कराकर उन्हें पूरा अधिकार दिलाने के लिए राज्य सरकार अपने खजाने से 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। संपत्ति का विधिवत अधिकार मिलने से ग्रामीण नागरिक अपनी संपत्ति का स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उसके आधार पर बैंक से ऋण प्राप्त कर आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांवों में विकास के नए अवसर निर्मित होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत शासकीय सुगम बस सेवा पुनः प्रारंभ कर दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बेहतर होने के साथ ही परिवहन के अधिक सुलभ साधन उपलब्ध हो सकेंगे। ग्रामीण इलाकों में बस सेवा का मतलब केवल यात्रा नहीं है, बल्कि मंडी तक पहुंच, इलाज, शिक्षा और रोजगार तक पहुंच भी है।
युवाओं और नवाचार करने वाले किसानों को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने बलराम कृषि महोत्सव के दौरान हुई किसान क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं का भी उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों को नई जानकारियों, आधुनिक तकनीकों और कृषि नवाचारों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से भी खेती में नई तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचारों का उपयोग कर कृषि को रोजगार का प्रभावी माध्यम बनाने की बात कही।
युवाओं के लिए कृषि अब केवल पुश्तैनी काम नहीं रही है। ड्रिप सिंचाई, मृदा परीक्षण, उन्नत बीज, फसल चक्र, भंडारण और सीधी बिक्री जैसे तरीकों से खेती को एक व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में चलाया जा सकता है। क्विज और प्रदर्शनी जैसे आयोजन युवाओं को इन तरीकों से परिचित कराते हैं और सफल किसानों के अनुभव से सीखने का अवसर देते हैं।
महोत्सव में अग्रणी किसानों ने अपने अनुभव साझा किए, जो दूसरे किसानों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन का काम करते हैं। किसी तकनीक को किताब में पढ़ना और उसे अपने खेत में अपनाकर लाभ कमाने वाले किसान से सुनना — इन दोनों में बड़ा अंतर होता है। यही कारण है कि ऐसे महोत्सवों में किसान-से-किसान संवाद को विशेष महत्व दिया जाता है।
आगे क्या: किसानों के लिए जरूरी कदम
सिवनी के किसानों के लिए सबसे तत्काल कदम धान पंजीयन से जुड़ा है। जिन किसानों का पंजीयन अब तक नहीं हुआ है, उन्हें 4 नवंबर तक पंजीयन करा लेना चाहिए। पंजीयन केंद्र पर जाकर अपनी स्थिति की जांच कराना, आवश्यक जानकारी को सही दर्ज कराना और पंजीयन की पावती को संभालकर रखना — ये छोटे कदम बाद में समर्थन मूल्य पर उपज बेचते समय बड़ी परेशानी से बचा सकते हैं।
दूसरा कदम रबी सिंचाई की योजना से जुड़ा है। दिन में मिलने वाली 10 घंटे की बिजली का उपयोग किसान सिंचाई के लिए पहले से तय कार्यक्रम बनाकर कर सकते हैं। खेत की नमी, फसल की अवस्था और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर सिंचाई करने से पानी की बचत भी होती है और फसल को समय पर पानी भी मिलता है।
तीसरा कदम आय के विविधीकरण से जुड़ा है। सिवनी की मिट्टी और जलवायु में टमाटर, मिर्च, सरसों, सूरजमुखी और अलसी जैसी फसलों की संभावनाएं हैं। किसान इन फसलों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। मत्स्य पालन और पशुपालन में रुचि रखने वाले किसान जेवनारा जैसे स्थानीय संसाधनों और विभागीय योजनाओं की जानकारी भी ले सकते हैं।
फूड पार्क की स्थापना की घोषणा के बाद स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए भी तैयारी का समय है। प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन से जुड़े कौशल सीखना, स्व-सहायता समूहों और सहकारी प्रयासों को मजबूत करना और बाजार की मांग को समझना — ये सभी कदम फूड पार्क के आने पर सिवनी के लोगों को तैयार स्थिति में रखेंगे।
सिवनी का बलराम कृषि महोत्सव इस लिहाज से केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि जिले की कृषि दिशा को तय करने वाला मंच है। धान पंजीयन की अंतिम तिथि, दिन की बिजली, फूड पार्क और विशेष फसलों की पहचान — ये सभी बिंदु मिलकर बताते हैं कि सिवनी के किसानों के लिए आने वाले महीनों में अवसर भी हैं और समय पर कदम उठाने की जिम्मेदारी भी है।
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