बालाघाट ब्यूरो
सार: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को बालाघाट के किसानों की सराहना करते हुए कहा कि जिले ने 60 लाख क्विंटल धान उपार्जन के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से गोंगलई कृषि उपज मंडी में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर उन्होंने किसानों से सीधा संवाद किया और धान खरीदी के लिए पंजीयन पोर्टल 4 नवंबर तक खुला रखने की जानकारी भी दी।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले ने खेती-किसानी के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी अलग पहचान कायम की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को कहा कि इस वर्ष जिले में 60 लाख क्विंटल धान का उपार्जन हुआ है, जिसके साथ बालाघाट पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। मुख्यमंत्री ने जिले के किसानों की मेहनत और प्रगतिशील सोच की सराहना करते हुए कहा कि बालाघाट के किसानों ने खेती-किसानी में नई मिसाल कायम की है।
मुख्यमंत्री रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से बालाघाट की कृषि उपज मंडी, गोंगलई में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने जिले के अलग-अलग गांवों के प्रगतिशील किसानों से सीधा संवाद किया और उनकी खेती, पशुपालन तथा अन्य गतिविधियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन अपनाने का आह्वान भी किया, ताकि खेती के साथ अतिरिक्त आय के रास्ते भी खुलें।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है, जब प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। स्थापना दिवस और दीपावली के मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों को शुभकामनाएं भी दीं। बालाघाट का यह आयोजन बलराम कृषि महोत्सव की श्रृंखला की एक कड़ी है, जिसके तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों में किसानों से संवाद और कृषि की उन्नत तकनीकों की जानकारी साझा की जा रही है।
धान खरीदी में बालाघाट प्रदेश में अव्वल
मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट ने धान उपार्जन के मामले में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जिले में इस वर्ष 60 लाख क्विंटल धान का उपार्जन हुआ है। यह उपलब्धि जिले के किसानों की मेहनत, उनकी प्रगतिशील सोच और खेती के प्रति गंभीरता का परिणाम बताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट के किसानों ने अपनी प्रगतिशील सोच से नई मिसाल कायम की है और दूसरे जिलों के किसानों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
धान की खेती बालाघाट की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। जिले के ज्यादातर किसान धान उत्पादक हैं और खरीफ के मौसम में धान की फसल उनकी आय का मुख्य आधार होती है। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने की व्यवस्था बनती है। इसी व्यवस्था के तहत उपार्जन के आंकड़े जिले की कृषि गतिविधियों की तस्वीर भी पेश करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। अकेली फसल पर निर्भरता के बजाय विविध खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान की आय के एक से अधिक स्रोत बनें और मौसम या बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।
गोंगलई मंडी में बलराम कृषि महोत्सव, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संवाद

बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन बालाघाट की कृषि उपज मंडी, गोंगलई में किया गया। मुख्यमंत्री भोपाल स्थित समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े। इस दौरान उन्होंने मंडी परिसर में मौजूद किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा खेती के अनुभवों को सुना।
कार्यक्रम में जिले के कई प्रगतिशील किसानों से आत्मीय संवाद हुआ। किसानों ने अपनी खेती की विधियों, उपज की स्थिति और आय बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बलराम कृषि महोत्सव जिले की कृषि व्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है।
बलराम कृषि महोत्सव का उद्देश्य किसानों को उन्नत खेती की तकनीक, नई फसलों और आय के वैकल्पिक स्रोतों की जानकारी देना है। इससे पहले प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इस महोत्सव के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें किसानों से सीधा संवाद कर उनकी बात सुनी गई है। बालाघाट का कार्यक्रम इसी श्रृंखला की एक अहम कड़ी रहा।
धान का कटोरा कहलाता है बालाघाट, चिन्नौर चावल की देश-विदेश में पहचान
बालाघाट को मध्य प्रदेश का धान का कटोरा कहा जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले की पहचान यहां के चिन्नौर चावल से है। चिन्नौर चावल अपनी खुशबू और गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है और इसका निर्यात विदेशों तक किया जाता है। इसी वजह से बालाघाट को मध्यप्रदेश का धान का कटोरा कहा जाता है।
चिन्नौर चावल की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह चावल बालाघाट की विशिष्ट कृषि विरासत का हिस्सा है और जिले के किसानों की पहचान से जुड़ा हुआ है। धान के अलावा कोदो जैसे मोटे अनाजों के उत्पादन में भी जिले के किसान आगे बढ़ रहे हैं। मोटे अनाजों की खेती पोषण और आय, दोनों लिहाज से किसानों के लिए लाभकारी मानी जाती है।
जिले की कृषि पहचान केवल धान तक सीमित नहीं है। यहां की मिट्टी, जलवायु और किसानों का अनुभव मिलकर ऐसी परिस्थितियां बनाते हैं, जिनमें धान के साथ दूसरी फसलें भी अच्छी होती हैं। सरकार की ओर से भी किसानों को विविध फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि एक ही फसल पर निर्भरता कम हो और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे।
धान खरीदी के लिए पंजीयन पोर्टल 4 नवंबर तक खुला
मुख्यमंत्री ने किसानों को राहत देते हुए बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जिन किसानों का पंजीयन छूट गया है, उनके लिए पोर्टल 4 नवंबर तक खुला रहेगा। ऐसे किसान निर्धारित समय सीमा में अपना पंजीयन करा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट जिले के कुछ किसानों का पंजीयन छूट जाने के कारण पंजीयन पोर्टल 4 नवंबर तक खोल दिया गया है।
समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन कराना जरूरी होता है। पंजीयन के बिना किसान अपनी उपज सरकारी खरीदी व्यवस्था में नहीं बेच पाता। इसलिए पंजीयन की समय सीमा बढ़ना उन किसानों के लिए राहत की बात है, जो किसी कारण से पहले पंजीयन नहीं करा पाए थे। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा में अपना पंजीयन पूर्ण कराएं, ताकि समर्थन मूल्य पर धान विक्रय की प्रक्रिया में शामिल हो सकें।
पंजीयन के लिए किसानों के पास एग्रीस्टैक आईडी होना जरूरी बताया गया है। बटाईदार श्रेणी के किसान निर्धारित दस्तावेजों के साथ पंजीयन केंद्र प्रभारी से संपर्क कर पंजीयन करा सकते हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द पंजीयन कराएं, ताकि किसी तकनीकी अड़चन की स्थिति में भी समय रहते समाधान हो सके।
1.29 लाख से अधिक किसानों को 876 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण
मुख्यमंत्री ने बताया कि बालाघाट जिले के 1 लाख 29 हजार से अधिक किसानों को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों के लिए 876 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है। यह ऋण किसानों को खेती की लागत, पशुपालन की शुरुआत और अन्य कृषि गतिविधियों के लिए मदद करता है। ब्याज मुक्त ऋण का मतलब है कि किसान को मूल राशि लौटानी होती है, ब्याज का बोझ नहीं उठाना पड़ता।
इस तरह की ऋण सहायता छोटे और मझोले किसानों के लिए खास तौर पर अहम होती है, क्योंकि खेती की शुरुआत में बीज, खाद, उपकरण और सिंचाई पर खर्च आता है। समय पर ऋण मिलने से किसान अच्छी गुणवत्ता के बीज और खाद खरीद पाता है और फसल की देखभाल बेहतर तरीके से कर पाता है। पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए ऋण मिलने से किसान आय का दूसरा स्रोत भी खड़ा कर पाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसान को साहूकारों के चंगुल से मुक्ति मिले और वह संस्थागत ऋण व्यवस्था से जुड़े। ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था इसी दिशा में एक कदम है। इससे किसान की लागत कम होती है और उसकी बचत बढ़ती है, जिसका सीधा असर उसके परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
दूध संग्रहण 3,500 से बढ़कर 10,000 लीटर, 50,000 लीटर का लक्ष्य
बालाघाट में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में प्रतिदिन दुग्ध संग्रहण 3,500 लीटर से बढ़कर 10,000 लीटर तक पहुंच गया है। अब सरकार का लक्ष्य इसे 50,000 लीटर प्रतिदिन तक ले जाने का है। दुग्ध संग्रहण में यह वृद्धि पशुपालन को किसानों की आय का मजबूत सहारा बनाने की दिशा में एक अहम संकेत है।
दूध का उत्पादन किसान के लिए रोजाना की आय का स्रोत होता है। फसल की आय साल में एक या दो बार मिलती है, जबकि दूध से हर दिन कुछ न कुछ आय होती रहती है। इसलिए पशुपालन को बढ़ावा देना किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है। संग्रहण व्यवस्था मजबूत होने से किसान को अपने दूध का उचित मूल्य भी मिल पाता है और दूध खराब होने का खतरा कम होता है।
मुख्यमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन अपनाने का आह्वान किया। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की सेहत सुधरती है और लागत घटती है, जबकि पशुपालन से जैविक खाद भी मिलती है। इस तरह खेती और पशुपालन एक-दूसरे को सहारा देते हैं और किसान की कुल आय बढ़ती है।
नक्सलवाद से मुक्ति के बाद विकास को नई गति, खनिज संपदा से समृद्ध जिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट जिले को नक्सलवाद से मुक्ति मिलने के बाद यहां के विकास की गतिविधियों को नई गति मिलेगी। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहने के कारण जिले के कई इलाकों में विकास कार्य धीमी गति से हो पाते थे। अब शांति स्थापित होने के बाद सड़क, सिंचाई, शिक्षा और कृषि से जुड़ी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
बालाघाट जिला खनिज संपदा से समृद्ध है। देश का 80 प्रतिशत मैंगनीज यहां से निकलता है तथा मलाजखंड में तांबे का विशाल भंडार है। खनिज संपदा के साथ-साथ जिले की पहचान वीरता, त्याग और पराक्रम की गौरवशाली परंपरा वाले जिले के रूप में भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट अपने खास खान-पान के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है।
विकास की नई गति का असर किसानों पर भी पड़ेगा। सड़क और मंडी व्यवस्था सुधरने से किसान अपनी उपज आसानी से मंडी तक पहुंचा सकेगा। सिंचाई सुविधाएं बढ़ने से धान के साथ दूसरी फसलों की खेती भी संभव होगी। सरकार की ओर से जिले में कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास की योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
आगे क्या: खरीदी का मौसम और किसान कल्याण वर्ष की अगली कड़ी
आने वाले दिनों में बालाघाट के किसानों के लिए सबसे अहम काम धान खरीदी के लिए पंजीयन पूरा करना है। पोर्टल 4 नवंबर तक खुला है, इसलिए जिन किसानों का पंजीयन अब तक नहीं हुआ है, उन्हें इस अवधि में पंजीयन करा लेना चाहिए। इसके बाद समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इसके तहत किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और कृषि से जुड़ी सुविधाएं मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। बलराम कृषि महोत्सव जैसे कार्यक्रमों के जरिए किसानों तक नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा रही है।
बालाघाट की 60 लाख क्विंटल उपार्जन वाली उपलब्धि ने जिले के किसानों का मनोबल बढ़ाया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि खरीदी के आगामी मौसम में भी जिला अपनी बढ़त बनाए रखता है या नहीं, और दुग्ध संग्रहण का 50,000 लीटर प्रतिदिन का लक्ष्य कितनी जल्दी हासिल होता है। किसानों की प्रगतिशील सोच और सरकार की योजनाओं का मेल जिले की कृषि तस्वीर को और मजबूत कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
