भोपाल ब्यूरो
सार: उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, विचारों और उनसे जुड़े स्थलों पर केंद्रित एक अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी बनाई जाएगी, जहां दुर्लभ पांडुलिपियां और शोध पत्र सुरक्षित रखे जाएंगे और अध्ययन की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्यसमिति की बैठक में यह निर्देश दिया। बैठक में कृष्ण पर आधारित वृत्तचित्र, नाट्य और संगीत श्रृंखलाओं के लिए अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने, मंदिरों की जमीन से आय बढ़ाने और प्रदेश के 3200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।
मध्यप्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन को शोध, अध्ययन और जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी पहल करने जा रही है। सोमवार को भोपाल के मंत्रालय में श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्यसमिति की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। बैठक में उज्जैन में बनने वाली रिसर्च लाइब्रेरी से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म, मंदिरों की जमीन के बेहतर उपयोग और पाथेय योजना के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति तक कई विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई और संबंधित निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विचार आज भी जीवन प्रबंधन, अर्थव्यवस्था, कृषि और गौ-संवर्धन जैसे क्षेत्रों में प्रासंगिक हैं। इसलिए इन विषयों पर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विचार सत्र और संगोष्ठियां आयोजित की जानी चाहिए, ताकि कृष्ण के जीवन-दर्शन का अध्ययन व्यवस्थित रूप से आगे बढ़े और नई पीढ़ी उससे जुड़ सके।
बैठक में लिए गए बड़े फैसले
बैठक का सबसे प्रमुख निर्णय उज्जैन में अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी की स्थापना से जुड़ा रहा। इस लाइब्रेरी में भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों को सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन की सुविधा भी विकसित की जाएगी, जिससे कृष्ण के जीवन, विचारों और उनसे जुड़े स्थलों पर गंभीर शोध को बढ़ावा मिलेगा।
दूसरा बड़ा निर्णय डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ा रहा। भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित शोध वृत्तचित्र, नाट्य और संगीत श्रृंखलाओं के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य कृष्ण के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित सामग्री को आम लोगों तक पहुंचाना है, ताकि घर-घर में इस ज्ञान परंपरा का प्रसार हो सके।
बैठक में यह भी तय हुआ कि कृष्ण के विचारों पर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विचार सत्र तथा संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। जीवन प्रबंधन, अर्थव्यवस्था, कृषि और गौ-संवर्धन जैसे विषयों पर विद्वानों, शोधार्थियों और संस्थाओं को एक मंच पर लाया जाएगा, जिससे शोध और संवाद दोनों को गति मिलेगी।
मंदिरों की जमीन बनेगी आय का स्रोत
बैठक में मंदिरों से जुड़ी जमीनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों की भूमि का उपयोग उनकी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसके लिए जमीनों पर खेती के साथ व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि मंदिरों की आय का एक स्थायी स्रोत विकसित हो सके।
बड़े मंदिरों की आय का कुछ हिस्सा आसपास की गौशालाओं और वृंदावन गांवों की व्यवस्थाओं को सुधारने में खर्च करने पर भी विचार किया गया। इस सोच के पीछे यह भावना है कि मंदिरों की आय का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि उससे स्थानीय व्यवस्थाएं भी मजबूत हों और आसपास के समुदाय को लाभ मिले।
मंदिरों में मौजूद जल संरचनाओं के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए जल गंगा अभियान के तहत काम कराने के निर्देश भी बैठक में दिए गए। पाथेय योजना से जुड़ी जल संरचनाओं की देखभाल को इस अभियान से जोड़कर उनके संरक्षण को और व्यवस्थित किया जाएगा।
सांदीपनि आश्रम और 3200 मंदिरों का संरक्षण
बैठक में बताया गया कि उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम के विकास और जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन हो चुका है। मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी, इसलिए इस स्थल का विकास पाथेय योजना के केंद्र में है। आश्रम के विकास से उज्जैन में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में 3200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव, प्रवेश द्वारों के निर्माण और श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। बैठक में इन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई और इन्हें समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इन्हें तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालु इनसे जुड़ सकें। इन स्थानों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ मंदिरों का संरक्षण, जीर्णोद्धार और बेहतर प्रबंधन भी किया जाए। सरकार इस काम में कृष्ण भक्ति से जुड़ी संस्थाओं का सहयोग लेने की भी योजना बना रही है।
पाथेय योजना की परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में श्रीकृष्ण पाथेय योजना के अंतर्गत चल रही विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इनमें नारायण धाम महिदपुर, श्रीकृष्ण धाम छतरपुर, जानापाव महू इंदौर, अमझेरा धार, मां जागेश्वरी लोक चंदेरी, श्रीकृष्ण राधा लोक पन्ना और रायसेन जिले की जमगढ़ की पहाड़ियों में जारी परियोजनाएं शामिल हैं।
इन सभी स्थलों को श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े पवित्र स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। हर स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिरों के संरक्षण और आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। समीक्षा के दौरान परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई और आगे के कामों की रूपरेखा तय की गई।
पाथेय योजना का मूल उद्देश्य उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में संवारना है, जहां से भगवान श्रीकृष्ण का जुड़ाव रहा है। इसके तहत मंदिरों और उनमें स्थित जल संरचनाओं, वन संपदा और उद्यानों की सुरक्षा, संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन का काम भी किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की पृष्ठभूमि
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास का गठन मंत्रि-परिषद की स्वीकृति से मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम 1951 के अंतर्गत किया गया था। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित इस न्यास में कुल 28 सदस्य हैं और इसका मुख्यालय भोपाल में है। न्यास के उद्देश्यों में मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के चरण जहां-जहां पड़े, उन स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित तथा संरक्षित करना शामिल है।
न्यास की गतिविधियों में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों एवं संरचनाओं का प्रबंधन, सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना के लिए परामर्श और सुझाव, पाथेय स्थलों का सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यटन की दृष्टि से विकास, पुस्तकालय और संग्रहालय की स्थापना जैसे काम शामिल हैं। उज्जैन में 64 कलाओं और 14 विद्याओं की विधिवत शिक्षा के लिए सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना के लिए भी न्यास परामर्श और आवश्यक कार्यवाही करता है।
न्यास की ओर से मेधावी विद्यार्थियों के लिए भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति भी संचालित की जाती है। इस छात्रवृत्ति के माध्यम से प्रदेश के विद्यार्थियों को कृष्ण के जीवन-दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, शिक्षा और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
कृष्ण के विचारों की आज की प्रासंगिकता
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन समाज के लिए प्रेरणा है। उनके जीवन से मित्रता, कर्तव्य, सामाजिक समरसता और सुशासन की सीख मिलती है। सुदामा से उनकी मित्रता का प्रसंग हो या वचन निभाने की परंपरा, कृष्ण का पूरा जीवन अनुशासन, उद्यमशीलता और समानता का संदेश देता है।
कृषि और गौ-संवर्धन के क्षेत्र में भी कृष्ण के विचारों को आज की नीतियों से जोड़ने की बात बैठक में उठी। गौपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर शोध और संगोष्ठियों के माध्यम से इन विचारों को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में काम किया जाएगा। यही कारण है कि सरकार शोध, डिजिटल प्रसार और तीर्थ विकास को एक साथ आगे बढ़ा रही है।
आगे की राह
अब उज्जैन में रिसर्च लाइब्रेरी की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों के संग्रह, संरक्षण और अध्ययन सुविधाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल की योजना को अमली जामा पहनाने का काम भी शुरू होगा, ताकि कृष्ण पर आधारित वृत्तचित्र, नाट्य और संगीत श्रृंखलाएं आम लोगों तक पहुंच सकें।
मंदिरों की जमीन पर खेती और व्यावसायिक गतिविधियों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे मंदिरों की आय का स्थायी स्रोत बने और गौशालाओं तथा वृंदावन गांवों की व्यवस्थाएं सुधर सकें। जल गंगा अभियान के तहत जल संरचनाओं के संरक्षण का काम भी इसके साथ आगे बढ़ेगा।
पाथेय योजना के तहत चल रही सातों परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहेगी। सांदीपनि आश्रम के विकास और 3200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव के कामों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर जोर रहेगा, ताकि उज्जैन सहित प्रदेश के कृष्ण स्थल श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुगम, सुरक्षित और समृद्ध बन सकें।
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