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मध्य प्रदेश में छुट्टी के दिन भी खुली रहेंगी मंडियां: सोयाबीन-मक्का किसानों को बड़ी राहत

सांकेतिक चित्र: कृषि उपज मंडी में अनाज के बोरे सांकेतिक चित्र: कृषि उपज मंडी — प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल ब्यूरो

मध्य प्रदेश के सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश की कृषि उपज मंडियां अब अवकाश के दिनों में भी खुली रहेंगी, ताकि किसान अपनी उपज बेचने के लिए अगले कार्यदिवस का इंतजार न करें। मंडी बोर्ड ने सभी संयुक्त संचालकों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं, और मंडी तथा उपमंडी परिसरों में अवकाश के दिन भी खरीदी-बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

यह निर्णय शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सामने आया। इसके पीछे सीधा तर्क यह है कि फसल की आवक के चरम समय में मंडी बंद रहने का खामियाजा किसान को उठाना पड़ता है। किसान उपज लेकर मंडी पहुंचता है, लेकिन अवकाश होने पर उसे वापस लौटना पड़ता है या अगले दिन तक रुकना पड़ता है। इससे बिक्री में देरी होती है और भुगतान भी टल जाता है। सरकार का कहना है कि किसानों की सुविधा और उनकी उपज के सुगम उपार्जन के लिए वह प्रतिबद्ध है, और इसी प्रतिबद्धता के तहत अब अवकाश के दिनों में भी सोयाबीन और मक्का की खरीदी करने तथा मंडियां खुली रखने का निर्णय लिया गया है।

क्या फैसला लिया गया है

नए निर्देश के अनुसार प्रदेश की कृषि उपज मंडियां अवकाश के दिनों में भी संचालित रहेंगी। इसका मतलब यह है कि साप्ताहिक अवकाश हो या त्योहारी छुट्टी, किसान अपनी सोयाबीन और मक्का की उपज लेकर मंडी पहुंच सकेंगे और वहां खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया जारी रहेगी। व्यवस्था केवल मुख्य मंडी परिसर तक सीमित नहीं रखी गई है। निर्देश में कहा गया है कि मंडी प्रांगण के साथ-साथ उपमंडी प्रांगण में भी अवकाश के दिनों में कृषि उपज के विपणन की गतिविधियां संचालित की जाएं, ताकि छोटे केंद्रों पर निर्भर किसानों को भी समान सुविधा मिले। यह फैसला विशेष रूप से सोयाबीन और मक्का उत्पादकों को ध्यान में रखकर लिया गया है, क्योंकि इन दिनों प्रदेश की मंडियों में इन्हीं फसलों की आवक सबसे अधिक है।

आवक बढ़ने से क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत

सांकेतिक चित्र: कृषि उपज मंडी में अनाज के बोरे
सांकेतिक चित्र: कृषि उपज मंडी — प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रदेश की मंडियों में इस समय अधिसूचित कृषि उपज की आवक काफी अधिक मात्रा में हो रही है। खरीफ सीजन की फसलें मंडियों में पहुंच रही हैं और सोयाबीन तथा मक्का की आवक का दबाव लगातार बना हुआ है। ऐसी स्थिति में यदि मंडी अवकाश के कारण बंद रहती है तो किसानों को अपनी उपज के विक्रय के लिए आगामी कार्यदिवस तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। इस प्रतीक्षा से केवल बिक्री में विलंब नहीं होता, बल्कि किसानों को आर्थिक और व्यावहारिक असुविधा का भी सामना करना पड़ता है। उपज को संभालकर रखना, दोबारा मंडी लाना और भुगतान की प्रतीक्षा करना — ये सभी कदम किसान के लिए बोझ बन जाते हैं। सरकार ने इसी समस्या को देखते हुए अवकाश के दिनों में भी मंडियों का संचालन जारी रखने का निर्णय लिया है, ताकि आवक के दबाव के बीच भी बिक्री की गति बनी रहे और किसान को समय पर राशि मिल सके।

मंडी बोर्ड के निर्देश में अधिकारियों से क्या कहा गया

मंडी बोर्ड के निर्देश के अनुसार सभी संयुक्त संचालकों को कहा गया है कि वे किसानों की सुविधा के अनुसार मंडियों में कृषि उपज के विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के साथ आवश्यक चर्चा और बैठक करें तथा समुचित समन्वय स्थापित करें। इस समन्वय का उद्देश्य यह है कि अवकाश के दिन भी मंडी में तौल, बोली, भुगतान और परिवहन से जुड़ी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलती रहें। जनसंपर्क अधिकारी की ओर से शुक्रवार को दी गई जानकारी के अनुसार मंडी बोर्ड के सभी संयुक्त संचालकों को यह निर्देश भेज दिया गया है कि वे अवकाश के दिनों में भी किसानों के लिए मंडी खुली रखें। यानी यह फैसला केवल घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लागू करने के लिए प्रशासनिक निर्देश भी जारी हो चुके हैं।

किसानों को सीधा फायदा क्या होगा

इस फैसले का सबसे सीधा फायदा यह है कि किसान को अपनी फसल बेचने के लिए छुट्टी खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जो किसान अवकाश के दिन मंडी पहुंचेगा, वह उसी दिन अपनी उपज बेच सकेगा और भुगतान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकेगी। इससे नकदी की जरूरत के समय में किसान को राहत मिलेगी, खासकर तब जब त्योहारी सीजन में घरेलू खर्च बढ़ जाते हैं। दूसरा फायदा यह है कि मंडियों में भीड़ का दबाव कुछ कम होगा, क्योंकि बिक्री के दिन बढ़ जाने से आवक कई दिनों में बंट जाएगी। तीसरा फायदा उपज की गुणवत्ता से जुड़ा है — खुले में रखी उपज को मौसम और नमी से नुकसान का खतरा रहता है, और जल्दी बिक्री से यह जोखिम भी घटता है। कुल मिलाकर यह फैसला किसान के समय, धन और मेहनत तीनों की बचत करता है।

भावांतर योजना से कैसे जुड़ेगा यह फैसला

सोयाबीन उत्पादकों के लिए यह फैसला भावांतर भुगतान योजना के साथ भी जुड़ता है। इस योजना के तहत अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन की बिक्री की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है। इस अवधि में किसान को बाजार भाव और निर्धारित भाव के अंतर की भरपाई का लाभ मिलता है। अवकाश के दिनों में मंडियां खुली रहने से किसानों को इस अवधि के भीतर उपज बेचने के अधिक अवसर मिलेंगे। जो किसान साप्ताहिक अवकाश या त्योहारी छुट्टी के कारण बिक्री टालने को मजबूर होते थे, वे अब उन्हीं दिनों में भी अपनी उपज बेच सकेंगे। इससे योजना का लाभ अधिक किसानों तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। सरकार की ओर से पहले भी कहा जा चुका है कि सोयाबीन उत्पादकों को राहत देना उसकी प्राथमिकता है, और मंडियों को अवकाश में खुला रखना उसी दिशा में एक और कदम है।

खरीफ सीजन में मंडियों पर दबाव क्यों बढ़ा है

मध्य प्रदेश में सोयाबीन और मक्का खरीफ की प्रमुख फसलें हैं। अक्टूबर और नवंबर के महीने इन फसलों की आवक के लिहाज से सबसे व्यस्त माने जाते हैं, क्योंकि कटाई के बाद किसान तेजी से अपनी उपज मंडियों में लाते हैं। इसी अवधि में साप्ताहिक अवकाश और त्योहारी छुट्टियां भी पड़ती हैं, जिससे मंडियों के कार्यदिवस कम हो जाते हैं और आवक का दबाव बढ़ जाता है। दीपावली से पहले का समय किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उन्हें त्योहार के खर्च और आगे की बुवाई के लिए राशि की जरूरत होती है। ऐसे में मंडी का एक दिन भी बंद रहना किसान की योजना को प्रभावित कर सकता है। अवकाश में मंडियां खुली रहने से खरीफ सीजन के इस व्यस्त दौर में बिक्री की निरंतरता बनी रहेगी और किसान को अपनी उपज का उचित मूल्य समय पर मिलने की संभावना मजबूत होगी।

व्यापारियों और मंडी समितियों की भूमिका क्या होगी

इस फैसले को जमीन पर उतारने में व्यापारियों और मंडी समितियों की भूमिका अहम होगी। मंडी बोर्ड ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के साथ बैठक कर सहमति और समन्वय बनाएं। इसका अर्थ यह है कि अवकाश के दिन भी मंडी में खरीद के लिए व्यापारी उपलब्ध रहें, तौल और भुगतान की व्यवस्था चले और किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। मंडी समितियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि अवकाश के दिन काम करने वाले कर्मचारियों की व्यवस्था, सुरक्षा और अभिलेख संधारण ठीक से हो। यदि किसी मंडी में अवकाश के दिन भीड़ अधिक होती है तो वहां प्रवेश, पार्किंग और उपज उतारने की व्यवस्था भी पहले से तय होनी चाहिए। किसानों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि उनकी स्थानीय मंडी अवकाश के दिन किस समय खुलेगी, इसलिए स्थानीय स्तर पर सूचना का प्रसार भी इस व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए।

आगे क्या देखना होगा

अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि यह निर्देश जिलों और मंडियों में कितनी तेजी और एकरूपता से लागू होता है। प्रदेश की सभी संबंधित मंडियों में अवकाश के दिन खरीदी शुरू होनी है, लेकिन हर मंडी की स्थानीय परिस्थितियां अलग होती हैं। कहीं व्यापारी समन्वय में समय लग सकता है तो कहीं कर्मचारी व्यवस्था में। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अवकाश के दिन मंडी जाने से पहले अपनी स्थानीय मंडी से समय और व्यवस्था की जानकारी अवश्य ले लें। साथ ही भुगतान की समयसीमा पर भी नजर रखी जाएगी, क्योंकि बिक्री के साथ-साथ समय पर राशि मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि यह व्यवस्था सुचारु रूप से चलती है तो आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और मंडियों में आवक का दबाव भी संतुलित होगा। सरकार की ओर से इस व्यवस्था की निगरानी भी अपेक्षित है, ताकि अवकाश के दिन मंडी खुली रखने का फैसला कागज पर न रह जाए, बल्कि किसान तक इसका वास्तविक लाभ पहुंचे।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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