भोपाल ब्यूरो
सोयाबीन किसानों के लिए आज का दिन बेहद खास है — खरीफ 2026 की भावांतर भुगतान योजना की पात्र बिक्री की विंडो आज, 22 अक्टूबर से खुल रही है। अब से 15 जनवरी 2027 तक अधिसूचित मंडियों में बेची गई सोयाबीन पर किसानों को भावांतर का लाभ मिलेगा। लेकिन इसके साथ ही पंजीयन की घड़ी भी टिक-टिक कर रही है, क्योंकि पंजीयन की अंतिम तिथि अब बस दो दिन दूर है।
आज से शुरू: बिक्री की पात्र अवधि
जनसंपर्क विभाग/राज्य शासन के आधिकारिक बयान के अनुसार, भावांतर भुगतान योजना के तहत अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन की पात्र बिक्री की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है। इसका सीधा मतलब है कि आज से मंडी में बेची गई सोयाबीन की हर पात्र खेप पर योजना के नियमों के अनुसार भावांतर राशि की गणना होगी।
यह योजना केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत संचालित प्राइस डेफिसिट पेमेंट स्कीम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। राज्य मंत्रि-परिषद ने 15 अक्टूबर की बैठक में खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए इस योजना को स्वीकृति दी थी। योजना का मूल उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित कराना है, ताकि बाजार में भाव गिरने पर भी किसान को नुकसान न उठाना पड़े।
पंजीयन की आखिरी तारीख 24 अक्टूबर: चूक न करें
योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त पंजीयन है। जनसंपर्क विभाग/राज्य शासन के आधिकारिक बयान (16 अक्टूबर 2026) के अनुसार सोयाबीन किसानों के लिए पंजीयन की अवधि 24 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। पहले यह अवधि 3 से 17 अक्टूबर तक निर्धारित थी।
बिना वैध पंजीयन के मंडी में बेची गई उपज भावांतर भुगतान के लिए नहीं गिनी जाएगी, चाहे बिक्री पात्र अवधि में ही क्यों न हुई हो। इसलिए जिन किसानों ने अभी तक पंजीयन नहीं कराया है, उनके पास अब केवल दो दिन का समय बचा है। पंजीकृत किसानों का सत्यापन भी इसी विस्तारित अवधि में पूरा किया जाएगा।
मॉडल रेट: पहले 14 दिन का खास फॉर्मूला
भावांतर की गणना में सबसे अहम भूमिका मॉडल रेट की होगी। योजना के नियमों के अनुसार सीजन के प्रथम 14 दिनों के लिए मॉडल रेट का निर्धारण प्रदेश की सभी मंडियों के भारित औसत के आधार पर किया जाएगा, जो 22 अक्टूबर 2026 से आगामी 14 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद प्रतिदिन विगत 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर मॉडल रेट तय कर उसे ई-मंडी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा।
भुगतान का नियम स्पष्ट है — यदि मंडी में बिक्री मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य के बराबर या उससे अधिक रहता है, तो कोई प्रतिपूर्ति नहीं दी जाएगी। यदि बिक्री मूल्य समर्थन मूल्य से कम लेकिन मॉडल रेट से अधिक रहता है, तो किसान को समर्थन मूल्य और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की राशि मिलेगी। वहीं, बिक्री मूल्य के मॉडल रेट के बराबर या कम होने पर किसान को समर्थन मूल्य और घोषित मॉडल रेट के अंतर की राशि सीधे उनके पंजीकृत बैंक खाते में भेजी जाएगी।
भुगतान कैसे मिलेगा: सीधे बैंक खाते में डीबीटी
भावांतर राशि का भुगतान मंडी बोर्ड द्वारा किसानों के पंजीकृत बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से किया जाएगा। किसानों को इसके लिए अलग से कोई दावा या आवेदन नहीं करना होगा — बिक्री दर्ज होते ही पात्रता और राशि की गणना स्वतः हो जाएगी।
भुगतान की व्यवस्था सबसे पहले मंडी बोर्ड के मूल्य स्थिरीकरण कोष से की जाएगी। यदि कोष में पर्याप्त राशि नहीं हुई, तो राज्य सरकार मंडी बोर्ड को एक वर्ष के लिए 1,500 करोड़ रुपये की निःशुल्क साख सीमा उपलब्ध कराएगी, ताकि किसानों का भुगतान किसी भी स्थिति में न रुके। भुगतान किसानों के पंजीकृत रकबे और विगत वर्ष विभाग द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर किया जाएगा।
कौन-सी बिक्री पात्र होगी: शर्तें ध्यान से समझें
योजना का लाभ केवल अधिसूचित मंडियों में निर्धारित अवधि में की गई बिक्री पर मिलेगा। एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यदि किसी किसान ने योजना अवधि से पहले, यानी 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच मंडी में सोयाबीन बेची है, तो उस मात्रा को उसकी कुल पात्रता सीमा में से घटा दिया जाएगा और केवल शेष मात्रा पर ही भावांतर राशि का भुगतान मान्य होगा।
इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बिक्री की रसीदें सुरक्षित रखें और पंजीयन में दर्ज रकबे के अनुसार ही बिक्री करें। पंजीयन करते समय भूमि, फसल और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही दर्ज करना बेहद जरूरी है, क्योंकि किसी भी विसंगति से भुगतान में देरी हो सकती है।
पंजीयन की प्रक्रिया: कहां और कैसे कराएं
पंजीयन खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर कराया जा सकता है। इसके अलावा किसान नजदीकी किसान पंजीयन केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर या प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स) में जाकर भी पंजीयन करा सकते हैं। मोबाइल से पंजीयन के लिए एमपी किसान ऐप की सुविधा भी उपलब्ध है।
पंजीयन के समय किसान पंजीयन क्रमांक, आधार नंबर, बैंक खाते का विवरण और भूमि अभिलेख की जानकारी देनी होती है। खसरा और बी-1 में दर्ज विवरण का भूमि अभिलेख से मिलान होना आवश्यक है। यदि भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में कोई अंतर है, तो पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराना होगा। पंजीयन की पर्ची और मंडी में फसल बेचने की रसीद को संभालकर रखना चाहिए।
निगरानी तंत्र: पारदर्शिता के लिए समितियां
योजना के सफल संचालन और निगरानी के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों का काम पंजीयन, सत्यापन, बिक्री के आंकड़ों और भुगतान की निगरानी करना होगा, ताकि कोई पात्र किसान लाभ से वंचित न रहे और अपात्र भुगतान न हो।
आगे क्या: किसानों के लिए अगले कदम
आज से बिक्री विंडो खुलने के साथ ही किसानों को तीन काम तुरंत करने चाहिए — पहला, यदि पंजीयन नहीं कराया है तो 24 अक्टूबर से पहले पंजीयन पूरा करें; दूसरा, आधार से जुड़े बैंक खाते को सक्रिय और अपडेट रखें; तीसरा, अधिसूचित मंडी में ही बिक्री करें और रसीद सुरक्षित रखें। प्रथम 14 दिनों का मॉडल रेट सभी मंडियों के भारित औसत पर तय होगा, इसलिए शुरुआती दिनों की बिक्री पर विशेष नजर रहेगी।
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