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बैतूल में आज 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा 30 करोड़ से अधिक का बोनस, 443 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात भी

शहडोल में तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण — सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

बैतूल ब्यूरो

आज बैतूल में वनवासी और तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए बड़ा दिन है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर में बैतूल पहुंचकर 3.69 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में 30 करोड़ रुपये से अधिक की बोनस राशि का अंतरण करेंगे। साथ ही ग्राम वन समितियों को 13 करोड़ रुपये से अधिक का काष्ठ लाभांश दिया जाएगा और जिले को 443 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिलेगी।

मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर बैतूल में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्य कार्यक्रम बैतूल के पुलिस ग्राउंड में आयोजित होगा, जहां विभिन्न विभागों की ओर से विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक, वन समितियों के प्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल होंगे।

आज का दौरा कार्यक्रम: दोपहर में बैतूल पहुंचेंगे मुख्यमंत्री

जारी कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 12 बजे भोपाल से हेलीकॉप्टर से बैतूल के लिए रवाना होंगे। दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर वे मिलानपुर स्थित हेलीपैड पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे वे ग्राम बडोरा पहुंचकर स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण भी किया जाएगा।

इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 1 बजकर 20 मिनट पर बैतूल पुलिस परेड ग्राउंड स्थित मुख्य कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। यहीं से वे तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस राशि के अंतरण कार्यक्रम में शामिल होंगे और जिले के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर मिलानपुर हेलीपैड से भोपाल के लिए रवाना होंगे और शाम करीब 4 बजकर 10 मिनट पर भोपाल पहुंचेंगे।

किन संग्राहकों को मिलेगा लाभ: सात वन मंडलों के 3.69 लाख परिवार

इस बोनस राशि का लाभ प्रदेश के सात वन मंडलों के तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा। इनमें दक्षिण बैतूल, पश्चिम बैतूल, उत्तर बैतूल, पांढुर्णा यानी दक्षिण छिंदवाड़ा, पूर्व छिंदवाड़ा, पश्चिम छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम वन मंडल शामिल हैं। इन वन मंडलों में बड़ी संख्या में वनवासी परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण के जरिए अपनी आजीविका चलाते हैं।

तेंदूपत्ता संग्रहण का मौसम आमतौर पर गर्मी के महीनों में होता है, जब वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवार पत्ते तोड़कर संग्रहण केंद्रों पर जमा करते हैं। इसके बाद पत्तों की बिक्री से मिलने वाली राशि में से संग्राहकों को बोनस के रूप में अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। यह बोनस सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में भेजा जाता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और पूरी राशि लाभार्थी तक पहुंचती है।

शहडोल में तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण — सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

ग्राम वन समितियों को मिलेगा 13 करोड़ से अधिक का काष्ठ लाभांश

मुख्यमंत्री इस अवसर पर ग्राम वन समितियों को 13 करोड़ रुपये से अधिक की काष्ठ लाभांश राशि का भी अंतरण करेंगे। ग्राम वन समितियां वन क्षेत्रों के गांवों में वन प्रबंधन और संरक्षण से जुड़ी संस्थाएं हैं, जिनमें स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी होती है। वन उपज से होने वाली आय में से समितियों को मिलने वाला लाभांश गांवों के विकास कार्यों में खर्च होता है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस तरह का लाभांश वन और गांव के बीच साझेदारी को मजबूत करता है। जब वन से होने वाली आय का हिस्सा सीधे गांव की समितियों तक पहुंचता है, तो स्थानीय लोगों में वन संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ती है। बैतूल जिले में बड़ी संख्या में ग्राम वन समितियां सक्रिय हैं, जो वन प्रबंधन के साथ-साथ आजीविका से जुड़े कामों में भी लगी हुई हैं।

बैतूल को 443 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री के इस दौरे में बैतूल जिले को 443 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात भी मिलेगी। इन कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया जाएगा। विकास कार्यों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े काम शामिल बताए गए हैं, जिनसे जिले के आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की ओर से लगाई जा रही प्रदर्शनी में सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। प्रदर्शनी का मकसद यह है कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग एक ही स्थान पर योजनाओं के बारे में जान सकें और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया समझ सकें।

तेंदूपत्ता संग्रहण: वनवासी अर्थव्यवस्था की रीढ़

तेंदूपत्ता मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों की एक महत्वपूर्ण वन उपज है। इसके पत्तों का उपयोग बीड़ी बनाने में होता है, इसलिए इसकी मांग बाजार में बनी रहती है। वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण साल के कुछ महीनों की सबसे बड़ी नकद आय का स्रोत है। संग्रहण के दिनों में पूरे परिवार के लोग सुबह से जंगल जाते हैं और पत्ते तोड़कर लाते हैं।

बैतूल जिला वन संपदा के लिहाज से प्रदेश के प्रमुख जिलों में गिना जाता है। यहां के वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता के साथ-साथ महुआ, आंवला, हर्रा, बहेड़ा और गोंद जैसी उपज भी मिलती है। लेकिन तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाली आय का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह सीधे बड़ी संख्या में परिवारों तक पहुंचती है और इसमें महिलाओं की भागीदारी भी बहुत अधिक होती है।

बोनस व्यवस्था से सीधा लाभ: खाते में पहुंचेगी राशि

तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस देने की व्यवस्था का मकसद यह है कि संग्रहण करने वाले मजदूरों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिले। संग्रहण के समय संग्राहकों को निर्धारित दर से भुगतान किया जाता है। इसके बाद जब पत्तों की बिक्री से आय होती है, तो उसमें से बोनस के रूप में अतिरिक्त राशि संग्राहकों को दी जाती है। यह व्यवस्था संग्राहकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ संग्रहण कार्य को भी प्रोत्साहित करती है।

सीधे बैंक खातों में अंतरण की व्यवस्था से पारदर्शिता भी बढ़ी है। पहले नकद भुगतान में देरी और कटौती की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन अब डिजिटल अंतरण से राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचती है। बैतूल में आज होने वाला अंतरण भी इसी व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

पहले भी मिल चुका है बोनस: शहडोल में 8.66 लाख संग्राहकों को मिला था लाभ

तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस देने का यह कोई पहला अवसर नहीं है। इससे पहले अक्टूबर महीने में ही शहडोल में 8.66 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में 22.85 करोड़ रुपये का बोनस पहुंचा था। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से इस राशि का हस्तांतरण किया था। उस कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में संग्राहक परिवारों को सीधा लाभ मिला था।

शहडोल के अनुभव से यह साफ हुआ था कि बोनस का सीधा अंतरण संग्राहकों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। दिवाली से पहले मिलने वाली यह राशि परिवारों के त्योहार की तैयारियों में भी काम आती है। बैतूल में आज होने वाला बोनस वितरण भी दिवाली से ठीक पहले हो रहा है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

आगे क्या: दिवाली से पहले राहत, विकास कार्यों पर रहेगी नजर

आज के कार्यक्रम के बाद बैतूल जिले में जिन विकास कार्यों का भूमिपूजन होगा, उन पर आने वाले महीनों में नजर रहेगी। भूमिपूजन के बाद कामों की गति और गुणवत्ता ही यह तय करेगी कि घोषित सौगात का लाभ लोगों तक कितनी जल्दी पहुंचता है। वहीं लोकार्पण होने वाले कार्यों से लोगों को तत्काल सुविधा मिलने की उम्मीद है।

तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि बोनस की राशि दिवाली से पहले उनके खातों में पहुंचेगी। त्योहार के समय अतिरिक्त आय से परिवारों की खरीदारी और जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह राशि केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उनकी मेहनत की पहचान भी है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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