इंदौर ब्यूरो
सार: इंदौर में दीपावली पर अस्थायी पटाखा दुकानों के लाइसेंस के लिए आज, 27 अक्टूबर से आवेदन शुरू हो गए हैं। आवेदन 30 अक्टूबर तक लिए जाएंगे, एक मैदान में अधिकतम 50 लाइसेंस ही जारी होंगे और दुकान नंबर का आवंटन लॉटरी से होगा। लाइसेंस 3 से 8 नवंबर तक मान्य रहेंगे और कार्बाइड गन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
इंदौर में दीपावली की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन ने अस्थायी पटाखा दुकानों को लेकर पूरी व्यवस्था तय कर दी है। कलेक्टर की ओर से जारी आदेश के अनुसार दीपावली पर पटाखों की बिक्री केवल निर्धारित स्थलों पर ही हो सकेगी। इसके लिए अस्थायी खेरची पटाखा दुकानों के लाइसेंस के लिए आज, 27 अक्टूबर से आवेदन लेना शुरू कर दिया गया है। आवेदन की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर तय की गई है। अवकाश के दिनों में आवेदन नहीं लिए जाएंगे। इस बार व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि किसी भी एक मैदान में 50 से ज्यादा लाइसेंस जारी नहीं होंगे और दुकानों का नंबर लॉटरी के जरिए तय किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद पटाखा बाजारों में भीड़, अव्यवस्था और सुरक्षा जोखिम को कम करना है, ताकि त्योहार के दौरान खरीदारों और दुकानदारों दोनों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
कब से कब तक आवेदन, कब तक मान्य रहेगा लाइसेंस
अस्थायी पटाखा दुकानों के लाइसेंस के लिए आवेदन 27 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। आवेदकों को अपने संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालय में आवेदन करना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के आवेदक महू, सांवेर, देपालपुर, खुड़ैल और हातोद सहित अपने क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के साथ पिछले वर्ष का मूल लाइसेंस और दो पासपोर्ट आकार के फोटो जमा करने होंगे। लाइसेंस पर दुकानदार का सत्यापित फोटो लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि लाइसेंस किसी और के नाम पर चलाने की गुंजाइश न रहे। लाइसेंसधारी को दुकान पर स्वयं व्यापार करना होगा, किसी और को दुकान चलाने की अनुमति नहीं होगी।
जारी किए जाने वाले लाइसेंस 3 नवंबर से 8 नवंबर तक की अवधि के लिए मान्य रहेंगे। दीपावली इस वर्ष 8 नवंबर को है, इसलिए लाइसेंस की अवधि त्योहार के दिन तक रखी गई है। दुकान क्रमांक का आवंटन निर्धारित प्रक्रिया के तहत लॉटरी से किया जाएगा। लॉटरी की व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी खास स्थान को लेकर विवाद या मनमानी की शिकायत न रहे और सभी आवेदकों को बराबर मौका मिले। दुकानों का अंतिम आवंटन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी करेंगे।
एक मैदान में सिर्फ 50 दुकानें: क्यों तय की गई यह सीमा
इस बार प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि एक मैदान में अधिकतम 50 अस्थायी लाइसेंस ही जारी किए जाएंगे। पहले कई बार एक ही मैदान में बहुत ज्यादा दुकानें लग जाने से भीड़ बढ़ जाती थी, आग से बचाव के रास्ते बंद हो जाते थे और किसी हादसे की स्थिति में बचाव कार्य में दिक्कत आती थी। इसी अनुभव को देखते हुए दुकानों की संख्या सीमित की गई है। दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी, आग से बचाव के उपकरण, पानी की व्यवस्था और साफ-सफाई की शर्तें भी लाइसेंस का हिस्सा होंगी।
दुकानों पर टीन शेड, प्रकाश, पानी और साफ-सफाई सहित जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। आतिशबाजी के भंडारण और बिक्री में विस्फोटक नियम, 2008 का पालन अनिवार्य रहेगा। निर्धारित सीमा से अधिक पटाखे रखने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर लाइसेंस निरस्त करने सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि ठेकेदारों की ओर से लाइसेंसधारियों से कोई अनावश्यक वसूली नहीं की जाएगी, ताकि छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

किन-किन स्थानों पर लगेंगी पटाखा दुकानें
पटाखा दुकानों के लिए शहर और आसपास के कई स्थल निर्धारित किए गए हैं। इनमें नूतन स्कूल-चिमनबाग मैदान, हार्डिया कंपाउंड, पालदा नाका, राऊ में सिलिकान सिटी रोड और एबी रोड के आसपास, दशहरा मैदान, आईडीए की भूमि ग्राम नैनोद, मालवा मिल क्षेत्र की अनाज मंडी, एमआर-10 चौराहा, संयोगितागंज स्कूल ग्राउंड, ग्राम लिम्बोदी, तेजाजी नगर, ग्राम कैलोद करताल, स्कीम-140, कनाड़िया, बंगाली चौराहे के आसपास, विजय नगर और लसूड़िया क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा अन्य निर्धारित स्थलों पर भी दुकानें लगाई जा सकेंगी।
यह सूची इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्धारित स्थल के बाहर पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। जो दुकानदार निर्धारित स्थल से बाहर दुकान लगाते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दुकानों की निगरानी संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी करेंगे। वे नियमित निरीक्षण के साथ आकस्मिक जांच भी करेंगे, ताकि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों पर न रहे, बल्कि जमीन पर भी दिखे।
पिछले वर्ष ब्लैकलिस्ट दुकानदारों को नहीं मिलेगा लाइसेंस
प्रशासन ने इस बार एक सख्त शर्त भी जोड़ी है। पिछले वर्ष जिन दुकानदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया था, उन्हें इस बार लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। इसका मकसद उन दुकानदारों को व्यवस्था से बाहर रखना है, जिन्होंने पहले नियमों का उल्लंघन किया था। लाइसेंस की शर्तों में यह भी शामिल है कि दुकान पर केवल लाइसेंसधारी ही व्यापार करेगा और लाइसेंस पर लगा सत्यापित फोटो ही उसकी पहचान होगी। इससे बेनामी दुकानों और लाइसेंस के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
देवउठनी ग्यारस के अवसर पर भी एक विशेष व्यवस्था की गई है। 20 नवंबर को एक दिन के लिए अस्थायी अनुमति दी जा सकेगी, लेकिन यह सुविधा निर्धारित शर्तों के तहत केवल पहले से लाइसेंस प्राप्त व्यक्तियों को ही मिलेगी। यानी देवउठनी ग्यारस पर नया लाइसेंस नहीं मिलेगा, बल्कि पहले के लाइसेंसधारियों को ही एक दिन की अनुमति दी जाएगी।
कार्बाइड गन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध
इस बार के आदेश में कार्बाइड गन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। कार्बाइड गन में कैल्शियम कार्बाइड और पानी की प्रतिक्रिया से बनने वाली गैस के धमाके से चोट लगने का खतरा रहता है। पिछले वर्ष इस तरह की गन से कई लोगों के घायल होने और आंखों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद मध्य प्रदेश में इसकी बिक्री पर रोक लगाई गई थी। इंदौर सहित कई शहरों में जिला प्रशासन की ओर से इस पर प्रतिबंध के आदेश जारी किए गए हैं। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। खरीदारों को भी सलाह दी गई है कि वे कार्बाइड गन न खरीदें और बच्चों को इससे दूर रखें।
पुलिस प्रशासन की ओर से भी त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है। पटाखा बाजारों और संवेदनशील स्थानों पर नियमित जांच, गश्त और निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि अवैध भंडारण और प्रतिबंधित सामग्री की बिक्री पर रोक लग सके। पटाखा दुकानों पर अग्निशमन यंत्र, बालू से भरी बाल्टियां और पानी के ड्रम जैसे इंतजाम भी जरूरी माने गए हैं।
दुकानदारों के लिए जरूरी बातें: आवेदन से पहले जांच लें ये कागज
आवेदन करने से पहले दुकानदारों को अपने कागज पूरे कर लेने चाहिए। पिछले वर्ष का मूल लाइसेंस, दो पासपोर्ट आकार के फोटो और पहचान से जुड़े दस्तावेज आवेदन के साथ जमा करने होंगे। आवेदन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालय में ही जमा होगा, इसलिए गलत कार्यालय में आवेदन करने से समय खराब हो सकता है। आवेदन की अवधि केवल 27 से 30 अक्टूबर तक है और अवकाश के दिनों में आवेदन नहीं लिए जाएंगे, इसलिए अंतिम दिन का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन करना समझदारी होगी।
लॉटरी से दुकान नंबर मिलने के बाद दुकानदार को अपनी दुकान पर लाइसेंस की शर्तों का पालन करना होगा। दुकान पर साफ-सफाई, पानी, प्रकाश और आग से बचाव के इंतजाम हर समय उपलब्ध रहने चाहिए। दुकान के आसपास धूम्रपान या आग जलाने जैसी गतिविधियों से बचना होगा। किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर न केवल लाइसेंस निरस्त हो सकता है, बल्कि भविष्य में लाइसेंस मिलने पर भी रोक लग सकती है।
खरीदारों के लिए सलाह: केवल निर्धारित बाजार से ही खरीदें पटाखे
खरीदारों के लिए भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है। निर्धारित स्थलों पर ही लाइसेंस वाली दुकानों से पटाखे खरीदना सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि वहां प्रशासन की निगरानी रहती है और सुरक्षा मानकों की जांच होती है। सड़क किनारे या अवैध जगहों से पटाखे खरीदने पर न केवल गुणवत्ता का भरोसा नहीं रहता, बल्कि हादसे की स्थिति में मदद भी मुश्किल हो जाती है। बच्चों को पटाखे चलाते समय बड़ों की निगरानी में रखना चाहिए और आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
दीपावली के दौरान पटाखों से होने वाले प्रदूषण और ध्वनि को लेकर भी हर वर्ष चर्चा होती है। प्रशासन की ओर से निर्धारित समय और सुरक्षित तरीके से पटाखे चलाने की अपील की जाती रही है। इस बार दुकानों की संख्या सीमित करने और लॉटरी व्यवस्था लागू करने से बाजारों में अव्यवस्था कम होने की उम्मीद है। यदि व्यवस्था जमीन पर सही तरीके से लागू हुई, तो खरीदारों को भीड़ से राहत मिलेगी और दुकानदारों को व्यवस्थित कारोबार का मौका मिलेगा।
आगे क्या: लॉटरी के बाद आवंटन और निरीक्षण का दौर
आवेदन की अवधि समाप्त होने के बाद लॉटरी के जरिए दुकान नंबरों का आवंटन होगा और 3 नवंबर से लाइसेंस की अवधि शुरू हो जाएगी। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारियों की ओर से दुकानों का निरीक्षण किया जाएगा, ताकि सुरक्षा मानकों की पुष्टि हो सके। किसी भी दुकान में कमी मिलने पर पहले चेतावनी और सुधार का मौका दिया जा सकता है, लेकिन गंभीर उल्लंघन पर सीधी कार्रवाई भी हो सकती है। त्योहार के बाद, 8 नवंबर को लाइसेंस की अवधि समाप्त हो जाएगी और उसके बाद पटाखों की बिक्री बंद हो जाएगी।
इंदौर में दीपावली से पहले की यह व्यवस्था दुकानदारों, खरीदारों और प्रशासन तीनों के लिए एक परीक्षा की तरह है। आवेदन की प्रक्रिया पारदर्शी हो, लॉटरी निष्पक्ष हो और सुरक्षा नियमों का पालन जमीन पर दिखे, तो यह व्यवस्था आने वाले वर्षों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है। फिलहाल दुकानदारों के लिए सबसे जरूरी काम समय पर आवेदन करना और अपने कागज पूरे रखना है, ताकि लॉटरी में उनका नाम शामिल हो सके।
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