भोपाल ब्यूरो
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जन समस्याओं के त्वरित निराकरण को लेकर चल रहे मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की समीक्षा करते हुए प्रशासनिक मशीनरी को साफ और सख्त संदेश दे दिया है। बुधवार (21 अक्टूबर) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टरों, कमिश्नरों, पुलिस अधीक्षकों और पुलिस महानिरीक्षकों की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जन विश्वास अभियान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीएम हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों, स्वामित्व योजना के तहत नि:शुल्क रजिस्ट्रियों की प्रगति, कम बारिश वाले जिलों की स्थिति और मौसमी बीमारियों से बचाव जैसे अहम मुद्दों की बिंदुवार समीक्षा हुई।
अब बिना सूचना के उतरेंगे किसी भी जिले में
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री का सबसे तीखा संदेश अधिकारियों के कामकाज के अंदाज को लेकर था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान अधिकारियों को अपने दफ्तरों में बैठकर कागजों से नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर जनता के बीच जाकर समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करना होगा। उन्होंने साफ कहा कि अब वह बिना किसी पूर्व सूचना के आकस्मिक रूप से किसी भी जिले में पहुंचकर जन विश्वास अभियान की जमीनी हकीकत खुद देखेंगे। जिन जिलों में जनसमस्याएं लंबित पड़ी हैं, वहां के कलेक्टरों को विशेष प्रयास करके लंबित प्रकरणों की संख्या को न्यूनतम स्तर पर लाने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री का मानना है कि अभियान की सफलता तभी संभव है जब अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें और शिकायतों का समाधान तत्काल हो।
सीएम हेल्पलाइन: इन पांच विभागों पर सबसे ज्यादा बकाया
बैठक में सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज लंबित शिकायतों की विभागवार समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने पांच विभागों का विशेष रूप से जिक्र किया, जहां सबसे अधिक शिकायतें लंबित हैं। इनमें राजस्व विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए और कहा कि लंबित शिकायतों को कम करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को अपना प्रदर्शन सुधारना ही होगा। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जन विश्वास अभियान के तहत अधिकतम जनसमस्याओं का मौके पर ही निराकरण हो, ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
स्वामित्व योजना की समीक्षा: बड़े लक्ष्य के सामने धीमी प्रगति
मुख्यमंत्री ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन 2026 योजना की प्रगति की भी गहन समीक्षा की। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र हितग्राहियों को उनकी संपत्ति के अभिलेख के आधार पर नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ दिया जा रहा है। समीक्षा में सामने आया कि प्रदेश में 49 लाख 48 हजार 980 भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लक्ष्य के मुकाबले 21 अक्टूबर 2026 तक एक लाख 60 हजार 230 रजिस्ट्रियां ही हो पाई हैं। मुख्यमंत्री ने बेहतर कार्य करने वाले उपपंजीयकों और पटवारियों की सराहना की, लेकिन जिन हल्कों में शून्य प्रगति पाई गई, उन पर नाराजगी भी जताई। रीवा, शहडोल और धार के कलेक्टरों को काम में तत्काल तेजी लाने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने न्यूनतम प्रगति वाले दस जिलों के कलेक्टरों से भी स्थिति सुधारने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह योजना ग्रामीण जनता के अधिकारों से जुड़ी है, इसलिए इसमें कोई ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
कम बारिश वाले 12 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना
प्रदेश में इस वर्ष अल्प वर्षा की स्थिति पर भी बैठक में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। बताया गया कि प्रदेश में सामान्य वर्षा 949 मिलीमीटर के मुकाबले इस वर्ष अब तक 908.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से करीब चार प्रतिशत कम है। खासतौर पर अलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, पांढुर्णा, शाजापुर और छिंदवाड़ा — इन 12 जिलों में सामान्य से 19 प्रतिशत से भी कम वर्षा दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने इन जिलों के कलेक्टरों को खेती-किसानी, पेयजल और सिंचाई प्रबंधन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कम बारिश वाले क्षेत्रों पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जाए और किसी भी स्थिति में किसानों और आम जनता को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।
मौसमी बीमारियों से बचाव: चेस्ट क्लीनिक शुरू, मुख्य सचिव भी नाराज
मौसम में बदलाव के चलते होने वाली बीमारियों की रोकथाम को लेकर भी मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को विशेष उपाय करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 15 अक्टूबर से प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों और शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चेस्ट क्लीनिक शुरू किए जा चुके हैं। इन केंद्रों पर खांसी, जुकाम, गले और सीने में दर्द जैसी शिकायतों की जांच कर गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार किया जाएगा। वहीं, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने भी अभियान में कुछ कलेक्टरों द्वारा अपेक्षित गंभीरता से काम न किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुछ कलेक्टर जन विश्वास अभियान में पूरी गंभीरता से काम नहीं कर रहे हैं, जो बेहद आपत्तिजनक है, और सभी कलेक्टरों को अपने प्रदर्शन में तत्काल सुधार कर फील्ड में जाकर जनसमस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करना होगा।
आगे क्या
मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख के बाद जिलों में प्रशासनिक हलचल तेज होने की संभावना है। औचक निरीक्षण की चेतावनी का सीधा असर कलेक्टरों और विभागीय अधिकारियों के कामकाज पर पड़ेगा, क्योंकि अब किसी भी समय मुख्यमंत्री के जिले में पहुंचने की संभावना बनी रहेगी। जन विश्वास अभियान के तहत लगने वाले शिविरों और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निपटारे की गति भी बढ़ने के आसार हैं। स्वामित्व योजना की धीमी प्रगति वाले जिलों में रजिस्ट्री का काम तेज होगा, वहीं कम बारिश वाले 12 जिलों में बनने वाली विशेष कार्ययोजनाओं से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। इंदौर में 23 अक्टूबर को स्काउट ग्राउंड में जन विश्वास कार्यक्रम का बड़ा आयोजन भी होने जा रहा है, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जन विश्वास अभियान सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही का पैमाना है।
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