Headlines

इंदौर में यहां नहीं जलता रावण, होती है पूजा: अर्जुन गोहर नगर में गोहर परिवार ने विजयादशमी पर की लंकापति की विशेष पूजा-अर्चना

इंदौर के अर्जुन गोहर नगर में रावण मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु

इंदौर ब्यूरो। विजयादशमी पर जहां पूरे देश में बुराई के प्रतीक के रूप में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं इंदौर के अर्जुन गोहर नगर में एक बिल्कुल अलग और अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां गोहर परिवार द्वारा लंकापति रावण की विशेष पूजा-अर्चना की गई। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत इस वर्ष भी परिवार ने यज्ञ, हवन और आरती कर रावण के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

यज्ञ, हवन और पंचामृत से हुआ विशेष पूजन

विजयादशमी के अवसर पर मंदिर में रावण की मूर्ति का पंचामृत से पूजन किया गया। यज्ञ और हवन के साथ विधि-विधान से आरती उतारी गई। इस अवसर पर कन्याओं के पैर पूजकर उन्हें भोजन प्रसादी भी कराई गई। परिवार और मोहल्ले के साथ शहर के कई श्रद्धालु भी यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं, इसलिए दशहरे के दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। फूल-मालाओं से सजी रावण की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर खड़े श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनती थी।

‘रावण प्रकांड पंडित, विद्वान और महान तपस्वी थे’

गोहर परिवार के अनुसार, वे रावण को प्रकांड पंडित, विद्वान और महान तपस्वी मानते हैं। इसी श्रद्धा के चलते दशहरे पर यहां दहन के बजाय विशेष आयोजन किया जाता है। परिवार ने कहा कि रावण के ज्ञान, तप और विद्वता के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए यह परंपरा निरंतर निभाई जा रही है। परिवार का मानना है कि किसी भी व्यक्तित्व के गुणों का सम्मान करना हमारी संस्कृति की पहचान है, और रावण की विद्वता उसी का एक रूप है।

वर्षभर होती है पूजा, मंगलवार-शनिवार को जुटते हैं श्रद्धालु

इस मंदिर में सिर्फ दशहरे पर ही नहीं, बल्कि वर्षभर पूजा होती है। विशेषकर मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर यहां आते हैं। मान्यता है कि सच्ची आस्था से मांगी गई मनोकामनाएं यहां पूरी होती हैं। यही कारण है कि अर्जुन गोहर नगर का यह रावण मंदिर अब आसपास के इलाकों में आस्था के एक अलग केंद्र के रूप में जाना जाने लगा है।

आस्था की यह अनोखी परंपरा देती है अलग संदेश

दशहरे के दिन जहां एक ओर शहर के मैदानों में रावण दहन होता है, वहीं अर्जुन गोहर नगर की यह पूजा परंपरा एक अलग ही तस्वीर पेश करती है। गोहर परिवार की यह आस्था बताती है कि परंपराएं सिर्फ एक जैसी नहीं होतीं — कहीं रावण अहंकार का प्रतीक है, तो कहीं वह ज्ञान और तप का सम्मान भी पाता है। यही विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खूबसूरती है।

फोटो: प्रदेश 24 न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार