नई दिल्ली ब्यूरो। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड (एसजीएफ) की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। यह फंड छोटी और मझोली कंपनियों में सीधे इक्विटी निवेश करेगा — यानी कंपनियों को कर्ज़ की जगह दीर्घकालिक पूंजी मिलेगी।
यह फैसला केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा का अगला चरण है। बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए इक्विटी, नकदी उपलब्धता और पेशेवर सहायता के उपायों का ऐलान किया गया था। अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ फंड की

स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।
कर्ज़ नहीं, अब हिस्सेदारी से मिलेगा पैसा
अब तक सरकार की ज्यादातर इक्विटी सहायता शुरुआती दौर के और सूक्ष्म उद्यमों तक सीमित रही है। लघु और मध्यम उद्यमों के लिए विकास-पूंजी में संरचनात्मक कमी बनी हुई है। एसएमई ग्रोथ फंड इसी कमी को दूर करेगा। फंड उच्च क्षमता वाले एसएमई को विकास इक्विटी पूंजी देगा, ताकि वे अपने विकास के निर्णायक मोड़ पर पूंजी की कमी से न पिछड़ें।
एसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं — रोजगार सृजन, निर्यात, विनिर्माण उत्पादन और नवाचार में इनका बड़ा योगदान है। विभिन्न योजनाओं से कर्ज़ की पहुंच तो सुधरी है, लेकिन विस्तार, नई तकनीक अपनाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतरने और अधिग्रहण जैसी दीर्घकालिक योजनाओं के लिए जोखिम-पूंजी की कमी आज भी बनी हुई है। नया फंड इसी कमी को भरने के लिए बनाया गया है।
किन्हें मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
एसजीएफ की अधिकांश राशि लघु एवं मध्यम विनिर्माण केंद्रित उद्यमों को आवंटित की जाएगी। टियर-2 और टियर-3 शहरों में काम करने वाले एसएमई पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। इससे संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
फंड औद्योगिक विकास कोष ढांचे के अंतर्गत स्थापित एक वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में कुल 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारतीय कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति मिलेगी।
फंड से क्या-क्या होगा संभव
दीर्घकालिक पूंजी मिलने से छोटे उद्यम अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकेंगे, उन्नत प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षमताओं में निवेश कर सकेंगे, बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकेंगे और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में खुद को जोड़ सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे उत्पादकता और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों में सुधार आएगा, और नई पीढ़ी के प्रतिस्पर्धी भारतीय उद्यम सामने आएंगे।
स्रोत: PIB
