दिल्ली ब्यूरो। 6 अक्टूबर की तारीख विश्व इतिहास के दो बड़े मोड़ों की गवाह है — और भारतीय सिनेमा के एक दिग्गज की जयंती की भी। आज मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या को 45 साल पूरे हो रहे हैं, योम किप्पुर युद्ध की शुरुआत को 53 साल, और हिंदी सिनेमा के ‘हैंडसम हीरो’ विनोद खन्ना की 80वीं जयंती है।

‘शांति के नायक’ की परेड में हत्या — सादात को 45 साल
6 अक्टूबर 1981 को मिस्र की राजधानी काहिरा में एक सैन्य परेड के दौरान राष्ट्रपति अनवर सादात की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विडंबना यह थी कि यह परेड 1973 के योम किप्पुर युद्ध की बरसी के उपलक्ष्य में हो रही थी — उसी युद्ध की, जिसकी अगुवाई सादात ने की थी।
सादात ने 1978 में इस्राइल के साथ कैंप डेविड समझौता किया था, जिसके लिए उन्हें इस्राइल के प्रधानमंत्री मेनाकेम बेगिन के साथ नोबेल शांति पुरस्कार मिला। अरब जगत में इस समझौते का तीखा विरोध हुआ था, और यही विरोध उनकी हत्या की पृष्ठभूमि बना।
योम किप्पुर युद्ध — 53 साल पहले आज ही शुरू हुआ था संघर्ष
6 अक्टूबर 1973 की सुबह मिस्र और सीरिया ने इस्राइल पर अचानक हमला बोल दिया था। यहूदियों के पवित्रतम दिन योम किप्पुर और मुसलमानों के रमज़ान माह में हुए इस हमले में मिस्री सेना ने स्वेज़ नहर पार कर ली थी। करीब तीन सप्ताह चला यह युद्ध 25 अक्टूबर 1973 को समाप्त हुआ और इसने पश्चिम एशिया की राजनीति की दिशा ही बदल दी।
विनोद खन्ना — 80वीं जयंती पर ‘हैंडसम हीरो’ को याद
6 अक्टूबर 1946 को पेशावर में जन्मे विनोद खन्ना 1970-80 के दशक के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं। ‘मेरे अपने’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘क़ुर्बानी’ और ‘दबंग’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है।
फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी बड़ी भूमिका निभाई — गुरदासपुर से कई बार सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी बने। वर्ष 2018 में उन्हें मरणोपरांत दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हो गया था।
