Headlines

राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व: सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर जानें क्यों खास है 31 अक्टूबर

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (सांकेतिक चित्र)

डेस्क रिपोर्ट।

31 अक्टूबर 2026 को देश राष्ट्रीय एकता दिवस मनाएगा। यह दिन सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के रूप में मनाया जाता है, और इस वर्ष उनकी 151वीं जयंती है। सरदार पटेल को देश के एकीकरण का शिल्पकार माना जाता है, क्योंकि आजादी के बाद बिखरे हुए देश को एक सूत्र में पिरोने का काम उन्हीं के नेतृत्व में हुआ था। राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य यही है कि हर नागरिक देश की एकता और अखंडता के प्रति अपने कर्तव्य को याद रखे।

राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है। यह दिन इस बात की याद दिलाता है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषा, धर्म, संस्कृति और परंपराओं वाले इस देश को एक राष्ट्र के रूप में बांधने का काम आसान नहीं था, और सरदार पटेल ने इसी कठिन काम को पूरा किया था। इसलिए 31 अक्टूबर को देशभर में एकता की शपथ, दौड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

सरदार पटेल कौन थे

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। वे पेशे से वकील थे, लेकिन आजादी के आंदोलन ने उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बना दिया। किसान आंदोलनों में उनकी भूमिका ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया, और बारडोली सत्याग्रह के बाद उन्हें सरदार की उपाधि मिली। आजादी के बाद वे देश के पहले उप प्रधानमंत्री और पहले गृह मंत्री बने।

सरदार पटेल की छवि एक दृढ़ और अनुशासित नेता की रही है। इसी दृढ़ता के कारण उन्हें लौह पुरुष के नाम से भी जाना जाता है। आजादी के बाद जब देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती रियासतों के एकीकरण की थी, तब सरदार पटेल ने इसी दृढ़ता और कूटनीति से उसे हल किया। उनका मानना था कि बिना एकता के आजादी अधूरी रहेगी, और यही विचार उनके जीवन का मूलमंत्र बन गया।

रियासतों का एकीकरण: सबसे बड़ी उपलब्धि

आजादी के समय देश में 562 से अधिक छोटी-बड़ी रियासतें थीं। ये रियासतें अलग-अलग शासकों के अधीन थीं, और यह तय नहीं था कि वे भारत में मिलेंगी या अलग रहेंगी। अगर ये रियासतें अलग रह जातीं, तो भारत का नक्शा टुकड़ों में बंट जाता। सरदार पटेल ने गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए इन रियासतों को भारत में मिलाने का अभियान चलाया।

इस अभियान में समझाने, बातचीत और जरूरत पड़ने पर दबाव — तीनों का इस्तेमाल हुआ। जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर जैसे कठिन मामलों को भी इसी प्रक्रिया से हल किया गया। कुछ ही वर्षों में लगभग सभी रियासतें भारतीय संघ का हिस्सा बन गईं। यही कारण है कि सरदार पटेल को आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है, क्योंकि उनके बिना आज का भारत भौगोलिक रूप से इतना विशाल और एकजुट नहीं होता।

राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत

राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई, जब सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि नई पीढ़ी सरदार पटेल के योगदान को जाने और देश की एकता के प्रति जागरूक बने। इस दिन सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर एकता की शपथ दिलाई जाती है।

एकता की शपथ में नागरिक यह संकल्प लेते हैं कि वे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए समर्पित रहेंगे। यह शपथ केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संदेश यह है कि हर नागरिक अपने दैनिक जीवन में एकता के मूल्यों को अपनाए — चाहे वह भाषा का सम्मान हो, धर्म का सम्मान हो या क्षेत्रीय विविधता का सम्मान हो।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: एकता का प्रतीक

गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के किनारे स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार पटेल को समर्पित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इस प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है और इसका उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की जयंती पर ही किया गया था। यह स्थान अब एकता नगर के नाम से जाना जाता है और हर वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस के मुख्य कार्यक्रम यहीं आयोजित होते हैं।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल एक प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण परिसर है जिसमें संग्रहालय, प्रदर्शनी, नदी घाटी का दृश्य और पर्यटन सुविधाएं हैं। यह परिसर सरदार पटेल के जीवन और देश के एकीकरण की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाता है। हर वर्ष लाखों लोग यहां आते हैं, और राष्ट्रीय एकता दिवस पर यहां विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

रन फॉर यूनिटी और देशभर के कार्यक्रम

राष्ट्रीय एकता दिवस का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम रन फॉर यूनिटी है, जिसमें देशभर के शहरों में हजारों लोग एक साथ दौड़ में भाग लेते हैं। इस दौड़ का संदेश साफ है — एकता के लिए सबको एक साथ कदम बढ़ाने होंगे। दिल्ली सहित कई शहरों में इस दौड़ का आयोजन होता है, और इसमें छात्र, खिलाड़ी, सरकारी कर्मचारी और आम नागरिक सभी भाग लेते हैं।

इसके अलावा इस दिन स्कूलों में निबंध, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताएं होती हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और सरदार पटेल के जीवन पर आधारित प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को यह समझाना है कि एकता कोई नारा नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी जरूरत है।

आज के समय में एकता दिवस की प्रासंगिकता

आज के समय में जब समाज में मतभेद और विभाजन की आवाजें सुनाई देती हैं, तब राष्ट्रीय एकता दिवस की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। सोशल मीडिया और तेज संचार के दौर में गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं, और ऐसे में एकता का संदेश लोगों तक पहुंचाना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। सरदार पटेल का जीवन इस बात का उदाहरण है कि मतभेदों के बावजूद साझा लक्ष्य के लिए सबको साथ लाया जा सकता है।

एकता का अर्थ यह नहीं है कि सबकी सोच एक जैसी हो जाए। एकता का अर्थ है कि मतभेदों के बावजूद देश के हित में सब एक साथ खड़े रहें। भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्र की विविधता भारत की पहचान है, और राष्ट्रीय एकता दिवस इसी विविधता का उत्सव है। यही कारण है कि हर वर्ष 31 अक्टूबर को देश इस संकल्प को दोहराता है कि एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।

151वीं जयंती का विशेष संदेश

वर्ष 2026 में सरदार पटेल की 151वीं जयंती एक विशेष अवसर है, क्योंकि यह नई पीढ़ी को उनके योगदान से जोड़ने का मौका देता है। डेढ़ शताब्दी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सरदार पटेल का काम प्रासंगिक है, क्योंकि देश के सामने आज भी एकता को बनाए रखने की चुनौती है। इस जयंती पर देशभर में आयोजित कार्यक्रम इसी संदेश को आगे बढ़ाएंगे कि एकता के बिना विकास और सुरक्षा दोनों अधूरे हैं।

राष्ट्रीय एकता दिवस हमें यह भी सिखाता है कि राष्ट्र निर्माण किसी एक व्यक्ति का काम नहीं होता, बल्कि यह हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। सरदार पटेल ने रियासतों को जोड़ा था, लेकिन आज की पीढ़ी का काम दिलों को जोड़ना है। यही इस दिवस का सबसे बड़ा संदेश है, और यही कारण है कि 31 अक्टूबर हर वर्ष देश के लिए एक प्रेरणा का दिन बन जाता है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार