नागपुर ब्यूरो
सार: रणजी ट्रॉफी एलीट ग्रुप ए के मुकाबले में विदर्भ के कप्तान और बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे ने सोमवार को मध्य प्रदेश के खिलाफ एक पारी में 9 विकेट लेकर इतिहास रच दिया। मध्य प्रदेश की टीम पहली पारी में केवल 209 रन पर सिमट गई, जिसमें अथर्व महाजन के 85 रन ही एकमात्र बड़ी पारी रही।
रणजी ट्रॉफी 2026-27 के चौथे दौर में सोमवार, 2 नवंबर को नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, जामथा में विदर्भ और मध्य प्रदेश के बीच मुकाबला शुरू हुआ। इस मुकाबले के पहले दिन का पूरा आकर्षण विदर्भ के कप्तान हर्ष दुबे की गेंदबाजी रही। बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे ने 23.1 ओवर में केवल 53 रन देकर 9 विकेट अपने नाम किए। यह उनके करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है। साथ ही वह विदर्भ के पहले गेंदबाज बन गए हैं, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी की एक पारी में 9 विकेट लिए हैं। मध्य प्रदेश के खिलाफ भी पहले कभी किसी गेंदबाज ने एक पारी में इतने विकेट नहीं लिए थे।
पहले दिन का पूरा हाल
मध्य प्रदेश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। शुरुआत में ऐसा लगा कि मध्य प्रदेश की टीम एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा कर लेगी, लेकिन हर्ष दुबे की गेंदबाजी के सामने पूरी बल्लेबाजी क्रम बिखर गया। मध्य प्रदेश की पहली पारी 66.1 ओवर में 209 रन पर समाप्त हो गई। विदर्भ के तेज गेंदबाज नचिकेत भुटे ने पहला विकेट लिया, लेकिन उसके बाद के सभी 9 विकेट हर्ष दुबे के खाते में गए। यानी पूरी पारी में विदर्भ के केवल दो गेंदबाजों ने विकेट लिए और उनमें से एक ने अकेले ही लगभग पूरी टीम को पवेलियन भेज दिया।
मध्य प्रदेश के बल्लेबाजों के लिए यह पारी किसी परीक्षा से कम नहीं थी। पिच पर गेंद धीरे-धीरे घूम रही थी और हर्ष दुबे ने अपनी लाइन और लेंथ से बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। उन्होंने कभी गेंद को हवा में धीमा किया तो कभी तेज तर्रार गेंद से बल्लेबाज को चकमा दिया। नतीजा यह हुआ कि मध्य प्रदेश के बल्लेबाज कभी भी लंबी साझेदारी नहीं बना सके। एक के बाद एक विकेट गिरते रहे और टीम का स्कोर 209 तक ही पहुंच सका।
हर्ष दुबे का ऐतिहासिक स्पैल

हर्ष दुबे की गेंदबाजी के आंकड़े अपने आप में एक कहानी कहते हैं। उन्होंने 23.1 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें 4 ओवर मेडन रहे और केवल 53 रन खर्च किए। इस दौरान उन्होंने 9 बल्लेबाजों को आउट किया। उनके शिकारों में मध्य प्रदेश के कप्तान रजत पाटीदार भी शामिल थे, जो केवल 2 रन बनाकर आउट हुए। इसके अलावा उन्होंने सारांश जैन, शुभम शर्मा और अरशद खान जैसे अहम बल्लेबाजों को भी पवेलियन भेजा।
एक पारी में 9 विकेट लेना घरेलू क्रिकेट में बेहद दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है। रणजी ट्रॉफी के लंबे इतिहास में ऐसा बहुत कम बार हुआ है। हर्ष दुबे के इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि उन्होंने लगातार दबाव बनाए रखा। उन्होंने एक छोर से विकेटों का सिलसिला नहीं टूटने दिया और मध्य प्रदेश के बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया। जब भी मध्य प्रदेश की टीम साझेदारी बनाने की कोशिश करती, हर्ष दुबे कोई न कोई विकेट लेकर उस कोशिश को तोड़ देते।
मध्य प्रदेश की पारी कैसे बिखरी
मध्य प्रदेश की पारी की शुरुआत ही खराब रही। सलामी बल्लेबाज यश दुबे केवल 5 रन बनाकर नचिकेत भुटे की गेंद पर आउट हो गए। इसके बाद हर्ष दुबे ने मोर्चा संभाल लिया। चंचल राठौड़ 13 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश के मध्यक्रम पर भी दबाव बढ़ता गया। कप्तान रजत पाटीदार का जल्दी आउट होना टीम के लिए बड़ा झटका था। रजत पाटीदार भारतीय टीम के लिए भी खेल चुके हैं और उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन हर्ष दुबे ने उन्हें केवल 2 रन पर ही पवेलियन भेज दिया।
शुभम शर्मा ने 16 रन बनाए, लेकिन वह भी लंबी पारी नहीं खेल सके। सारांश जैन ने 34 रन की तेज पारी खेली और कुछ समय तक टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन वह भी हर्ष दुबे की गेंद पर आउट हो गए। सारांश जैन वही खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इस सीजन में पहले बिहार के खिलाफ एक मैच में 13 विकेट लिए थे। इस बार गेंद से नहीं, बल्ले से उनसे उम्मीद थी, लेकिन विदर्भ के कप्तान के सामने वह भी नहीं टिक सके। मध्य प्रदेश के निचले क्रम के बल्लेबाज भी ज्यादा देर तक क्रीज पर नहीं रह सके और पूरी टीम 209 रन पर ऑल आउट हो गई।
अथर्व महाजन की अकेली लड़ाई
मध्य प्रदेश की पारी में अगर कोई एक बल्लेबाज उम्मीद की किरण बनकर उभरा, तो वह अथर्व महाजन थे। अथर्व महाजन ने 85 रन की शानदार पारी खेली और अकेले ही टीम के स्कोर को 200 के पार पहुंचाया। उन्होंने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और खराब गेंदों पर रन भी बटोरे। जब एक छोर से विकेट गिर रहे थे, तब अथर्व महाजन ने दूसरे छोर को संभाले रखा। उनकी पारी में कई खूबसूरत शॉट देखने को मिले।
अथर्व महाजन की पारी की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि टीम के दूसरे सबसे बड़े स्कोरर सारांश जैन थे, जिन्होंने 34 रन बनाए। यानी अथर्व महाजन का स्कोर टीम के बाकी किसी भी बल्लेबाज से ढाई गुना से भी ज्यादा था। दुर्भाग्य से अथर्व महाजन भी अंत में हर्ष दुबे की ही गेंद पर आउट हुए। उनके आउट होते ही मध्य प्रदेश की पारी की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई और टीम जल्द ही 209 रन पर सिमट गई।
विदर्भ के कप्तान की कहानी
हर्ष दुबे का यह प्रदर्शन अचानक नहीं आया है। वह पिछले कुछ सीजन से घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले सीजन में उन्होंने रणजी ट्रॉफी के एक सीजन में सबसे ज्यादा 69 विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया था। यह रिकॉर्ड रणजी ट्रॉफी के करीब 90 साल के इतिहास में किसी भी गेंदबाज का एक सीजन में सबसे ज्यादा विकेटों का रिकॉर्ड है। उसी सीजन में विदर्भ की टीम ने खिताब भी जीता था और हर्ष दुबे उस जीत के सबसे बड़े नायकों में से एक थे।
इस सीजन की शुरुआत हर्ष दुबे के लिए मिली-जुली रही थी। पहले तीन मैचों में उन्होंने 14 विकेट लिए थे, लेकिन कोई बड़ी पारी वाली स्पैल नहीं आई थी। मध्य प्रदेश के खिलाफ इस मैच में उन्होंने न केवल अपनी फॉर्म वापस पाई, बल्कि करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी कर दिया। घरेलू क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन से राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं का ध्यान भी उनकी ओर जाता है। हर्ष दुबे पहले भी भारत की वनडे टीम का हिस्सा रह चुके हैं और लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी क्षमता किसी से छिपी नहीं है।
ग्रुप ए की तस्वीर और आगे का रास्ता
विदर्भ इस मैच में ग्रुप ए में मजबूत स्थिति में उतरी थी। इससे पहले विदर्भ ने गोवा को पारी और 27 रन से हराया था और उस जीत के साथ ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया था। मध्य प्रदेश के खिलाफ पहले दिन की इस गेंदबाजी ने विदर्भ की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। अब विदर्भ की टीम अपनी पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाकर मध्य प्रदेश पर दबाव बढ़ाना चाहेगी।
मध्य प्रदेश के लिए अब इस मैच में वापसी की राह कठिन हो गई है। पहली पारी में केवल 209 रन बनाने के बाद अब मध्य प्रदेश के गेंदबाजों पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्हें विदर्भ की बल्लेबाजी को जल्दी समेटना होगा, वरना विदर्भ पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल कर सकती है। रणजी ट्रॉफी में पहली पारी की बढ़त अक्सर मैच का रुख तय कर देती है, इसलिए मध्य प्रदेश के गेंदबाजों को दूसरे दिन से ही आक्रामक गेंदबाजी करनी होगी।
मध्य प्रदेश के लिए सबक और वापसी की राह
मध्य प्रदेश की टीम के लिए यह पारी एक सबक की तरह है। इस सीजन में मध्य प्रदेश ने बिहार के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की थी, जिसमें सारांश जैन ने 13 विकेट लिए थे। उस जीत से टीम का मनोबल ऊंचा था, लेकिन विदर्भ के खिलाफ पहले दिन की बल्लेबाजी ने दिखा दिया कि बड़े मुकाबलों में धैर्य और तकनीक की परीक्षा और कड़ी होती है। स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ मध्य प्रदेश के बल्लेबाजों को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा।
फिर भी मैच अभी खत्म नहीं हुआ है। रणजी ट्रॉफी के मैच चार दिन के होते हैं और पहले दिन की हार के बाद भी वापसी संभव है। मध्य प्रदेश के गेंदबाजों में कुमार कार्तिकेय, अवेश खान और सारांश जैन जैसे अनुभवी नाम हैं, जो विदर्भ की बल्लेबाजी को परेशान कर सकते हैं। अगर मध्य प्रदेश के गेंदबाज विदर्भ को कम स्कोर पर रोक लेते हैं, तो दूसरी पारी में बल्लेबाजों को वापसी का मौका मिलेगा।
आगे क्या
मुकाबले के बाकी दिनों में अब सबकी नजर विदर्भ की बल्लेबाजी और मध्य प्रदेश की गेंदबाजी पर रहेगी। विदर्भ की टीम पहली पारी में बड़ी बढ़त बनाना चाहेगी, जबकि मध्य प्रदेश की टीम जल्दी विकेट लेकर मैच में वापसी करना चाहेगी। हर्ष दुबे का यह स्पैल लंबे समय तक याद रखा जाएगा, लेकिन मैच का नतीजा अभी बाकी है। मध्य प्रदेश के प्रशंसक उम्मीद करेंगे कि उनकी टीम दूसरे दिन से बेहतर प्रदर्शन करे और इस मुकाबले को रोमांचक बनाए।
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