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दिवाली पर 8,000 रुपये बोनस का मैसेज फर्जी: PIB ने जारी की चेतावनी, लिंक पर क्लिक न करें, OTP किसी को न दें

सांकेतिक चित्र: दिवाली पर फर्जी बोनस मैसेज से सावधानी

नई दिल्ली ब्यूरो

सार: दिवाली पर 8,000 रुपये बोनस देने का दावा करने वाला व्हाट्सऐप मैसेज पूरी तरह फर्जी है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने 2 नवंबर 2026 को इस दावे को गलत बताते हुए लोगों को चेतावनी दी है कि मैसेज में दिया गया लिंक एक नकली वेबसाइट पर ले जाता है, जहां निजी और बैंक से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, किसी के साथ ओटीपी या यूपीआई पिन साझा न करें, और पैसे गंवाने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

त्योहारों के मौसम में जब बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है और घर-घर में खरीदारी, उपहार और शुभकामनाओं का दौर चलता है, उसी समय ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। इस बार ठगों ने दिवाली के नाम पर एक नया जाल बिछाया है। व्हाट्सऐप पर एक मैसेज तेजी से फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार दिवाली के अवसर पर प्रधानमंत्री के नाम पर हर व्यक्ति को 8,000 रुपये का बोनस दे रही है। मैसेज के साथ एक लिंक भी भेजा जा रहा है और कहा जा रहा है कि इस लिंक पर क्लिक करके रकम पाने के लिए जानकारी भरनी होगी।

इस मैसेज को देखकर कई लोगों के मन में सवाल उठा कि क्या सच में सरकार ने ऐसा कोई ऐलान किया है। इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है — नहीं। सरकार की ओर से दिवाली पर 8,000 रुपये बोनस देने की कोई योजना नहीं चलाई जा रही है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के फैक्ट चेक ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी करार दिया है और लोगों से अपील की है कि वे ऐसे मैसेज पर भरोसा न करें।

क्या है वायरल मैसेज का दावा

वायरल हो रहे मैसेज में कहा जा रहा है कि भारत सरकार दिवाली पर प्रधानमंत्री के नाम से 8,000 रुपये का बोनस दे रही है। मैसेज में एक तस्वीर और एक लिंक भी शामिल होता है। लिंक पर क्लिक करने पर एक वेबसाइट खुलती है, जो देखने में किसी सरकारी पोर्टल जैसी लग सकती है, लेकिन वास्तव में वह एक नकली वेबसाइट होती है। इसी नकली वेबसाइट के जरिए ठग लोगों की जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

यह समझना जरूरी है कि किसी सरकारी योजना की घोषणा कभी सिर्फ व्हाट्सऐप फॉरवर्ड के जरिए नहीं होती। अगर सरकार कोई आर्थिक सहायता या बोनस देती है, तो उसकी जानकारी सरकारी पोर्टल, आधिकारिक विज्ञप्ति और विश्वसनीय माध्यमों से सार्वजनिक होती है। केवल एक मैसेज के आधार पर किसी योजना को सही मान लेना खतरनाक हो सकता है।

ठगी का तरीका कैसे काम करता है

सांकेतिक चित्र: संदिग्ध लिंक वाले मैसेज से सावधानी
सांकेतिक चित्र: संदिग्ध लिंक वाले मैसेज से सावधानी

इस ठगी की शुरुआत एक साधारण से मैसेज से होती है। मैसेज में मुफ्त रकम का लालच दिया जाता है, ताकि पढ़ने वाला व्यक्ति बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक कर दे। लिंक खुलने के बाद नकली वेबसाइट पर नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी और दूसरी निजी जानकारियां मांगी जाती हैं। कुछ मामलों में बोनस जारी करने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस भी मांगी जा सकती है।

इसके आगे ठग लोगों से यूपीआई के जरिए पैसे भेजने या कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए भी कह सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति इन बातों में आ जाता है, तो उसके बैंक खाते से पैसे निकलने का खतरा रहता है। साथ ही, मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी भी चोरी हो सकती है। डाउनलोड कराया गया ऐप फोन को नुकसान पहुंचा सकता है और ठगों को फोन तक पहुंच बना सकता है।

इसीलिए इस तरह के मैसेज को सिर्फ एक अफवाह मानकर नजरअंदाज करना काफी नहीं है। यह एक सोची-समझी फिशिंग ठगी है, जिसमें मुफ्त पैसे का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाया जाता है। फिशिंग का अर्थ है नकली वेबसाइट या मैसेज के जरिए असली जानकारी हासिल करना। इस मामले में प्रधानमंत्री के नाम का गलत इस्तेमाल इसलिए किया गया है, ताकि मैसेज भरोसेमंद लगे।

पीआईबी फैक्ट चेक ने क्या कहा

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के फैक्ट चेक ने 2 नवंबर 2026 को इस मैसेज को लेकर स्पष्ट चेतावनी जारी की। फैक्ट चेक में कहा गया कि व्हाट्सऐप पर फैल रहा यह दावा गलत है। मैसेज लोगों को एक नकली वेबसाइट पर ले जाता है, जहां उनसे निजी जानकारी मांगी जाती है। लोगों को ऐसे फिशिंग स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

चेतावनी में यह भी कहा गया है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा न करें। ओटीपी और यूपीआई पिन ऐसी गोपनीय जानकारियां हैं, जिन्हें बैंक या सरकार कभी भी फोन, मैसेज या लिंक के जरिए नहीं मांगती। अगर कोई मैसेज या कॉल पर ओटीपी मांग रहा है, तो वह ठगी की निशानी है।

इस चेतावनी को हैदराबाद की साइबर क्राइम यूनिट की ओर से फैलाए गए अलर्ट के बाद साझा किया गया। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने भी इस मैसेज को फिशिंग का तरीका बताते हुए लोगों को सावधान किया है। यानी यह चेतावनी सिर्फ एक जगह से नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों की ओर से भी सामने आई है।

फर्जी मैसेज की पहचान कैसे करें

फर्जी मैसेज की पहचान के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। पहली निशानी है मुफ्त रकम का वादा। सरकार की योजनाओं में पात्रता, दस्तावेज और प्रक्रिया तय होती है। कोई भी योजना हर व्यक्ति को बिना किसी प्रक्रिया के सीधे 8,000 रुपये देने का वादा नहीं करती। दूसरी निशानी है जल्दबाजी। ठग अक्सर यह दबाव बनाते हैं कि ऑफर सीमित समय के लिए है, ताकि व्यक्ति सोचने का समय न ले सके।

तीसरी निशानी है अनजान लिंक। अगर मैसेज में किसी अज्ञात वेबसाइट का लिंक दिया गया है और उस पर जानकारी भरने को कहा जा रहा है, तो सावधान हो जाना चाहिए। चौथी निशानी है फीस या ओटीपी की मांग। बोनस या सहायता देने के नाम पर अगर प्रोसेसिंग फीस, यूपीआई भुगतान या ओटीपी मांगा जा रहा है, तो वह ठगी है। पांचवीं निशानी है बड़े नाम का इस्तेमाल। प्रधानमंत्री या सरकार के नाम का इस्तेमाल करके मैसेज को आधिकारिक दिखाने की कोशिश की जाती है, लेकिन नाम का इस्तेमाल ही सच्चाई की गारंटी नहीं है।

इन निशानियों को पहचानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि ठग हर त्योहार पर नया तरीका अपनाते हैं। कभी कैशबैक, कभी लॉटरी, कभी बोनस और कभी सरकारी योजना के नाम पर लोगों को फंसाया जाता है। तरीका बदलता रहता है, लेकिन लालच और जल्दबाजी का पैटर्न एक जैसा रहता है।

मैसेज मिलने पर तुरंत क्या करें और क्या न करें

अगर आपके पास 8,000 रुपये दिवाली बोनस वाला मैसेज आता है, तो सबसे पहले जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही इस मैसेज को दूसरे लोगों को भेजें। मैसेज को आगे बढ़ाने से ठगी का दायरा बढ़ता है और आपके जानने वाले भी खतरे में पड़ सकते हैं।

अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी और यूपीआई पिन किसी के साथ साझा न करें। सरकार की किसी भी योजना की जानकारी के लिए संबंधित सरकारी वेबसाइट पर ही भरोसा करें। अगर कोई योजना असली है, तो उसकी जानकारी सरकारी पोर्टल पर जरूर उपलब्ध होगी। केवल व्हाट्सऐप पर आए मैसेज को देखकर किसी सरकारी योजना को सही न मानें।

अगर आपने गलती से लिंक पर क्लिक कर दिया है, लेकिन कोई जानकारी नहीं भरी है, तो भी सतर्क रहें। फोन में कोई अनजान ऐप डाउनलोड न करें और बैंक खाते की गतिविधि पर नजर रखें। अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें।

लिंक पर क्लिक कर चुके हैं या जानकारी दे चुके हैं तो क्या करें

अगर आपने लिंक पर क्लिक करके अपनी निजी या बैंक से जुड़ी जानकारी भर दी है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर या बैंकिंग ऐप के जरिए जानकारी दें और खाते तथा भुगतान सेवाओं को सुरक्षित करने के लिए कहें। अगर आपने ओटीपी या यूपीआई पिन साझा किया है, तो बिना देर किए बैंक को सूचित करें और बैंकिंग पासवर्ड तथा यूपीआई से जुड़ी जानकारियां बदलें।

अगर आपने कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड किया है, तो उस ऐप का इस्तेमाल न करें और उसे और अनुमति न दें। अगर आपको लगता है कि फोन को दूर से नियंत्रित किया जा रहा है, तो फोन को इंटरनेट से अलग कर दें और ऐप हटाने के लिए मदद लें। अगर आपने यूपीआई के जरिए कोई भुगतान कर दिया है, तो तुरंत बैंक को बताएं और अनधिकृत भुगतान की रिपोर्ट करें। जांच अपने आप होने का इंतजार न करें।

अगर आपने यह मैसेज दूसरों को भेज दिया है, तो उसे आगे फैलाना बंद करें और जिन लोगों को मैसेज भेजा है, उन्हें सचेत करें कि वे लिंक पर क्लिक न करें और अपनी जानकारी साझा न करें। समय पर दी गई चेतावनी कई लोगों को ठगी से बचा सकती है।

पैसे गंवा चुके हैं तो तुरंत शिकायत कैसे करें

अगर इस फर्जी ऑफर के चक्कर में आपने पैसे भेज दिए हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें। सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्ट करें। शिकायत करते समय रकम, भुगतान का संदर्भ नंबर और लेन-देन से जुड़ी जानकारी तैयार रखें।

इसके साथ ही अपने बैंक की आधिकारिक फ्रॉड या कस्टमर सपोर्ट टीम से तुरंत संपर्क करें। बैंक से लेन-देन को चिह्नित करने और खाते को सुरक्षित करने में मदद मांगें। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। शिकायत में मैसेज, वेबसाइट, फोन नंबर, भुगतान की पुष्टि, लेन-देन आईडी और ठगों से हुई बातचीत से जुड़े सबूत शामिल करें।

मैसेज और नकली वेबसाइट के स्क्रीनशॉट, फोन नंबर, भुगतान की रसीद और लेन-देन आईडी को सुरक्षित रखें। ये सबूत जांच में मदद कर सकते हैं। शिकायत करने के बाद मिलने वाला पावती नंबर संभालकर रखें और बैंक से संपर्क करते समय उसे साझा करें। शिकायत जल्द करने से अधिकारियों को समय पर कार्रवाई का मौका मिलता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि जल्दी शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं मिलती, लेकिन देर करने से मौका और कम हो जाता है।

फर्जी सरकारी मैसेज की रिपोर्ट कहां करें

केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी संदिग्ध दावे की जानकारी पीआईबी फैक्ट चेक को दी जा सकती है। पीआईबी फैक्ट चेक से फोन नंबर +91 8799711259 और ईमेल factcheck@pib.gov.in के जरिए संपर्क किया जा सकता है। अगर आपको कोई ऐसा मैसेज मिलता है, जिसमें सरकार के नाम पर पैसा, बोनस या योजना का दावा किया जा रहा है, तो उसकी जानकारी फैक्ट चेक को देना दूसरों को बचाने में मदद करता है।

साथ ही, साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in पोर्टल उपलब्ध हैं। इन माध्यमों का इस्तेमाल करके आप न सिर्फ अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, बल्कि ठगों के खिलाफ कार्रवाई में भी मदद कर सकते हैं।

त्योहारों में ठगों से बचने के सामान्य उपाय

दिवाली जैसे त्योहारों पर ऑनलाइन खरीदारी, उपहार भेजना और भुगतान बढ़ जाता है। इसी भीड़ में ठग फर्जी ऑफर, नकली वेबसाइट और फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए लोगों को फंसाने की कोशिश करते हैं। इसलिए त्योहारों के समय हर ऑफर को जांचकर ही स्वीकार करें। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले यह देखें कि वह आधिकारिक वेबसाइट है या नहीं।

परिवार के सदस्यों, खासकर उन लोगों को भी इस चेतावनी के बारे में बताएं, जो व्हाट्सऐप फॉरवर्ड पर ज्यादा भरोसा करते हैं। अक्सर लोग भरोसेमंद जानने वाले से आया मैसेज देखकर उसे सही मान लेते हैं, लेकिन फॉरवर्ड किया गया मैसेज भी फर्जी हो सकता है। इसलिए मैसेज भेजने वाले की पहचान नहीं, बल्कि मैसेज की सच्चाई जांचें।

बैंक खाते, यूपीआई और कार्ड से जुड़ी जानकारी को कभी भी किसी लिंक, फॉर्म या अनजान ऐप में न भरें। असली सरकारी योजना में जानकारी सरकारी पोर्टल पर ही मांगी जाती है, न कि व्हाट्सऐप लिंक के जरिए। अगर कोई मैसेज आपको डराता है या लालच देता है, तो रुककर सोचें और आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।

आगे क्या होगा

पीआईबी फैक्ट चेक की चेतावनी के बाद यह मैसेज फर्जी साबित हो चुका है, लेकिन ठग नए नाम और नए ऑफर के साथ फिर से सामने आ सकते हैं। इसलिए लोगों को इस चेतावनी को सिर्फ एक खबर की तरह पढ़कर भूलना नहीं चाहिए। इसे परिवार और दोस्तों तक पहुंचाना भी जरूरी है, ताकि कोई और इस जाल में न फंसे।

साइबर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर ऐसे फर्जी मैसेज को लेकर चेतावनी जारी करती रहती हैं। लोगों को इन चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और किसी भी सरकारी योजना की पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट से करनी चाहिए। दिवाली की खुशियां तभी पूरी होती हैं, जब पैसा और जानकारी दोनों सुरक्षित रहें।

अगर आपको भी ऐसा कोई मैसेज मिला है, तो उसे आगे न बढ़ाएं, लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध दावे की जानकारी पीआईबी फैक्ट चेक को दें। सतर्कता ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे आसान और असरदार तरीका है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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