भोपाल ब्यूरो
सार: मध्य प्रदेश के गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 3062 ग्रामीण आशा कार्यकर्ताओं का चयन किया जाएगा। 16 नवंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे और पात्र महिलाएं 16 दिसंबर तक आवेदन कर सकेंगी।
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने वाली व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी पूरी हो गई है। प्रदेश में 3062 ग्रामीण आशा कार्यकर्ताओं के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह चयन उन गांवों के लिए किया जा रहा है, जहां स्वास्थ्य कार्यकर्ता की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। करीब पांच साल के अंतराल के बाद इतने बड़े स्तर पर ग्रामीण आशा कार्यकर्ताओं का चयन होने जा रहा है, इसलिए इसे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
आशा कार्यकर्ता गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था की पहली कड़ी होती हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, नवजात शिशुओं का टीकाकरण, बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी और परिवारों को स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देने जैसे कामों में उनकी भूमिका सबसे आगे रहती है। जब गांव में ही एक प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता मौजूद होती है, तो छोटी बीमारी भी समय पर पकड़ में आ जाती है और गंभीर स्थिति से पहले ही इलाज की व्यवस्था हो जाती है। इसी वजह से नए चयन को सिर्फ नौकरियों की संख्या के नजरिए से नहीं, बल्कि गांवों में स्वास्थ्य सुरक्षा के विस्तार के नजरिए से देखा जा रहा है।
कौन कर सकता है आवेदन
इस चयन प्रक्रिया के लिए पात्रता की शर्तें साफ तौर पर तय की गई हैं। आवेदन करने वाली महिला का उसी गांव की निवासी होना जरूरी है, जिस गांव के लिए आशा कार्यकर्ता का चयन किया जाना है। इसके साथ ही आवेदिका का विवाहित होना अनिवार्य रखा गया है। आयु सीमा 21 वर्ष से 45 वर्ष के बीच तय की गई है। शैक्षणिक योग्यता के रूप में कम से कम दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है।
ये शर्तें इसलिए रखी गई हैं, क्योंकि आशा कार्यकर्ता को अपने ही गांव के परिवारों के बीच काम करना होता है। गांव की निवासी होने से वह परिवारों को पहले से जानती है, उनकी भाषा और उनकी जरूरतों को समझती है और विश्वास के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी पहुंचा सकती है। उम्र और शिक्षा की सीमा यह सुनिश्चित करती है कि चयनित कार्यकर्ता प्रशिक्षण को समझ सके, रिकॉर्ड रख सके और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों पर सही तरीके से काम कर सके।
आवेदन की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तारीखें
आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से लिए जाएंगे। इच्छुक और पात्र महिलाएं 16 नवंबर से 16 दिसंबर 2026 तक एमपी ई-सेवा पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी। केवल पोर्टल के जरिए प्राप्त आवेदन ही मान्य होंगे। किसी भी तरह का ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए आवेदन करने वाली महिलाओं को समय रहते ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध रखने के लिए एक तय समय-सारिणी जारी की गई है। 16 दिसंबर तक आवेदन लेने के बाद 17 से 25 दिसंबर तक आवेदनों को ग्रामसभा के सामने रखा जाएगा। इसके बाद 26 दिसंबर 2026 से 18 जनवरी 2027 तक संबंधित ग्रामसभाएं चयन प्रस्तावों को मंजूरी देंगी। इस दौरान आपत्तियों का निपटारा भी किया जाएगा। 6 से 25 फरवरी 2027 तक जिला स्तर पर अपीलों की सुनवाई होगी और 26 फरवरी से 5 मार्च 2027 के बीच जिला स्वास्थ्य समिति से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही आधिकारिक चयन आदेश जारी होंगे। चयनित महिलाओं की पहचान पत्र बनाने के लिए 6 से 20 मार्च 2027 तक आशा पोर्टल के माध्यम से अनुरोध भेजा जाएगा।

चयन कैसे होगा
ग्रामीण आशा कार्यकर्ताओं के चयन की पूरी प्रक्रिया जिला स्तर पर पूरी की जाएगी। चयन केवल चिह्नित गांवों और पहले से तय गांववार संख्या के अनुसार ही किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि हर गांव के लिए पदों की संख्या पहले से निर्धारित है और उसी के अनुसार चयन होगा। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्वास्थ्य समिति की सीधी निगरानी में यह प्रक्रिया संपन्न होगी।
ग्रामसभा की भूमिका इस प्रक्रिया में सबसे अहम रखी गई है। आवेदनों को ग्रामसभा के सामने रखा जाएगा और ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर ही चयन आगे बढ़ेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि गांव के लोग अपनी स्वास्थ्य कार्यकर्ता के चयन में भागीदार बनें और चयन गांव की जरूरतों के अनुरूप हो। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर चरण की समय-सीमा तय की गई है, ताकि प्रक्रिया लंबे समय तक लटकी न रहे और पात्र महिलाओं को समय पर नियुक्ति मिल सके।
गांवों में आशा कार्यकर्ता की भूमिका क्यों अहम है
गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी चुनौती दूरी और जानकारी की कमी होती है। अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में समय लगता है और कई बार परिवारों को यह पता ही नहीं होता कि कौन सी सुविधा उनके लिए उपलब्ध है। आशा कार्यकर्ता इसी दूरी को कम करती है। वह गर्भवती महिला को समय पर जांच के लिए प्रेरित करती है, बच्चे के टीकाकरण की तारीख याद दिलाती है, बीमार व्यक्ति को सही स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में मदद करती है और सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाती है।
मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं का योगदान विशेष रूप से अहम माना जाता है। प्रसव के पहले और बाद की देखभाल, नवजात की शुरुआती जांच और पोषण की जानकारी जैसे कामों में उनकी सक्रियता से कई गंभीर स्थितियों को समय रहते रोका जा सकता है। इसके अलावा, टीकाकरण अभियान, परिवार नियोजन की जानकारी और संक्रामक बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूकता फैलाने में भी वे अहम भूमिका निभाती हैं। नए चयन से उन गांवों को भी राहत मिलेगी, जहां अब तक आशा कार्यकर्ता का पद खाली था या एक कार्यकर्ता पर कई गांवों का भार था।
आवेदन करते समय किन बातों का ध्यान रखें
आवेदन करने वाली महिलाओं को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आवेदन केवल आधिकारिक एमपी ई-सेवा पोर्टल के माध्यम से ही किया जाए। आवेदन में दी गई जानकारी सही और पूरी होनी चाहिए, क्योंकि गलत जानकारी के कारण आवेदन निरस्त हो सकता है। निवास, आयु और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज पहले से तैयार रखना समझदारी होगी, ताकि अंतिम तारीख के दबाव में कोई गलती न हो।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आवेदन की अंतिम तारीख 16 दिसंबर है। अंतिम दिनों में पोर्टल पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए आवेदन को आखिरी दिन तक टालने से बचना चाहिए। आवेदन जमा करने के बाद उसकी पावती या पंजीकरण संख्या को सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि आगे की प्रक्रिया में जरूरत पड़ने पर उसे दिखाया जा सके। किसी भी तरह की अफवाह या बिचौलियों के झांसे में आने से बचना चाहिए, क्योंकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से तय की गई है।
आगे क्या होगा
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्रामसभा और जिला स्तर की प्रक्रिया तय समय-सारिणी के अनुसार आगे बढ़ेगी। मार्च 2027 तक चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद नई आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें अपने गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है, खासकर उन इलाकों में जहां स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी सबसे ज्यादा महसूस की जा रही थी।
लंबे अंतराल के बाद हो रहा यह चयन उन महिलाओं के लिए भी एक अवसर है, जो अपने गांव में ही रहकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। यह न सिर्फ उनके लिए रोजगार का रास्ता खोलेगा, बल्कि उनके गांव के परिवारों के लिए भी स्वास्थ्य सुरक्षा की एक मजबूत कड़ी बनेगा। आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इसका सीधा असर प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
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