सार: भारत ने चालू वित्त वर्ष में वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिल्ली में कहा कि अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान निर्यात 14 प्रतिशत बढ़कर 480 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, और बाकी छह महीनों में 520 अरब डॉलर का निर्यात हासिल करना होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी व्यापार समझौते में डेयरी क्षेत्र नहीं खोलेगा और आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं देगा।
दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में आयोजित यंग लीडर्स डिस्कोर्स फोरम में छात्रों को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश की व्यापारिक उपलब्धियों, भविष्य के लक्ष्यों और व्यापार वार्ताओं में भारत की स्पष्ट प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की। उनका संदेश दोहरा था — एक ओर महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्य, दूसरी ओर किसानों, मछुआरों और छोटे उद्यमियों के हितों की सुरक्षा। उन्होंने युवाओं से कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य गैर-समझौतावादी है, और आज के छात्र जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, तब अपने चालीस के दशक में होंगे — यानी देश के भविष्य की दिशा तय करने में उनकी भूमिका निर्णायक होगी।
क्या कहा गया: 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि भारत ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात का लक्ष्य 1 ट्रिलियन डॉलर रखा है। यह लक्ष्य पिछले वर्ष के सर्वाधिक 863 अरब डॉलर के निर्यात से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने बताया कि वैश्विक व्यापार की शुरुआती धारणा कमजोर थी, फिर भी भारत ने जानबूझकर ऊंचा लक्ष्य चुना। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अप्रैल-मई 2026 में वैश्विक व्यापार वृद्धि का अनुमान केवल 1.9 प्रतिशत लगाया था, लेकिन बाद में इसे संशोधित कर लगभग 3.5 प्रतिशत कर दिया गया। मंत्री ने कहा कि इस संशोधन में भारत के निर्यात प्रदर्शन की भी भूमिका हो सकती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत 900 अरब डॉलर का लक्ष्य भी रख सकता था, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता और वैश्विक व्यापार वृद्धि के अनुमान से दोगुने से भी अधिक होता। लेकिन सरकार ने इससे आगे बढ़कर 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य चुना, क्योंकि देश की क्षमता और वैश्विक मांग को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह बयान केवल आंकड़ों का दावा नहीं है, बल्कि एक नीतिगत रुख है — भारत अब वैश्विक व्यापार में छोटी भूमिका से संतुष्ट नहीं है, वह एक प्रमुख व्यापारिक शक्ति के रूप में अपनी जगह बनाना चाहता है।
छह महीने के आंकड़े क्या बताते हैं
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच भारत का निर्यात 480 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक है। इसका अर्थ है कि वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में ही लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा हासिल कर लिया गया है। बाकी छह महीनों में 520 अरब डॉलर का निर्यात करना होगा, जो पहली छमाही से कुछ अधिक है, लेकिन मंत्री ने भरोसा जताया कि यह अंतर पाटा जा सकता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि अक्टूबर महीना भी निर्यात के लिहाज से अच्छा रहा है, हालांकि अक्टूबर के आधिकारिक आंकड़े नवंबर के मध्य में जारी किए जाएंगे। इसलिए अक्टूबर के प्रदर्शन के बारे में अभी कोई अंतिम आंकड़ा देना जल्दबाजी होगी। लेकिन पहली छमाही की गति और अक्टूबर के शुरुआती संकेतों को देखते हुए सरकार का मानना है कि लक्ष्य की दिशा सही है। आंकड़ों की व्याख्या में यह सावधानी जरूरी है कि 480 अरब डॉलर का आंकड़ा वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात का है, न कि केवल वस्तुओं का।

900 अरब बनाम 1 ट्रिलियन: महत्वाकांक्षी लक्ष्य क्यों
मंत्री के भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लक्ष्य तय करने की मानसिकता से जुड़ा था। उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या वे सामान्य लक्ष्य लेकर संतुष्ट रहना चाहते हैं या बड़े सपने देखना चाहते हैं। उनका कहना था कि परिवर्तन केवल नीतियों से नहीं आता, बल्कि सोचने, काम करने और जीने के तरीके में बदलाव से आता है। यही वजह है कि सरकार ने 900 अरब डॉलर के सुरक्षित लक्ष्य के बजाय 1 ट्रिलियन डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य चुना।
इस तर्क के पीछे भारत की आंतरिक ताकतों का हवाला दिया गया — प्रतिभाशाली युवा आबादी, 30 वर्ष से कम की औसत आयु, लोकतांत्रिक व्यवस्था, निर्णायक नेतृत्व और 140 करोड़ लोगों की गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की मांग। मंत्री ने कहा कि ये सभी कारक मिलकर भारत की विकास कहानी को गति दे रहे हैं। उन्होंने विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार लगभग 50 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी से बाहर निकल चुके हैं और कड़ी मेहनत से अपने जीवन को बेहतर बनाने में लगे हैं।
डेयरी और जीएम उत्पादों पर भारत की स्पष्ट रेखा
व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में मंत्री ने दो संवेदनशील क्षेत्रों पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत ने आज तक किसी भी मुक्त व्यापार समझौते में डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला है और भविष्य में भी इसे नहीं खोलेगा। इसी तरह, भारत ने कभी भी आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी है और यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों में किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। डेयरी उत्पादों के प्रमाणन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत यह सुनिश्चित करता है कि खाद्य उत्पादों की सामग्री और निर्माण प्रक्रिया धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाए। उन्होंने पनीर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पशु-जनित रेनेट का उदाहरण दिया, जो पारंपरिक रूप से युवा बछड़ों के पेट की परत से प्राप्त एंजाइम होता है। इस तरह की संवेदनशीलताओं को व्यापार वार्ता में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
किन क्षेत्रों को मिलेगी तरजीही पहुंच
मंत्री ने बताया कि भारत अपने प्रमुख निर्यात क्षेत्रों के लिए तरजीही बाजार पहुंच हासिल करने की दिशा में आक्रामक रूप से काम कर रहा है। इन क्षेत्रों में वस्त्र, औषधि, जूते, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और कृषि उत्पाद शामिल हैं। उद्देश्य यह है कि भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला शुल्क प्रतिस्पर्धी देशों — जैसे इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और फिलीपींस — की तुलना में कम हो, ताकि भारतीय निर्यातकों को बढ़त मिले।
उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है, क्योंकि औषधि क्षेत्र में उसकी ताकत वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है। इसी तरह वस्त्र, समुद्री उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में भी भारत की मजबूत क्षमता है। व्यापार वार्ता में भारत की रणनीति दोतरफा है — एक ओर उन क्षेत्रों में अवसर तलाशना जहां भारत मजबूत है, दूसरी ओर संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करना। मंत्री ने कहा कि लगभग हर क्षेत्र का देश भारत के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है, क्योंकि भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखा जाता है।
दुनिया का भरोसा क्यों बढ़ा: युवा, प्रतिभा और संकट में मदद
मंत्री ने कहा कि भारत ने दुनिया का भरोसा अर्जित किया है। उन्होंने इसका श्रेय देश की प्रतिभा, युवाओं की मेहनत, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संकट के समय दूसरे देशों की मदद करने की परंपरा को दिया। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने दुनिया को टीके उपलब्ध कराए, जबकि देश के हर नागरिक को मुफ्त टीकाकरण सुनिश्चित किया गया। इसके अलावा, संकट के समय दवाओं, राहत सामग्री और पुनर्वास सहायता के माध्यम से भी भारत ने दूसरे देशों का साथ दिया, चाहे वे विकसित देश हों या विकासशील।
उनका कहना था कि दुनिया भारत की प्रतिभा को देखती है, उसकी क्षमताओं को समझती है और कठिन समय में भारत द्वारा की गई मदद को याद रखती है। यही वजह है कि आज भारत को एक भरोसेमंद साझेदार माना जाता है। यह भरोसा केवल व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की वैश्विक छवि और कूटनीतिक स्थिति को भी मजबूत करता है। मंत्री ने यह भी कहा कि भारत अब उन पांच कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से बहुत आगे निकल चुका है, जिसमें कभी उसे गिना जाता था, और आज वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
युवाओं के लिए संदेश: 2047 तक विकसित भारत
भाषण का एक बड़ा हिस्सा युवाओं को समर्पित था। मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य 2047 तक हासिल करना है, और आज के छात्र ही इस यात्रा के निर्माता होंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे लगातार खुद को नए सिरे से गढ़ें, बदलती परिस्थितियों के अनुकूल बनें और जीवनभर सीखते रहें। शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कॉलेज केवल शैक्षणिक ज्ञान नहीं देते, बल्कि चरित्र, लचीलापन, आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत की इच्छा भी विकसित करते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि अब छात्र पाठ्यक्रम बदल सकते हैं, अपने शैक्षणिक कार्य के लिए क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं और एक धारा से दूसरी धारा में जा सकते हैं। डिजिटल संपर्क के बारे में उन्होंने कहा कि भारत में 1.1 अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिनके पास दुनिया भर के ज्ञान और अनुभवों तक पहुंच है। यह युवाओं के लिए सीखने, विकसित होने और देश के विकास में योगदान देने का एक बड़ा अवसर है। उन्होंने छात्रों से अनुशासन बनाए रखने, संस्थागत परंपराओं का सम्मान करने और आत्मविश्वास व साहस के साथ बड़े लक्ष्य अपनाने का आह्वान किया।
आगे क्या: अक्टूबर के आंकड़े और बाकी छह महीने की चुनौती
आगे की राह में दो बातें महत्वपूर्ण होंगी। पहली, नवंबर के मध्य में जारी होने वाले अक्टूबर के आधिकारिक निर्यात आंकड़े, जो बताएंगे कि दूसरी छमाही की शुरुआत कितनी मजबूत रही है। दूसरी, बाकी छह महीनों में 520 अरब डॉलर का निर्यात हासिल करना, जिसके लिए वैश्विक मांग, व्यापार समझौतों की प्रगति और घरेलू उत्पादन क्षमता तीनों का साथ देना जरूरी होगा।
मंत्री ने आत्मनिर्भरता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति प्रभावित होती है तो भारत घरेलू निर्माण के विकल्प तलाशेगा, जैसा कि दुर्लभ खनिजों की पहुंच सीमित होने पर किया गया था। इसके अलावा, विमानन और पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए विमान निर्माताओं के साथ संपर्क बढ़ाया जा रहा है। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और नियमित रोजगार के अवसर पैदा करना भी सरकार की प्राथमिकता है, और छात्रों को उद्यमिता व स्टार्टअप के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कुल मिलाकर, दिल्ली में दिया गया यह संदेश एक संतुलित व्यापार नीति का चित्र प्रस्तुत करता है — वैश्विक बाजारों में आक्रामक पहुंच, घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों की दृढ़ सुरक्षा, और युवाओं पर आधारित दीर्घकालिक विकास की दृष्टि। 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन पहली छमाही के आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य केवल कागज पर नहीं, बल्कि ठोस प्रगति पर आधारित है। अब सबकी नजर नवंबर के मध्य में आने वाले अक्टूबर के आंकड़ों और बाकी छह महीनों के प्रदर्शन पर रहेगी।
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