भोपाल ब्यूरो
सार: भोपाल के भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के परेड ग्राउंड पर मंगलवार, 3 नवंबर को 44वें और 45वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों का दीक्षांत समारोह हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परेड की सलामी ली और निरीक्षण किया। इस परेड के साथ प्रदेश को 48 नए उप पुलिस अधीक्षक मिले हैं, जिनमें 20 महिला अधिकारी भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने नए अधिकारियों से कहा कि वे रील बनाने से ज्यादा लोगों की असली समस्याएं सुलझाने पर ध्यान दें, और 2029 तक प्रदेश से ड्रग्स की समस्या खत्म करने में निर्णायक भूमिका निभाएं।
मध्यप्रदेश पुलिस के लिए 3 नवंबर का दिन खास रहा, क्योंकि एक ही परेड ग्राउंड से दो बैचों के अधिकारी एक साथ मैदान में उतरे। सुबह साढ़े नौ बजे शुरू हुए दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। परेड की सलामी और निरीक्षण के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को शील्ड और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने नए अधिकारियों को संबोधित किया और उनके सामने आने वाली चुनौतियों, सरकार की अपेक्षाओं और पुलिस की बदलती भूमिका पर विस्तार से बात की। इस खबर में परेड का पूरा घटनाक्रम, नए बैच की संरचना, मुख्यमंत्री के संदेश, अकादमी के लिए की गई घोषणाओं और आगे की राह के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
परेड ग्राउंड पर क्या हुआ
मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी के परेड ग्राउंड पर मंगलवार सुबह 44वें और 45वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों का संयुक्त दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने परेड की सलामी ली और परेड का निरीक्षण किया। प्रशिक्षण पूरा कर चुके अधिकारियों की टुकड़ियों ने परेड ग्राउंड पर अनुशासन और तालमेल का प्रदर्शन किया।
समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को शील्ड और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह सम्मान उन अधिकारियों के प्रशिक्षण के दौरान किए गए प्रदर्शन के आधार पर दिया गया। मुख्यमंत्री ने सभी 48 नए अधिकारियों को बधाई दी और कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और पुलिस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रदेश को 48 नए जनसेवक मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये युवा अधिकारी राज्य की सेवा के लिए खुद को तत्पर कर रहे हैं और साढ़े आठ करोड़ जनता की सुरक्षा का दायित्व संभालने जा रहे हैं।
48 अधिकारियों का बैच: कौन-कौन शामिल

इस दीक्षांत परेड से कुल 48 उप पुलिस अधीक्षक मैदान में उतरे हैं। इनमें 20 महिला अधिकारी और 28 पुरुष अधिकारी शामिल हैं। संवर्ग के हिसाब से देखें तो जिला पुलिस बल के 37 अधिकारी, रेडियो संवर्ग के 9 अधिकारी और जिला सेनानी होमगार्ड के 2 अधिकारी इस बैच का हिस्सा हैं।
यह पहला अवसर है, जब अकादमी में रेडियो संवर्ग के डीएसपी स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने इस बात पर विशेष रूप से ध्यान दिलाया कि ये अधिकारी पुलिस की तकनीकी क्षमता और साइबर अपराध से लड़ाई को मजबूती देंगे। इस बैच में 22 अधिकारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आते हैं, जो तकनीकी चुनौतियों से निपटने में पुलिस की क्षमता बढ़ा सकते हैं।
वर्ष 2014 से डीएसपी स्तर के अधिकारियों का प्रशिक्षण भोपाल स्थित भौंरी अकादमी में कराया जा रहा है। तब से यह अकादमी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की बुनियादी प्रशिक्षण की प्रमुख संस्था बनी हुई है। दीक्षांत के बाद सभी 48 अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों और इकाइयों में अपनी सेवाएं देंगे, जहां उन्हें कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और जनसुरक्षा से जुड़े दायित्व संभालने होंगे।
मुख्यमंत्री का संदेश: रील नहीं, रियल प्रॉब्लम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए अधिकारियों को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया के दौर में पुलिस की भूमिका पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज का समय सोशल मीडिया का है, लेकिन पुलिस के सामने सोशल मीडिया से ज्यादा सामाजिक मुद्दे हैं। अधिकारियों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना चाहिए, लेकिन साथ ही जमीन पर लोगों की समस्याओं को भी हल करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए अधिकारियों को समस्याओं के बजाय उनके समाधान पर ध्यान लगाना चाहिए। रील बनाने से ज्यादा रियल प्रॉब्लम सुलझाने में ध्यान लगाएं, यही उनका स्पष्ट संदेश था। उन्होंने कहा कि राज्य को ऐसे अधिकारियों की अपेक्षा है, जो लोकप्रियता के बजाय समस्या के समाधान की तरफ ठोस कदम उठाएं और जिनका सम्मान समाज के सभी वर्गों में समान रूप से हो।
कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता पर भी मुख्यमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि नए अधिकारी कमजोर वर्ग के लिए सहारा बनें। अपने संबोधन में उन्होंने जीवन और कर्तव्य के बारे में भी बात की और कहा कि जीवन ऐसा बनाना चाहिए कि वह गौरव से भरा हो। कर्तव्य के मार्ग पर गंभीरता से चलने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि परेड में अधिकारियों ने जो विश्वास और उत्साह दिखाया है, वह फील्ड में भी बना रहना चाहिए।
डाकुओं और नक्सलवाद के बाद अब ड्रग्स की चुनौती
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मध्यप्रदेश पुलिस के गौरवशाली अतीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद राज्य लंबे समय तक डाकुओं की चुनौती से जूझता रहा। चंबल अंचल हो या रीवा अंचल, पुलिस ने इन चुनौतियों का सफलता से सामना किया और डाकुओं का उन्मूलन किया। पुलिस ने नई पीढ़ी को इस पुरानी बीमारी से मुक्ति दिलाई।
इसके बाद उन्होंने नक्सलवाद का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी यह कल्पना करना कठिन था कि प्रदेश से नक्सलवाद का संकट खत्म होगा, क्योंकि नक्सलियों की वजह से आदिवासी अंचलों में विकास ठप हो गया था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से यह लक्ष्य निर्धारित समय सीमा से पहले हासिल कर लिया गया। मध्यप्रदेश ने समय सीमा से पहले नक्सलियों का सफाया कर अपनी दक्षता साबित की।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने अगली बड़ी चुनौती के रूप में ड्रग्स का नाम लिया। उन्होंने कहा कि डाकुओं और नक्सलवाद की चुनौती के बाद अब पुलिस को ड्रग्स की चुनौती खत्म करनी है। वर्ष 2029 तक ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि नए अधिकारियों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पुलिस महानिदेशक ने भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश को 2029 तक नशा मुक्त करने का संकल्प लिया है।
अकादमी के लिए 12 करोड़ की घोषणाएं और 63 प्रमोशन
दीक्षांत समारोह के मंच से मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण अकादमी के विकास के लिए भी घोषणाएं कीं। उन्होंने अकादमी में 12 करोड़ रुपये की लागत से ऑडिटोरियम बनाने, विद्युत सब स्टेशन स्थापित करने और 1 किलोमीटर का एप्रोच रोड बनाने की घोषणा की। इन सुविधाओं से अकादमी में प्रशिक्षण और आवासीय व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियान में लगे 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की बात भी दोहराई। उन्होंने कहा कि बहादुर जवानों के साहस की सराहना करना सरकार का दायित्व है और सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ बलिदानियों के योगदान को सदैव स्मरण रखेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बल पर राज्य सरकार अपने उद्देश्यों की पूर्ति करेगी।
पुलिस विभाग में भर्ती और पदोन्नति का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले तीन साल में 17 हजार 710 पदों पर भर्ती की है। कुल 22 हजार 500 पदों पर भर्ती का लक्ष्य रखा गया है और नव नियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों का प्रशिक्षण निरंतर जारी है। पुलिस विभाग को पदोन्नति से भी लाभान्वित किया गया है, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उत्साह का वातावरण बना है।
डीजीपी का संदेश: साइबर अपराध और नशा दो बड़ी चुनौतियां
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने समारोह में कहा कि वर्दीधारी सेवाओं में पासिंग आउट परेड जीवन भर स्मृति में रहती है। उन्होंने नए अधिकारियों को सलाह दी कि फील्ड में तैनात अधिकारियों के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें, क्योंकि ड्यूटी के साथ अपनी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
डीजीपी ने युवा पीढ़ी के बीच नशे के बढ़ते चलन को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने नशे से दूरी है जरूरी अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की है। इसके अलावा साइबर अपराध को भी उन्होंने बड़ी चुनौती के रूप में चिह्नित किया। जन जागरूकता के लिए सेफ क्लिक अभियान चलाया जा रहा है और साइबर क्षमता निर्माण की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया।
साइबर क्षमता निर्माण के तहत साइबर थाने, साइबर हेल्प डेस्क, साइबर फॉरेंसिक और साइबर हेल्पलाइन की स्थापना से आम नागरिकों को राहत मिलने की बात कही गई। नए बैच में रेडियो संवर्ग और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के अधिकारियों की मौजूदगी को इसी दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि तकनीकी जांच और डिजिटल अपराधों से निपटने में उनकी भूमिका अहम होगी।
प्रशिक्षण से फील्ड तक: नए अधिकारियों के सामने क्या
दीक्षांत परेड किसी अधिकारी के करियर की शुरुआत भर होती है। असली परीक्षा फील्ड में होती है, जहां रोजमर्रा की कानून-व्यवस्था, अपराध की रोकथाम, शिकायतों का निपटारा, भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटना होता है। नए उप पुलिस अधीक्षकों को अनुमंडल स्तर पर थानों की निगरानी, जांच की गुणवत्ता और जनता से संवाद की जिम्मेदारी मिलेगी।
त्योहारों और बड़े आयोजनों के समय पुलिस की भूमिका और बढ़ जाती है। भीड़भाड़ वाले बाजार, धार्मिक आयोजन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना, यातायात सुचारू रखना और अफवाहों पर रोक लगाना भी पुलिस के काम का हिस्सा है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह संदेश कि अधिकारी समाधान पर ध्यान दें, फील्ड में सीधे लागू होता है। जनता थाने में शिकायत लेकर आती है तो उसे त्वरित, निष्पक्ष और मानवीय व्यवहार की अपेक्षा होती है।
नए अधिकारियों के लिए यह भी चुनौती होगी कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाओं से निपटें, साइबर ठगी के शिकार लोगों की मदद करें और नशे के कारोबार पर लगाम लगाएं। अवैध शराब के तंत्र को ध्वस्त करने का आह्वान भी मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में किया और पुलिस महानिदेशक से कहा कि प्रदेशभर में शराब माफियाओं के विरुद्ध निडर होकर कठोर कार्रवाई की जाए।
आगे क्या
दीक्षांत के बाद 48 नए उप पुलिस अधीक्षक प्रदेश की सेवा में तैनात होंगे। उनके कामकाज का आकलन आने वाले महीनों में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, साइबर अपराधों की रोकथाम और नशे के खिलाफ कार्रवाई के आधार पर होगा। अकादमी के लिए घोषित 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का क्रियान्वयन भी आने वाले समय में देखा जाएगा।
2029 तक नशा मुक्ति का लक्ष्य एक लंबी लड़ाई है, जिसमें पुलिस के साथ-साथ समाज, परिवार, शिक्षण संस्थान और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी होगी। नए अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे केवल कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि जागरूकता और रोकथाम के काम को भी आगे बढ़ाएं। भौंरी अकादमी से निकला यह बैच अगर मुख्यमंत्री के बताए मंत्र पर चलेगा, तो जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
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