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दिल्ली की हवा सीजन में पहली बार ‘खराब’ श्रेणी में, GRAP-1 लागू; 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान

धुंध और स्मॉग से ढकी दिल्ली की इमारतें, वायु प्रदूषण का सांकेतिक चित्र (सांकेतिक चित्र)

दिल्ली ब्यूरो

राजधानी दिल्ली में सर्दी की दस्तक के साथ जहरीली हवा का सीजन भी शुरू हो गया है। दशहरे के ठीक बाद दिल्ली की हवा इस सीजन में पहली बार ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज हुई है और इसके साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से सख्त विंटर एक्शन प्लान लागू करने की तैयारी भी पूरी कर ली है, जिसमें ‘नो PUC-नो फ्यूल’ नीति, निर्माण कार्यों पर रोक और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं।

सीजन में पहली बार ‘खराब’ श्रेणी में पहुँचा AQI

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बुधवार 21 अक्टूबर की सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 227 तक पहुँच गया, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ‘खराब’ श्रेणी (201 से 300) में आता है। शहर के 59 निगरानी केंद्रों में से 56 के आंकड़ों में प्रदूषण की व्यापकता दिखी — जहांगीरपुरी में AQI 308 और पूसा में 314 दर्ज हुआ, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी के करीब है, जबकि आनंद विहार समेत 16 केंद्र ‘मध्यम’ श्रेणी में बने रहे।

CAQM के अनुसार 20 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 179 (मध्यम श्रेणी) था, जो 21 अक्टूबर को 2 बजे तक 244 और शाम 4 बजे तक 245 पर जा पहुँचा। इस तरह एक ही दिन में करीब 59 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई। जुलाई के मध्य के बाद यह पहली बार है जब शहर का समग्र AQI 200 का आंकड़ा पार कर गया। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर के अन्य शहर भी ‘खराब’ श्रेणी में पहुँच गए — गुरुग्राम में AQI 216 और नोएडा में 249 दर्ज किया गया।

अचानक गिरावट के पीछे क्या कारण

वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली ने इस गिरावट का पूर्वानुमान पहले ही दे दिया था, और इसके पीछे कई कारण एक साथ जुड़े हैं। दशहरे के पुतला दहन से उत्सर्जन, प्रतिकूल मौसमी दशाएँ, धीमी हवाएँ और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं ने मिलकर हवा को बिगाड़ा है।

उपग्रह आंकड़ों के अनुसार, नासा के उपग्रह ने 18 से 20 अक्टूबर के बीच पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की 182 घटनाएँ दर्ज कीं। इस अक्टूबर में अब तक कुल 397 पराली की घटनाएँ सामने आई हैं, जो पिछले साल इसी अवधि के 523 से कम हैं, लेकिन फिर भी हवा पर असर डाल रही हैं। गौरतलब है कि उपग्रह शाम 4 बजे के बाद की घटनाएँ दर्ज नहीं करता, जबकि किसान अकसर इसी समय पराली जलाते हैं, ताकि उपग्रह की नजर से बचे रहें।

मौसम विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसार हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम बनी हुई है और रात का तापमान गिर रहा है, जिससे प्रदूषक तत्व जमीन के पास ही ठहर जाते हैं। पूर्वानुमान है कि हवा 28 अक्टूबर तक ‘खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है।

GRAP-1 में लागू पाबंदियाँ

AQI के ‘खराब’ श्रेणी में पहुँचते ही CAQM ने GRAP के चरण-1 की पाबंदियाँ दिल्ली-एनसीआर में लागू कर दी हैं। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार दोपहर को इसकी पुष्टि की। पहले चरण में आमतौर पर निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय, खुले में कचरा जलाने पर रोक, कचरे के उचित निपटान और सड़कों की नियमित सफाई जैसे कदम उठाए जाते हैं। CAQM ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण और बढ़ने पर GRAP के अगले चरण भी लागू किए जा सकते हैं।

1 नवंबर से लागू होगा विंटर एक्शन प्लान

दिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में इस सर्दी के लिए विशेष विंटर एक्शन प्लान तैयार किया है, जो 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

सबसे कड़ा कदम ‘नो PUC-नो फ्यूल’ नीति है — बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों को शहर के 500 पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा। दिल्ली से बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों को राजधानी में प्रवेश से रोक दिया जाएगा। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दो महीने तक धूल फैलाने वाले विध्वंस और बाहरी निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। कार्यालयों के लिए अलग-अलग समय पर काम शुरू करने की व्यवस्था और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाएगा, जबकि सर्दियों में पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा। निर्माण स्थलों की निगरानी AI-सक्षम कैमरों से की जाएगी, जो सीधे सरकार के केंद्रीय नियंत्रण केंद्र से जुड़े होंगे। साथ ही इलेक्ट्रिक बसों, मेट्रो सेवाओं और अंतिम छोर की कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाएगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सलाह दी है कि वे लंबे समय तक खुले में गतिविधियाँ सीमित रखें, खासकर सुबह के घंटों में जब प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है। ‘खराब’ श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं।

आगे क्या

दिल्ली में हर सर्दी में प्रदूषण का संकट गहराता है और इस बार पराली जलाने का पीक सीजन अभी सामने है। एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट दिवाली पर पटाखों के लिए तय समय सीमा पर विचार कर रहा है — न तो पूर्ण प्रतिबंध और न ही पूरे दिन की अनुमति, बल्कि निश्चित समय-सीमा वाला मध्यम मार्ग अपनाने पर विचार हो रहा है। आने वाले दिनों में हवा की दिशा और पराली की घटनाओं पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि यही तय करेगा कि GRAP के अगले चरण कब लागू होंगे।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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