नई दिल्ली ब्यूरो। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने और उसे नए नाम के साथ आगे बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अब यह कार्यक्रम ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ के नाम से जाना जाएगा। सरकार ने इसके लिए 2026-27 से 2030-31 तक कुल 53,428 करोड़ रुपये के परिव्यय को स्वीकृति दी है। इस फैसले से देश के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिलने का अनुमान है।
बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि योजना और उसकी उप-योजनाओं का पुनर्नामकरण किया गया है। साथ ही दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता, कवरेज और सहायता राशि में भी अहम बदलाव किए गए हैं। वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना को मौजूदा स्वरूप में ही जारी रखा जाएगा।
1995 से चल रही योजना का नया नाम
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी। इसका मकसद गरीब परिवारों को सहायता देना था, ताकि केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित राज्य के नीति निदेशक तत्वों के प्रति अपना दायित्व निभा सके। अनुच्छेद 41 राज्य को अपनी आर्थिक सामर्थ्य की सीमाओं के भीतर बेरोजगारी, बुढ़ापा, बीमारी और अशक्तता की स्थिति में लोक सहायता के प्रभावी उपाय करने का निर्देश देता है।
इस कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत केंद्रीय सहायता दी जाती है, ताकि देश में हर जगह लाभार्थियों को सहायता एक समान रूप से उपलब्ध हो सके। इसका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जाता है। तीन दशक से अधिक समय से यह कार्यक्रम देश के सामाजिक सुरक्षा तंत्र की रीढ़ बना हुआ है। अब नए नाम के साथ इसे अगले पांच साल के लिए वित्तीय मंजूरी दी गई है।
उप-योजनाओं के भी बदले नाम
कैबिनेट के फैसले में सिर्फ मुख्य कार्यक्रम का ही नहीं, बल्कि उसकी सभी उप-योजनाओं का भी पुनर्नामकरण किया गया है। अब इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना को ‘प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना’ के नाम से जाना जाएगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना अब ‘प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना’ होगी। इसी तरह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना का नया नाम ‘प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना’ होगा, जबकि राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना अब ‘प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना’ कहलाएगी।
सरकार ने साफ किया है कि वृद्धजन पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना को मौजूदा स्वरूप में ही जारी रखा जाएगा। इनमें कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं किया गया है। सबसे बड़े बदलाव दिव्यांगजन पेंशन में किए गए हैं, जिनका सीधा असर लाखों लाभार्थियों पर पड़ेगा।
दिव्यांगजन पेंशन में तीन बड़े बदलाव
दिव्यांगजन पेंशन में पहला बड़ा बदलाव पात्रता की शर्त में किया गया है। अब तक इस पेंशन के लिए कम से कम 80 प्रतिशत दिव्यांगता की शर्त थी। अब इसे घटाकर 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्ति भी इस पेंशन के लिए पात्र होंगे। सरकार का कहना है कि इससे पहले जो लोग पात्रता की ऊंची शर्त के कारण इस योजना से बाहर रह जाते थे, उन्हें भी अब लाभ मिल सकेगा।
दूसरा बदलाव न्यूनतम आयु की शर्त में है। पहले दिव्यांगता पेंशन सिर्फ 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को ही मिलती थी। अब न्यूनतम आयु की शर्त को समाप्त कर दिया गया है। अब दिव्यांगता पेंशन जन्म से ही मिल सकेगी। इससे बचपन से ही दिव्यांगता का सामना कर रहे बच्चों और उनके परिवारों को भी सहायता मिलेगी।
तीसरा बदलाव सहायता राशि में है। पहले 18 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लिए मासिक पेंशन 300 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 375 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लिए पेंशन 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये कर दी गई है। यह करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। सरकार का कहना है कि दिव्यांगजनों की सहायता राशि अन्य समान श्रेणियों की योजनाओं की तुलना में हमेशा 25 प्रतिशत अधिक रखने का प्रावधान दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप है।
कवरेज 8.33 लाख से बढ़कर 27 लाख तक
इन बदलावों का सबसे बड़ा असर कवरेज पर पड़ेगा। सरकार के अनुसार, पहले दिव्यांगजन पेंशन का लाभ करीब 8.33 लाख लोगों को मिल रहा था। नए नियमों के बाद करीब 27 लाख लोग इस पेंशन का लाभ उठा सकेंगे। यानी लाभार्थियों की संख्या तीन गुना से भी अधिक हो जाएगी।
कुल मिलाकर पूरे कार्यक्रम से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसमें बुजुर्ग, विधवा, दिव्यांगजन और शोक संतप्त परिवार शामिल हैं। सरकार का कहना है कि पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता दर में बदलाव से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाएंगे। तब तक मौजूदा व्यवस्था के तहत ही लाभ मिलता रहेगा।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम से तालमेल
सरकार ने बताया कि दिव्यांगता पेंशन की पात्रता में बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के कारण आवश्यक हो गया था। इस अधिनियम ने पात्रता को 40 प्रतिशत की बेंचमार्क दिव्यांगता से जोड़ दिया है। इसके साथ ही अधिनियम यह भी कहता है कि दिव्यांगता से जुड़ी सहायता अन्य श्रेणियों के लिए चलाई जा रही समान स्थिति वाली योजनाओं की तुलना में हमेशा 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए। कैबिनेट के ताजा फैसले को इसी कानूनी ढांचे के अनुरूप बताया जा रहा है।
किसे क्या फायदा होगा
इस फैसले का सीधा फायदा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और परिवार के कमाऊ सदस्य को खो चुके परिवारों को होगा। दिव्यांगता की शर्त 40 प्रतिशत होने से उन लोगों को भी पेंशन मिलेगी, जो पहले 80 प्रतिशत की शर्त के कारण बाहर रह जाते थे। जन्म से पात्रता मिलने से दिव्यांग बच्चों के परिवारों को शुरुआती वर्षों से ही आर्थिक सहारा मिलेगा। सहायता राशि में बढ़ोतरी से मासिक मदद थोड़ी और मजबूत होगी, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई के हिसाब से यह राशि अभी भी मामूली है।
आगे की प्रक्रिया
सरकार ने कहा है कि पात्रता मानदंड, लाभार्थियों की संख्या और सहायता दर में बदलाव से जुड़े दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी किए जाएंगे। इसके बाद ही नए नियम पूरी तरह लागू होंगे। जो लोग पहले से इस योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें अपनी पेंशन के लिए किसी तरह की नई प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत के बारे में स्थानीय प्रशासन से जानकारी लेनी चाहिए। नए आवेदकों को भी अपने जिले के ग्रामीण विकास या समाज कल्याण विभाग से पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए।
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