नमस्कार प्रिय Followers
आज हमारी चर्चा कुंभ और मीन लगन के कारक और मारक ग्रह पर होगी।
1. कुंभ लग्न:
कुंभ लगन की कुंडली में सबसे पहले योगकारक ग्रह शनि होते हैं, क्योंकि वह लग्नेश होते हैं। इस लगन में दूसरे पूर्ण योगकारक ग्रह शुक्र होते हैं — वह चतुर्थ और नवम भाव के स्वामी होते हैं, अर्थात उनकी एक राशि केंद्र में और दूसरी त्रिकोण में होती है।
कुंभ लगन की कुंडली में तीसरे योगकारक ग्रह बुध होते हैं। यह पंचमेश होते हैं। यद्यपि इनकी एक राशि अष्टम में होती है, किन्तु इनको मारक या अकारक का दोष नहीं लगता।
कुंभ लगन की कुंडली में मारक ग्रह —
इस कुंडली में सूर्य और देव गुरु मारक होते हैं। मंगल सम होते हैं, क्योंकि यहां यह तृतीय और दशम भाव के स्वामी होते हैं। सूर्य और चन्द्रमा को अष्टमेश का दोष नहीं लगता।
2. मीन लग्न:
मीन लगन की कुंडली में देव गुरु स्वयं लग्नेश होते हैं, अतः वह योगकारक होते हैं। मीन लगन में दूसरे कारक ग्रह मंगल होते हैं — वह द्वितीयेश और नवमेश होते हैं। इस कुंडली में अगले योगकारक ग्रह चन्द्रमा होते हैं — वह पंचमेश होते हैं।
मीन लगन में मारक ग्रह —
मीन लगन में मारक ग्रह शनि होते हैं। मीन लगन में अगले मारक ग्रह शुक्र होते हैं — इस कुंडली में यह तृतीय भाव और अष्टम भाव के स्वामी होते हैं। बुध इस कुंडली में मारक और बाधक दोनों ही होते हैं, क्योंकि यह द्वि-स्वभाव लग्न है।
इस प्रकार कारक और मारक ग्रह की चर्चा आज समाप्त होती है।
अगली पोस्ट में फिर से किसी नये विषय पर चर्चा आरंभ करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
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