इंदौर ब्यूरो।
क्या है पूरा मामला
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान जानकारी प्राप्त हुई कि केंद्र पर पंजीकृत चिकित्सक डॉ. जफर खान द्वारा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना केंद्र को अल्ट्रा सोनोग्राफी मशीन सहित अन्य व्यक्ति को विक्रय कर दिया गया है। इस संबंध में पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम के उल्लंघन की जानकारी कलेक्टर श्री शिवम वर्मा को दी गई।
कलेक्टर के निर्देश पर सीलिंग की कार्रवाई
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के निर्देश पर आज डॉ. दिव्यानी अहिरवार, जोनल अधिकारी एवं श्रीमती दीपमाला बामने, पर्यवेक्षण दल सदस्य द्वारा केंद्र को सील करने की कार्रवाई की गई। साथ ही संबंधित संचालक/चिकित्सक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई के दौरान केंद्र की अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन को विधिवत सील किया गया।
क्या है PCPNDT अधिनियम
पी.सी.पी.एन.डी.टी. (प्रसव-पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम का उद्देश्य गर्भ में लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना है। इस अधिनियम के तहत अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन का पंजीकरण, उसका स्थानांतरण और बिक्री सभी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं की जा सकती। नियमों के अनुसार पंजीकृत चिकित्सक द्वारा मशीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेचना या केंद्र का हस्तांतरण करना गंभीर उल्लंघन माना जाता है, जिस पर मशीन सील करने के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई का भी प्रावधान है।
क्यों अहम है यह कार्रवाई
इंदौर में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों और लिंग जांच के खिलाफ प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा पहले भी त्योहारी सीजन में नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। न्यू बोर्न केयर सेंटर जैसे प्रतिष्ठानों पर की गई यह कार्रवाई अन्य संचालकों के लिए स्पष्ट संदेश है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उल्लंघन पर क्या सजा का प्रावधान
पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम के तहत पहली बार उल्लंघन पर तीन साल तक की कैद और दस हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा उल्लंघन करने पर पांच साल तक की कैद और पचास हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा दोषी चिकित्सक का पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है। मशीन को बिना अनुमति बेचना या हस्तांतरित करना अधिनियम की धारा के तहत दंडनीय अपराध है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेता है।
जिले में चल रहा सघन अभियान
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान मशीनों का पंजीकरण, संचालन करने वाले चिकित्सक की योग्यता, रिकॉर्ड संधारण और फॉर्म-एफ के भरे जाने की जांच की जाती है। नियमों का पालन न करने वाले केंद्रों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा।
आगे क्या
संबंधित संचालक और चिकित्सक को नोटिस जारी किया जा रहा है। नोटिस का जवाब आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर मशीन की जब्ती, पंजीकरण निरस्तीकरण और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने तक की कार्रवाई संभव है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच जारी रहेगी।
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