इंदौर ब्यूरो।
इंदौर के चिराग सेन मौत मामले में परिवार ने न्याय न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मृतक के भाई ऋतिक सेन का आरोप है कि पुलिस को सबूत देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का दावा है कि चिराग प्रताड़ना से परेशान था और युवती से फोन पर उसकी बातचीत भी हुई थी। 18 अक्टूबर को जहरीला पदार्थ खाने के बाद चिराग को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
आंदोलन की चेतावनी
परिजनों का कहना है कि मामले में संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, अन्यथा वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ‘जस्टिस फॉर चिराग सेन (लाला)’ लिखे पोस्टर लेकर परिजन और समर्थक सड़कों पर उतरे।
भाई का आरोप — सबूत दिए, कार्रवाई नहीं
मृतक के भाई ऋतिक सेन का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को मामले से जुड़े सबूत सौंपे थे, इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। परिवार का कहना है कि चिराग लंबे समय से प्रताड़ना से परेशान था और घटना से पहले युवती से फोन पर उसकी बातचीत हुई थी। परिजनों की मांग है कि इस बातचीत और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच हो।
क्या हुआ था 18 अक्टूबर को
बाणगंगा थाना प्रभारी सियाराम सिंह गुर्जर के अनुसार, वृंदावन कॉलोनी निवासी 23 वर्षीय चिराग सेन उर्फ लाला भजन मंडली में काम करता था। उसका भाजपा नेताओं से भी जुड़ाव बताया गया है। चिराग का बाणगंगा क्षेत्र में रहने वाली युवती के साथ करीब चार साल से प्रेम प्रसंग था। दोनों के बीच अक्सर विवाद होने की बात भी सामने आई है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, चिराग और युवती पिछले करीब पांच महीने से साथ रह रहे थे। रविवार 18 अक्टूबर को चिराग ने युवती को एक अन्य युवक के साथ गरबा खेलते हुए देख लिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद गुस्से में चिराग ने जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर एक दोस्त उसे अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन उपचार के दौरान सोमवार को उसकी मौत हो गई।
शव रखकर हुआ था प्रदर्शन
मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद स्वजन और दोस्तों ने शव चौराहे पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी चिराग की मौत के मामले में युवती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। उनके हाथों में ‘जस्टिस फॉर चिराग’ लिखे पोस्टर थे। करीब 200 लोगों के जुटने से इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। सूचना मिलने पर एसीपी रुबिना मिजवानी और टीआई सियाराम गुर्जर बल के साथ मौके पर पहुंचे और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त कराया था।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। एसीपी रुबिना मिजवानी ने प्रदर्शन के दौरान परिजनों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। युवती पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कौन था चिराग सेन
23 वर्षीय चिराग सेन उर्फ लाला इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र की वृंदावन कॉलोनी का रहने वाला था। वह भजन मंडली में काम करता था और स्थानीय भाजपा नेताओं से भी उसका जुड़ाव बताया गया है। इलाके में वह मिलनसार युवक के रूप में जाना जाता था। उसकी मौत के बाद से ही परिवार और दोस्त न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
आगे क्या
परिवार की आंदोलन की चेतावनी के बाद पुलिस पर मामले में तेजी से कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। परिजनों की मांग है कि युवती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच हो। पुलिस का कहना है कि जांच के हर पहलू को देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
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