इंदौर ब्यूरो
इंदौर। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और सहयोगी एजेंसियों ने बुधवार को देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आतंकी हमले से निपटने का छह घंटे का बड़ा मॉक ड्रिल आयोजित किया। ‘काउंटर टेररिस्ट मॉक एक्सरसाइज’ नाम के इस अभ्यास में पुराने टर्मिनल भवन पर आतंकी हमले और यात्रियों को बंधक बनाने का परिदृश्य तैयार किया गया था। सुबह 10:36 बजे शुरू हुआ अभ्यास शाम 4:30 बजे तक चला, जिसमें 367 जवानों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बंधकों को छुड़ाने का परिदृश्य, वायुसेना के विमान से उतरे कमांडो
ड्रिल के परिदृश्य के अनुसार, आतंकियों ने हवाई अड्डे के पुराने टर्मिनल भवन (गैर-परिचालन क्षेत्र) पर हमला कर अंदर मौजूद यात्रियों को बंधक बना लिया। सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आईं। सुबह करीब 11:30 बजे एनएसजी की टीम वायुसेना के विमान से इंदौर पहुंची। इसके बाद कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के साथ मिलकर लक्ष्य क्षेत्र की पहचान की गई और सुनियोजित तरीके से अभियान चलाकर बंधकों को छुड़ाया गया।
अभ्यास के दौरान पूरे हवाई अड्डा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। ड्रिल को यथासंभव वास्तविक परिस्थितियों के करीब रखा गया, ताकि किसी वास्तविक संकट की स्थिति में सभी एजेंसियों के बीच तालमेल परखा जा सके।
367 जवानों का संयक्त अभियान
इस मॉक ड्रिल में कुल 367 जवानों और कर्मियों ने भाग लिया। इनमें एनएसजी के 127, सीआईएसएफ के 142, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के 10, इंदौर पुलिस के 33, मप्र पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) के 12, सेना के पैरा कमांडो के 26, एएआई फायर के 8, राज्य बम निरोधक दस्ते (बीडीडीएस) के 7, चिकित्सा दल के 8, खुफिया ब्यूरो (आईबी) का 1 और जिला प्रशासन का 1 अधिकारी शामिल था।
इतनी बड़ी संख्या में विभिन्न एजेंसियों के एक साथ अभ्यास में उतरने से यह स्पष्ट हुआ कि हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठान पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बहु-एजेंसी समन्वय कितना महत्वपूर्ण है।
19 अक्टूबर को हुई थी तैयारी बैठक
इस ड्रिल की तैयारी सोमवार 19 अक्टूबर को ही शुरू हो गई थी। उस दिन इंदौर पुलिस आयुक्तालय में एनएसजी के अधिकारियों और इंदौर पुलिस के बीच योजना बैठक हुई थी। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया सहित वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में शामिल हुए। बैठक में ड्रिल के स्थानों को गोपनीय रखने का निर्णय लिया गया था।
एनएसजी देश के विभिन्न राज्यों में इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करती है। जानकारी के अनुसार इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में भी ऐसे अभ्यासों की योजना है, ताकि इस अंचल के संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तैयारियों को परखा जा सके।
क्यों जरूरी हैं ऐसे मॉक ड्रिल
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी वास्तविक आतंकी घटना की स्थिति में प्रतिक्रिया समय को कम करना और एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। हवाई अड्डे जैसे स्थानों पर हजारों यात्रियों की सुरक्षा दांव पर होती है, इसलिए यहां नियमित अभ्यास विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इस अभ्यास में बम निरोधक दस्ते ने संदिग्ध वस्तुओं की जांच की प्रक्रिया का अभ्यास किया, जबकि चिकित्सा दल ने घायलों को तत्काल उपचार देकर अस्पताल पहुंचाने की तैयारियों को परखा। अग्निशमन दल ने आग लगने की स्थिति से निपटने का अभ्यास किया।
एनएसजी: देश की सबसे विशिष्ट आतंकवाद निरोधी इकाई
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) देश की सबसे विशिष्ट आतंकवाद निरोधी और बंधक-मुक्ति इकाई है। इसका गठन वर्ष 1984 में किया गया था और यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। ‘ब्लैक कैट्स’ के नाम से मशहूर इस बल के कमांडो अत्यंत कठिन प्रशिक्षण से गुजरते हैं।
एनएसजी का मुख्यालय मानेसर (हरियाणा) में है, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों में इसके क्षेत्रीय केंद्र स्थापित हैं, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में कमांडो शीघ्र मौके पर पहुंच सकें। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और गांधीनगर में इसके हब कार्यरत हैं। 26/11 के मुंबई हमलों के बाद देश में एनएसजी की तैनाती व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया था।
देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा: मप्र का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट
इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मध्यप्रदेश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। मराठा साम्राज्य की शासक देवी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर बने इस हवाई अड्डे से प्रतिदिन बड़ी संख्या में घरेलू उड़ानें संचालित होती हैं और यहां से अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर होने के साथ-साथ तेजी से बढ़ता व्यावसायिक केंद्र भी है, जिसके कारण यहां हवाई यातायात में लगातार वृद्धि हो रही है।
हवाई अड्डों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के पास होती है, जो देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर तैनात है। मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ के 142 जवानों की भागीदारी इसी जिम्मेदारी को दर्शाती है।
आगे क्या: सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट बनेगी
सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास के बाद सभी भागीदार एजेंसियों की एक समीक्षा बैठक होगी, जिसमें ड्रिल के दौरान सामने आई खामियों और सुधार के बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी। इसके आधार पर हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के सुझाव तैयार किए जाएंगे।
इंदौर हवाई अड्डा मध्यप्रदेश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित होती हैं। ऐसे में इस तरह के अभ्यास यात्रियों की सुरक्षा के प्रति प्रशासन की गंभीरता को दर्शाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
