Headlines

सरदार पटेल के बड़े भाई: विट्ठलभाई पटेल की कहानी

विट्ठलभाई पटेल का चित्र

सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम के साथ एक और नाम जुड़ा है, जिसे इतिहास कम याद करता है — उनके बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल का। वे अपने आप में एक बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे, और भारतीय संसदीय लोकतंत्र की नींव रखने वाले नेताओं में उनका नाम सम्मान से लिया जाता है।

छोटे भाई के विशाल व्यक्तित्व के साये में अक्सर उनकी कहानी दब जाती है, लेकिन सच यह है कि विट्ठलभाई अपने दौर के सबसे प्रभावशाली विधायी नेताओं में गिने जाते थे।

स्वराज पार्टी की स्थापना

वर्ष 1873 में गुजरात के करमसद में जन्मे विट्ठलभाई ने सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की, जिसने ब्रिटिश शासन के दौर में विधायी राजनीति को नई दिशा दी।

केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय अध्यक्ष

वर्ष 1925 में वे केंद्रीय विधानसभा के पहले निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष बने। यह भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी — उस दौर में जब भारतीयों को सत्ता के केंद्र से दूर रखा जाता था।

उनके इस पद पर पहुंचने ने साबित किया कि भारतीय नेता विधायी मंच पर भी उतने ही सक्षम हैं — और यही परंपरा आगे चलकर स्वतंत्र भारत की संसदीय व्यवस्था की बुनियाद बनी।

विट्ठलभाई पटेल का चित्र
फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

22 अक्टूबर 1933 को जिनेवा में उनका निधन हो गया। संसदीय परंपराओं की नींव रखने वाले नेताओं में विट्ठलभाई पटेल का नाम हमेशा सम्मान से लिया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार