Headlines

नवरात्रि 2026 Day 1: मां शैलपुत्री की कथा — स्वरूप, पूजा विधि, भोग और मंत्र

फूलों से सजी मां दुर्गा की प्रतिमा

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। मां शैलपुत्री को नवदुर्गाओं में सबसे प्रथम माना गया है। मान्यता है कि प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

स्वरूप वर्णन

मां शैलपुत्री का अर्थ है — पर्वतराज हिमालय की पुत्री। मां का वाहन वृषभ (नंदी बैल) है, इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है। मां का स्वरूप अत्यंत सौम्य और करुणामय है। मां शैलपुत्री शक्ति और स्थिरता का प्रतीक हैं, और मूलाधार चक्र की देवी मानी जाती हैं।

कथा

पूर्व जन्म में मां शैलपुत्री सती के रूप में प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। सती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में जब सती अपने पति शिव का अपमान सहन न कर सकीं, तो उन्होंने यज्ञ की अग्नि में प्राण त्याग दिए।

दूसरे जन्म में वही सती हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में जन्मीं। पर्वत (शैल) की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। उन्होंने पुनः कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया। मां शैलपुत्री की कथा हमें धैर्य, तपस्या और संकल्प की प्रेरणा देती है।

पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर या पूजा स्थल को शुद्ध करें।
  • मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर गंगाजल से अभिषेक करें।
  • मां को लाल वस्त्र, लाल फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और मां का ध्यान करें।
  • मां शैलपुत्री के मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • अंत में मां की आरती करें और क्षमा याचना करें।

प्रिय भोग

मां शैलपुत्री को गाय के घी से बना हलवा और पूड़ी विशेष प्रिय है। प्रथम दिन मां को गाय के घी का भोग अर्पित करने से आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही शुद्ध घी के दीये जलाने का भी विशेष महत्व है।

मंत्र

ध्यान मंत्र:
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

बीज मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः॥

महत्व

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की उपासना से साधक का मूलाधार चक्र जागृत होता है, जिससे जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ता है। मां शैलपुत्री धैर्य और संकल्प की देवी हैं। जो भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करता है, उसे रोग-शोक से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

जय मां शैलपुत्री! नवरात्रि के पावन पर्व की समस्त भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार