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इंदौर: आठ साल में दूसरी बार टूटी मथुरावाला बिल्डिंग, स्टे हटा और सुबह 6 बजे गरजी पोकलेन — जानें पूरी कहानी

मथुरावाला बिल्डिंग पर बुलडोजर कार्रवाई, इंदौर सौजन्य: नईदुनिया

इंदौर ब्यूरो। इंदौर के छावनी चौराहे पर शुक्रवार सुबह 6 बजे से बुलडोजरों की गर्जना गूंजने लगी। मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण में बाधक बनी मथुरावाला बिल्डिंग के हिस्सों पर नगर निगम की रिमूवल टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी। आठ साल में यह दूसरी बार है जब इस बिल्डिंग पर हथौड़ा चला है। यह बिल्डिंग पूर्व पार्षद भारत मथुरावाला की है, जो इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भी हैं।

सुबह 6 से 11 बजे तक चली कार्रवाई

कार्रवाई सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई और 11 बजे तक यानी पांच घंटे से ज्यादा चली। दो अपर आयुक्त, एसीपी समेत 150 से ज्यादा निगमकर्मी और पुलिस जवान मौके पर तैनात रहे। तीन पोकलेन और दो जेसीबी मशीनों के साथ अमला पहुंचा था। ऊंचाई ज्यादा होने से पहले श्रमिकों ने हाथ से बाधक हिस्से हटाए, फिर मशीनों से ऊपरी मंजिलों को ढहाया गया। एहतियात के तौर पर एंबुलेंस और दमकल वाहन भी मौके पर तैनात रहे, सड़क का ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। भारी पुलिस बल के बावजूद कोई विवाद नहीं हुआ।

मथुरावाला बिल्डिंग को दो तरफ से तोड़ा गया — एक तरफ चार फीट और दूसरी तरफ दो फीट निर्माण सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई में बाधक था। बिल्डिंग के सामने स्थित एक अन्य भवन के बाधक हिस्से और कई जगह आगे निकले छज्जे व खंभे भी हटाए गए। भवन के बाकी हिस्से को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए सावधानी से तोड़फोड़ की गई।

बिल्डिंग में क्या-क्या चल रहा था

मथुरावाला भवन की निचली मंजिल पर मिठाई की दुकान और भोजनालय संचालित हो रहे थे, जबकि ऊपरी मंजिलों पर होटल और छात्रावास था। कई छात्र कमरे लेकर रह रहे थे। कार्रवाई से पहले निगम के अमले ने छात्रों का सामान सुरक्षित स्थान पर रखवाया और भवन में रखा अन्य सामान भी बाहर निकलवाया।

इतने दिनों बाद क्यों टूटी — असली वजह

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पांच माह पहले इसी सड़क के लिए 80 से ज्यादा निर्माण तोड़ दिए गए थे, तो मथुरावाला बिल्डिंग इतने दिनों तक कैसे बची रही। वजह थी अदालत का स्टे। भवन स्वामी ने सड़क चौड़ीकरण का विरोध करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। स्टे मिलने के बाद निगम इस बिल्डिंग पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा था, जबकि चार माह पहले बाकी ज्यादातर बाधक निर्माण हटाए जा चुके थे।

गुरुवार को कोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया। गुरुवार देर शाम हरी झंडी मिलते ही निगम ने रात में ही कार्रवाई की प्लानिंग कर ली — रिमूवल टीम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना दे दी गई कि शुक्रवार सुबह सीधे छावनी चौराहा पहुंचना है। सुबह 5 बजे अमला अलर्ट था और 6 बजे पोकलेन गरजने लगीं। निगम का कहना है कि बाधक निर्माणों के मालिकों को पहले ही नोटिस दिए गए थे, लेकिन स्वेच्छा से निर्माण न तोड़े जाने पर खुद हटाने का फैसला लिया गया।

आठ साल पहले भी चले थे हथौड़े

यह पहला मौका नहीं है। आठ साल पहले तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी की पहल पर छावनी सड़क को चौड़ा करने की कवायद हुई थी, तब भी इस बिल्डिंग पर हथौड़े चले थे। यानी यह बिल्डिंग दूसरी बार सड़क चौड़ीकरण की जद में आई है।

अब क्या होगा

इलाके में 100 साल से ज्यादा पुराने मकान हैं। सीवरेज और ड्रेनेज लाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है, अब सड़क बनेगी। मधुमिलन चौराहे से जगन्नाथ धर्मशाला होते हुए छावनी पुल तक बन रही इस सड़क से एबी रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा — वाहन मधुमिलन से छावनी होते हुए अग्रसेन चौराहा और जीपीओ चौराहे की ओर जा सकेंगे।

गौरतलब है कि मई में हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला था। कांग्रेस की ओर से क्षेत्र में जन अधिकार यात्रा निकालकर कार्रवाई का विरोध किया गया था।

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