26 सितंबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि है और इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध मनाया जाएगा, जिसे पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध माना जाता है। साथ ही आज पूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण पूजा का भी विधान है। शुभ कार्यों की योजना बनाने से पहले आज का पंचांग, राहुकाल और शुभ मुहूर्त अवश्य जान लें।
आज का पंचांग — एक नजर में
- दिन: शनिवार, 26 सितंबर 2026
- तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा — रात 10 बजकर 18 मिनट तक, इसके बाद प्रतिपदा
- नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद (पूर्व भाद्रपद) — सुबह 11 बजकर 31 मिनट तक, इसके बाद उत्तराभाद्रपद
- योग: गण्ड — दोपहर 1 बजकर 16 मिनट तक, इसके बाद वृद्धि
- करण: विष्टि (भद्रा) — सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक, इसके बाद बव
- चंद्र राशि: मीन | सूर्य राशि: कन्या
- विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी) | शक संवत: 1948
- मास: भाद्रपद | पक्ष: शुक्ल पक्ष | ऋतु: वर्षा | अयन: दक्षिणायन
- विशेष: भाद्रपद पूर्णिमा, पूर्णिमा श्राद्ध, पूर्णिमा व्रत / सत्यनारायण पूजा
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह लगभग 6 बजकर 16 मिनट
- सूर्यास्त: शाम लगभग 6 बजकर 19 मिनट
- चंद्रोदय: शाम लगभग 6 बजे (पूर्णिमा का चांद)
- (समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है)
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:40 से 5:28 तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:54 से 12:42 तक (आज का सबसे उपयोगी शुभ मुहूर्त)
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:18 से 3:00 तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:55 से 6:43 तक
राहुकाल — इस समय शुभ कार्य से बचें
शनिवार को राहुकाल सुबह के समय रहता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल में नया काम शुरू करने से बचें।
- राहुकाल: सुबह 9:17 से 10:47 तक
- गुलिक काल: सुबह 6:16 से 7:46 तक
- यमगण्ड: दोपहर 1:48 से 3:18 तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 6:16 से 7:04 तक और 7:04 से 7:52 तक
आज का विशेष — भाद्रपद पूर्णिमा और पूर्णिमा श्राद्ध
भाद्रपद पूर्णिमा को धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान प्राप्त है। आज के दिन सत्यनारायण की कथा और पूजा का विधान है, और श्रद्धालु पूर्णिमा का व्रत रखते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है।
आज पूर्णिमा श्राद्ध भी है, जिसे पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध माना जाता है। इस दिन पितरों के नाम तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए दान-पुण्य करना फलदायी होता है।
नोट: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। ऊपर दिए गए विवरण उपलब्ध पंचांग स्रोतों से मिलान करके दिए गए हैं।
