निवाड़ी ब्यूरो
सार: निवाड़ी जिले की जेरोन खालसा नगर परिषद की अध्यक्ष कुसुम पस्तोर के भविष्य का फैसला आज मतगणना से होगा। 4 नवंबर को हुए राइट-टू-रिकॉल मतदान में 61.52 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। मतगणना सुबह 9 बजे से शुरू हो चुकी है और परिणाम से तय होगा कि अध्यक्ष कुर्सी पर बनी रहेंगी या उन्हें पद छोड़ना होगा।
मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में आज का दिन एक छोटी सी नगर परिषद के लिए बड़ा फैसला लेकर आया है। जेरोन खालसा नगर परिषद की अध्यक्ष कुसुम पस्तोर की कुर्सी पर जनता की मुहर का परिणाम आज सामने आएगा। चार नवंबर को हुए मतदान के बाद आज सुबह नौ बजे से मतगणना शुरू हो गई है। इस चुनाव की खासियत यह है कि इसमें न कोई उम्मीदवार मैदान में है और न किसी पार्टी का चुनाव चिह्न। मतदाताओं ने केवल एक सवाल पर वोट डाला है कि अध्यक्ष को पद पर बनाए रखा जाए या उन्हें वापस बुला लिया जाए। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार मतगणना आज ही पूरी होनी है और परिणाम से यह साफ हो जाएगा कि नगर परिषद की कमान किसके हाथ में रहेगी।
आज सुबह नौ बजे से मतगणना, परिणाम का इंतजार
जेरोन खालसा नगर परिषद में अध्यक्ष के भविष्य को लेकर हुई मतगणना आज सुबह नौ बजे से शुरू हुई। राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार चार नवंबर को मतदान और छह नवंबर को मतगणना की तारीख घोषित की थी। मतगणना के बाद यह तय होगा कि मतदाताओं ने अध्यक्ष को कुर्सी पर बनाए रखने के पक्ष में फैसला दिया है या उन्हें पद से हटाने के पक्ष में। अध्यक्ष को हटाने के लिए राइट-टू-रिकॉल के तहत मतदान कराया गया था और अब सबकी नजरें आज आने वाले नतीजे पर टिकी हैं। प्रशासन ने मतगणना की तैयारियाँ पहले से पूरी कर ली थीं और मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से कराने के इंतजाम किए गए थे। परिणाम आने के बाद ही यह साफ होगा कि जेरोन खालसा की नगर परिषद में आगे क्या होगा।
चार नवंबर को हुआ था मतदान, 61.52 फीसदी वोट पड़े

जेरोन खालसा नगर परिषद में अध्यक्ष को पद से हटाने के सवाल पर चार नवंबर को मतदान हुआ था। मतदान बुधवार को सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम पाँच बजे तक चला। नगर परिषद के सभी पंद्रह वार्डों में कुल पंद्रह मतदान केंद्र बनाए गए थे। सहायक रिटर्निंग अधिकारी बृजेश खरे के अनुसार मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही और कहीं से किसी अप्रिय घटना या विवाद की सूचना नहीं मिली। मतदान के शुरुआती घंटों में रफ्तार धीमी रही, लेकिन दोपहर एक बजे तक करीब 38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया जा चुका था। शाम तक मतदान ने रफ्तार पकड़ी और कुल 61.52 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
नगर परिषद क्षेत्र में कुल 7,799 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 4,031 पुरुष और 3,768 महिला मतदाता शामिल थे। मतदान के दिन कुल 4,798 मतदाताओं ने वोट डाले। इनमें 2,635 पुरुष और 2,163 महिलाएँ थीं। इस तरह कुल मतदान 61.52 फीसदी दर्ज किया गया। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दिनेश श्रीवास्तव ने बताया था कि अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के सवाल पर हुए मतदान में 61.52 प्रतिशत वोट पड़े थे। मतदान का यह आंकड़ा बताता है कि नगर के मतदाताओं ने इस फैसले में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
‘भरी कुर्सी’ बनाम ‘खाली कुर्सी’, दो चुनाव चिह्नों पर पड़े वोट
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात इसमें इस्तेमाल किए गए चुनाव चिह्न रहे। मतदाताओं के सामने दो विकल्प रखे गए थे। पहला चिह्न ‘भरी हुई कुर्सी’ था। यह मौजूदा अध्यक्ष को उनके पद पर बनाए रखने के समर्थन को दर्शाता था। दूसरा चिह्न ‘खाली कुर्सी’ था। यह अध्यक्ष को उनके पद से हटाने के पक्ष में वोट करने के लिए तय किया गया था। मतदाताओं ने इन दोनों में से किसी एक चिह्न पर मुहर लगाकर अपना फैसला दिया। यदि ‘खाली कुर्सी’ को अधिक वोट मिलते हैं तो मौजूदा अध्यक्ष को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना होगा। वहीं, यदि ‘भरी कुर्सी’ को अधिक समर्थन मिलता है तो अध्यक्ष अपने पद पर बनी रहेंगी। यही वजह है कि आज की मतगणना में हर वोट की गिनती अहम मानी जा रही है।
क्या है राइट-टू-रिकॉल, कब मिलता है यह अधिकार
राइट-टू-रिकॉल एक ऐसा लोकतांत्रिक अधिकार है जिसके तहत मतदाता अपने चुने हुए जनप्रतिनिधि को कार्यकाल के बीच में ही पद से हटा सकते हैं। मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था वर्ष 2000 से लागू है। साल 2018 में राज्य में नगरीय निकायों के प्रमुखों के अप्रत्यक्ष चुनाव होने के बाद यह प्रक्रिया बंद हो गई थी। वर्ष 2018 में ही इस व्यवस्था को दोबारा बहाल किया गया। इसके बाद से यह दूसरा ऐसा चुनाव है जिसमें राइट-टू-रिकॉल के तहत मतदान कराया गया है। इससे पहले जनवरी 2026 में सागर जिले की देवरी नगर परिषद में इस व्यवस्था के तहत मतदान हुआ था। उस चुनाव में मतदाताओं ने अध्यक्ष को पद पर बनाए रखने के पक्ष में फैसला दिया था। अब जेरोन खालसा में होने वाली मतगणना से यह साफ होगा कि यहाँ के मतदाता किस दिशा में फैसला देते हैं।
बारह पार्षदों का प्रस्ताव और धारा 47 की प्रक्रिया
जेरोन खालसा नगर परिषद में कुल पंद्रह वार्ड हैं। इनमें निर्वाचित बारह पार्षदों ने अध्यक्ष कुसुम पस्तोर को पद से हटाने की पहल की थी। पार्षदों ने मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 47 के तहत अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने का प्रस्ताव कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के सवाल पर मतदान कराया गया। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में निवाड़ी कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चार नवंबर को मतदान हुआ और छह नवंबर को मतगणना तय की गई। अध्यक्ष की ओर से इस पूरे प्रकरण पर अब तक कोई सार्वजनिक बयान सामने आने की जानकारी उपलब्ध खबरों में नहीं है। मतगणना का परिणाम ही अब इस विवाद का फैसला करेगा।
वर्ष 2022 में चुनी गई थीं कुसुम पस्तोर
कुसुम पस्तोर वर्ष 2022 में हुए आम चुनाव में जेरोन खालसा नगर परिषद की अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। उनका पूरा नाम कुसुम मातादीन पस्तोर है। निवाड़ी जिला टीकमगढ़ जिले से अलग होकर बना है और जेरोन खालसा यहाँ की एक छोटी नगर परिषद है। छोटी परिषद होने के बावजूद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। इसकी वजह यह है कि राइट-टू-रिकॉल जैसा अधिकार बहुत कम इस्तेमाल होता है और जब भी इसका इस्तेमाल होता है तो यह लोकतांत्रिक जवाबदेही की बड़ी मिसाल बन जाता है। मतदाताओं ने चार नवंबर को अपने वोट से यह बता दिया था कि वे अपने प्रतिनिधि के कामकाज पर फैसला देने के लिए तैयार हैं।
परिणाम के बाद क्या होगा
मतगणना के परिणाम के बाद दो ही संभावनाएँ हैं। यदि ‘भरी कुर्सी’ को अधिक वोट मिलते हैं तो कुसुम पस्तोर अध्यक्ष के पद पर बनी रहेंगी और नगर परिषद का कामकाज पहले की तरह चलता रहेगा। यदि ‘खाली कुर्सी’ को अधिक वोट मिलते हैं तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना होगा। पद रिक्त होने की स्थिति में आगे की प्रक्रिया नियमानुसार तय होगी। फिलहाल मतगणना जारी है और परिणाम का इंतजार किया जा रहा है। परिणाम आते ही यह साफ हो जाएगा कि जेरोन खालसा की राजनीति किस दिशा में जाएगी।
प्रदेश भर की नजरें, क्यों अहम है यह फैसला
जेरोन खालसा का यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि 2018 में व्यवस्था बहाल होने के बाद यह दूसरा राइट-टू-रिकॉल चुनाव है। पहला चुनाव देवरी में हुआ था जहाँ मतदाताओं ने अध्यक्ष को बनाए रखने का फैसला दिया था। अब जेरोन खालसा का परिणाम बताएगा कि मतदाता इस अधिकार का इस्तेमाल किस तरह करते हैं। यह फैसला आने वाले समय में अन्य नगरीय निकायों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा। धनतेरस के दिन हो रही यह मतगणना जेरोन खालसा के लोगों के लिए त्योहार के बीच एक बड़ा राजनीतिक फैसला भी लेकर आई है। नगर के लोग परिणाम का इंतजार कर रहे हैं और प्रशासन मतगणना के बाद की स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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