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इंदौर में पानी बर्बाद किया तो अब ₹10,000 तक जुर्माना: जल नीति पारित, 300 नए बोरिंग और 33 टैंकरों को मंजूरी

सांकेतिक चित्र: पानी की बूंद के साथ नल — जल संरक्षण का प्रतीक सांकेतिक चित्र.

इंदौर ब्यूरो

इंदौर शहर के लिए पानी बचाना अब सिर्फ अपील नहीं, बल्कि नियमों से जुड़ा फैसला बन गया है। सोमवार को महापौर सभाकक्ष में हुई महापौर परिषद की बैठक में इंदौर की जल नीति को सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक की अध्यक्षता महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने की, जिसमें निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, महापौर परिषद के सदस्य और सभी अपर आयुक्त मौजूद रहे। निगम मुख्यालय में दोपहर बाद हुई यह बैठक तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली, जिसमें जल प्रबंधन, अवैध कनेक्शन, विज्ञापन नीति, आवास और कर्मचारियों के विनियमन सहित कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

जल नीति का प्रमुख उद्देश्य पानी की हर बूंद का संरक्षण करना, वर्षा जल का संग्रहण कर उसे भूजल के रूप में जमीन तक पहुंचाना, अपशिष्ट जल को उपचारित कर फिर से उपयोग में लाना और इंदौर को देश के प्रमुख जल सुरक्षित शहरों में शामिल करना है। नीति के माध्यम से बाहरी जल स्रोतों पर निर्भरता कम करने, भूजल स्तर में सुधार लाने, जल प्रदूषण रोकने और झीलों, तालाबों व अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही जल प्रबंधन में जवाबदेही तय करने और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रावधान भी किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शहर के भविष्य को सुरक्षित और जल समृद्ध बनाने की दिशा में यह नीति तैयार की गई है।

इंदौर जल नीति जुर्माना: किस गलती पर कितनी पेनल्टी

इंदौर जल नीति जुर्माना की सबसे अहम बात यह है कि पेनल्टी अब क्रमिक यानी बढ़ते क्रम में लगेगी। सार्वजनिक जल संसाधनों के दुरुपयोग और पानी के अनावश्यक उपयोग की शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। नर्मदा या बोरिंग के पानी से कार धोने या इस पानी का किसी भी अन्य तरीके से दुरुपयोग करने पर पहली बार ₹2,000, दूसरी बार ₹5,000 और तीसरी व प्रत्येक आगामी बार ₹10,000 का जुर्माना देना होगा।

इसी तरह घरों में नल कनेक्शन पर मोटर लगाकर पाइपलाइन से सीधे पानी खींचने वालों पर भी सख्ती होगी। इससे दूसरों के घरों की जलापूर्ति प्रभावित होती है, इसलिए मोटर से पानी खींचने पर पहली बार ₹5,000 और दूसरी व हर अगली बार ₹10,000 की पेनल्टी लगेगी। निगम ने स्पष्ट किया है कि पानी की बर्बादी पर कार्रवाई शिकायत मिलने पर की जाएगी, और इसका मकसद सिर्फ जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि शहर में जल संरक्षण की आदत को मजबूत करना है।

निगम की एजेंसियों, अधिकारियों और निगम द्वारा नियुक्त टैंकर संचालकों को भी नियमों से छूट नहीं मिलेगी। गड़बड़ी पाए जाने पर उनके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यानी जल नीति सिर्फ आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था चलाने वालों के लिए भी समान रूप से लागू होगी।

सांकेतिक चित्र: शहर में पानी का टैंकर और ओवरहेड टंकी
सांकेतिक चित्र.

नर्मदा और बोरिंग के पानी पर सख्ती क्यों

इंदौर शहर अपनी पेयजल जरूरतों के लिए मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर निर्भर है। नगर निगम की पाइपलाइनों के जरिये खरगोन जिले के जलूद से करीब 80 किलोमीटर दूर से नर्मदा का पानी इंदौर तक लाया जाता है और फिर शहर भर में वितरित किया जाता है। इस वर्ष अल्पवर्षा के कारण भूजल रिचार्ज बेहतर तरीके से नहीं हो पाया है, जिससे आगामी ग्रीष्मकाल में संभावित जल संकट की आशंका पहले से ही जताई जा रही है।

यही वजह है कि निगम ने गर्मी आने से पहले ही तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले भी पानी की बर्बादी पर चालानी कार्रवाई की जा चुकी है। 27 अक्टूबर को जोन क्रमांक 21 के वार्ड 79 में आरआर कैट रोड स्थित सेवन स्टेप गार्डन के सामने बोरिंग के पानी से फर्श धोने पर ₹2,000 का स्पॉट फाइन लगाया गया था। अब नई जल नीति के तहत यह कार्रवाई एक तयशुदा और क्रमिक जुर्माना व्यवस्था में बदल गई है, ताकि हर नागरिक को पहले से पता रहे कि दोहराई गई गलती पर पेनल्टी कितनी बढ़ जाएगी।

शहर में उपचारित पानी के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना भी इस तैयारी का हिस्सा है। उद्यानों और अन्य उपयुक्त जगहों पर शोधित पानी के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात पहले भी कही जा चुकी है। जल नीति में अपशिष्ट जल के उपचार और पुनः उपयोग को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, ताकि पीने योग्य पानी का इस्तेमाल सिर्फ पीने और जरूरी घरेलू कामों के लिए हो।

12 नवंबर से अवैध से वैध नल कनेक्शन अभियान

जल नीति के साथ ही अवैध नल कनेक्शनों को वैध कराने के लिए 12 नवंबर से विशेष अभियान चलाया जाएगा, जो 21 दिन तक जारी रहेगा। इस दौरान नागरिक अपने अवैध कनेक्शन को वैध करा सकेंगे। अभियान खत्म होने के बाद बड़े स्तर पर कनेक्शनों की जांच की जाएगी और अवैध कनेक्शन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निगम का मानना है कि अवैध कनेक्शन न सिर्फ राजस्व का नुकसान करते हैं, बल्कि उनसे पूरे इलाके की जलापूर्ति भी प्रभावित होती है। एक घर में मोटर लगाकर पानी खींचने से पड़ोस के घरों तक पानी नहीं पहुंचता। इसलिए अभियान का मकसद दंड से पहले मौका देना है, ताकि लोग तय समय में अपना कनेक्शन नियमित करा लें।

नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अभियान की अवधि में ही अपने कनेक्शन की स्थिति जांच लें। कनेक्शन वैध कराने की प्रक्रिया, शुल्क और दस्तावेजों की जानकारी निगम के संबंधित जोन कार्यालयों से ली जा सकेगी। अभियान के बाद पकड़े गए अवैध कनेक्शनों पर नियमों के तहत कार्रवाई होगी।

टैंकर व्यवस्था और निगरानी: 33 नए टैंकर, हाइड्रेंट पर सीसीटीवी

शहर में प्रत्येक घर तक पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से पर्याप्त टैंकर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 11 नए ईवी ट्रक टैंकर और 8,000 लीटर क्षमता के 22 नवीन सीएनजी ट्रक टैंकर खरीदे जाएंगे। इस तरह कुल 33 नए टैंकरों की खरीदी को मंजूरी दी गई है।

पानी के वितरण और टैंकरों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए सभी हाइड्रेंट और टंकियों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे यह पता चल सकेगा कि किस हाइड्रेंट से कितना पानी लिया गया और टैंकर कहां-कहां गए। जिन लोगों या एजेंसियों ने अपने स्तर पर पानी के टैंकर लगा रखे हैं, उन्हें अगले सात दिन में टैंकरों की व्यवस्था सुधारना होगी। किराए पर चलने वाले पानी के टैंकर संचालकों को सात दिन में लीकेज की समस्या का समाधान करना होगा, ऐसा नहीं करने वालों के विरुद्ध पेनल्टी लगाई जाएगी।

टैंकर व्यवस्था में पारदर्शिता इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि संकट के समय टैंकर ही कई इलाकों में पानी का मुख्य सहारा बनते हैं। निगरानी बढ़ने से टैंकरों के दुरुपयोग, मनमानी वसूली और गलत वितरण की शिकायतों पर रोक लगने की उम्मीद है।

300 नए बोरिंग, 100 पर मोटर पंप: गर्मी से पहले तैयारी

संभावित जल संकट को देखते हुए शहर में 300 नए बोरिंग कराने और 100 बोरिंग पर मोटर पंप लगवाने के कार्य को स्वीकृति दी गई है। आवश्यकतानुसार अधिक हेड वाले मोटर पंप भी लगाए जाएंगे, ताकि गहराई से पानी निकालने में दिक्कत न हो। यह तैयारी आगामी ग्रीष्मकाल को ध्यान में रखकर की गई है, जब पानी की मांग सबसे ज्यादा होती है।

नए बोरिंग और पंपों से उन इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां नर्मदा जल की सप्लाई लाइन नहीं पहुंचती या जहां बोरिंग से ही पानी की आपूर्ति होती है। हालांकि, निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि बोरिंग बढ़ाना अकेला समाधान नहीं है। इसके साथ ही वर्षा जल संग्रहण, भूजल रिचार्ज और पानी की बर्बादी पर रोक जैसे कदम भी उतने ही जरूरी हैं, जो नई जल नीति का हिस्सा हैं।

सफाई व्यवस्था: 3000 स्वच्छता कर्मी, 1800 से अधिक का विनियमन

महापौर परिषद की बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए तीन हजार स्वच्छताकर्मियों की नियुक्ति करने का फैसला भी लिया गया है। इंदौर देश में स्वच्छता के मामले में अव्वल शहरों में गिना जाता है, और इस रैंकिंग को बनाए रखने के लिए सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाना जरूरी माना गया है।

इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के परिपालन में 1800 से अधिक कर्मचारियों को विनियमित किया जाएगा। साथ ही कर्मचारियों की वरिष्ठता और वरीयता को ध्यान में रखते हुए अन्य पात्र कर्मचारियों का भी विनियमन किया जाएगा। इससे लंबे समय से अस्थायी रूप से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी दर्जा मिलने का रास्ता खुलेगा।

एमआईसी के अन्य फैसले: गेंट्री, सड़कें और खेल सुविधा

बैठक में शहर के बुनियादी ढांचे, यातायात और विज्ञापन नीति से जुड़े फैसले भी लिए गए। शहर में अब नए यूनिपोल नहीं लगाए जाएंगे। यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 140 नवीन गेंट्री के निर्माण का निर्णय लिया गया। मार्केट विभाग गाइडलाइन के अनुसार निगम की गेंट्री का संचालन करेगा और विज्ञापन प्रसारण के लिए निर्धारित शुल्क लेकर विज्ञापन प्रदर्शित किए जाएंगे।

सरवटे बस स्टैंड से जूनी इंदौर ब्रिज, चंद्रभागा होते हुए मच्छी बाजार चौराहे तक शेष सड़क के विकास कार्य के लिए दोबारा निविदा जारी की जाएगी। इसके अलावा एयरपोर्ट रोड से एमआर-5 को जोड़ने वाली लिंक रोड का विकास और एमआर-5 पर टाटा स्टील चौराहे से छोटा बांगड़दा गांव तक सड़क निर्माण किया जाएगा। केसरबाग फ्लाईओवर के नीचे स्थित भूमि पर पीपीपी मॉडल के अंतर्गत स्मार्ट हब मल्टी स्पोर्ट्स एवं रिक्रिएशनल फैसिलिटी विकसित की जाएगी। इसके साथ ही मुक्तिधाम और कब्रिस्तानों के व्यवस्थित संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाएगी।

नागरिकों के लिए क्या बदलेगा, आगे क्या होगा

नई जल नीति के बाद इंदौर के नागरिकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पानी की बर्बादी अब एक तय जुर्माना व्यवस्था से जुड़ गई है। इंदौर जल नीति जुर्माना व्यवस्था के लागू होने के बाद पाइप लगाकर कार या फर्श धोना, नल कनेक्शन पर मोटर लगाकर पानी खींचना और सार्वजनिक जल संसाधनों का दुरुपयोग करना अब महंगा पड़ेगा। पहली गलती पर भी ₹2,000 से ₹5,000 तक की पेनल्टी लगेगी, और दोहराने पर यह ₹10,000 तक पहुंच जाएगी।

आगे निगम की ओर से जल नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे पानी का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करें, वर्षा जल संग्रहण अपनाएं और अपने कनेक्शन की स्थिति समय पर जांच लें। 12 नवंबर से शुरू होने वाला अवैध से वैध अभियान इसका पहला मौका होगा। गर्मी से पहले 300 नए बोरिंग, 33 नए टैंकर और हाइड्रेंट पर सीसीटीवी निगरानी से शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी पूरी होने की उम्मीद है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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