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इंदौर में ‘शब्द साधक सुरेश उपाध्याय’ पुस्तक का लोकार्पण: स्मृतिरूपेण में साहित्यकारों का सम्मान, सत्तन बोले- मालवा रत्नों की खान है

स्मृतिरूपेण में 'शब्द साधक सुरेश उपाध्याय' पुस्तक का लोकार्पण स्मृतिरूपेण में 'शब्द साधक सुरेश उपाध्याय' पुस्तक का लोकार्पण

इंदौर ब्यूरो

सार: इंदौर के प्रीतमलाल दुआ सभागार में रविवार को आयोजित स्मृतिरूपेण कार्यक्रम में कीर्तिशेष साहित्यकार सुरेश उपाध्याय पर लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘शब्द साधक सुरेश उपाध्याय’ का लोकार्पण हुआ। राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन की अध्यक्षता में हुए इस अवसर पर शहर के साहित्यकारों को शब्द साधक सुरेश उपाध्याय स्मृति सम्मान से सम्मानित भी किया गया।

इंदौर में रविवार को साहित्यिक वातावरण के बीच एक स्मृति कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसका नाम स्मृतिरूपेण रखा गया था। अवसर कीर्तिशेष साहित्यकार सुरेश उपाध्याय पर लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘शब्द साधक सुरेश उपाध्याय’ के लोकार्पण एवं साहित्यकार सम्मान का रहा। कार्यक्रम प्रीतमलाल दुआ सभागार में संपन्न हुआ, जहां साहित्य से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन ने की। मुख्य अतिथि बागली के विधायक मुरली भंवरा रहे। विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार बलराम अवस्थी, एस. एन. गोयल (समाधान) व उद्योगपति एच. एम. शाह उपस्थित रहे। अतिथि स्वागत ओम उपाध्याय, सतीश उपाध्याय, मनोज जोशी ने व शब्द स्वागत श्वेता मनोज जोशी ने किया।

अध्यक्षता में सत्तन के विचार

अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन ने कहा, ‘मालवा रत्नों की खान है और जहां रवि, शशि, देव इत्यादि नहीं पहुंच सकते वहां कवि पहुंचते हैं, और सुरेश उपाध्याय ऐसे ही कवि, व्यंग्यकार और रचनाकार रहे हैं।’ सत्तन के इस कथन में मालवा की साहित्यिक परंपरा और सुरेश उपाध्याय के रचनाकर्म का भाव एक साथ झलकता है।

किसी रचनाकार को याद करने का अर्थ केवल उसके जीवन को याद करना नहीं होता, बल्कि उसके लिखे हुए शब्दों को फिर से समाज के सामने लाना भी होता है। स्मृतिरूपेण जैसे आयोजन इसी उद्देश्य से किए जाते हैं कि आने वाली पीढ़ी अपने क्षेत्र के रचनाकारों से परिचित हो सके और उनके लेखन से जुड़ सके।

पुस्तक और लेखक का मनोगत

पुस्तक पर लेखकीय मनोगत डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने व्यक्त करते हुए कहा, ‘अक्षर की यात्रा अनंत होती है, व्यक्ति अपने कार्यों से कुछ वर्षों तक याद किया जाता है जबकि उसके लिखे अक्षर, उसका लेखन अजर-अमर होता है, वह सदा स्मरण किया जाता है।’ लेखक के इस कथन में पुस्तक के शीर्षक का भाव भी निहित है कि शब्द की साधना करने वाला रचनाकार अपने शब्दों के माध्यम से सदा जीवित रहता है।

‘शब्द साधक सुरेश उपाध्याय’ पुस्तक कीर्तिशेष साहित्यकार सुरेश उपाध्याय के जीवन और रचनाकर्म पर केंद्रित है। लोकार्पण के अवसर पर पुस्तक की प्रति अतिथियों को भेंट की गई, जिसकी झलक कार्यक्रम की तस्वीरों में भी दिखाई देती है। पुस्तक के लोकार्पण के साथ ही सुरेश उपाध्याय की स्मृति को एक स्थायी लिखित रूप भी मिल गया है।

मुख्य अतिथि और विशेष अतिथियों के उद्गार

मुख्य अतिथि बागली विधायक मुरली भंवरा ने कहा, ‘यह बागली के गौरव का विषय है कि मनमाने बाबा के शिष्य सुरेश जी देशभर में अपने लेखन और पत्रकारिता से जाने जाते रहे और जीवन पर्यंत उन्होंने बागली को गौरवान्वित किया।’ भंवरा के कथन से स्पष्ट होता है कि सुरेश उपाध्याय का जुड़ाव बागली क्षेत्र से गहरा रहा और उनका लेखन तथा पत्रकारिता उन्हें देशभर में पहचान दिलाती रही।

विशेष अतिथि बलराम अवस्थी ने सुरेश उपाध्याय की बेबाकी और पत्रकारिता पर प्रकाश डाला। बेबाक लेखन किसी पत्रकार और रचनाकार की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है, और अवस्थी ने अपने उद्बोधन में इसी पक्ष को रेखांकित किया। एस. एन. गोयल ने सुरेश जी पर लिखी कविता का वाचन किया और उन्हें शब्द श्रद्धांजलि दी। कविता के माध्यम से दी गई श्रद्धांजलि इस अवसर को और भी भावपूर्ण बना गई।

साहित्यकारों का सम्मान

कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों को शब्द साधक सुरेश उपाध्याय स्मृति सम्मान से सम्मानित किया, जिनमें उर्मिला मेहता, दिनेश पाठक, मुन्नीदेवी गर्ग, मनोरमा अग्रवाल, रश्मिता शर्मा, श्रुति पंवार, सुनील कुमार ‘नील’, डॉ. वी. के. स्वर्णकार, एच. एम. शाह, मणिमाला शर्मा, अमन जादौन सम्मिलित रहे।

किसी साहित्यकार की स्मृति में दिया जाने वाला सम्मान केवल सम्मानित होने वाले व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह उस परंपरा को भी आगे बढ़ाता है जिससे वह रचनाकार जुड़ा रहा। इस अवसर पर सम्मानित हुए साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को साहित्यिक संगम का रूप दे दिया।

स्वागत, संचालन और आभार

कार्यक्रम का संचालन बागली निवासी वारिस अली ने व आभार हाईकोर्ट बार एसोसीएशन के पूर्व अध्यक्ष रितेश ईनाणी ने माना। अतिथियों का स्वागत ओम उपाध्याय, सतीश उपाध्याय और मनोज जोशी ने किया, जबकि शब्द स्वागत श्वेता मनोज जोशी ने किया। किसी भी सफल आयोजन के पीछे स्वागत, संचालन और आभार की यह त्रयी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और इस कार्यक्रम में भी यह व्यवस्था सुचारु रूप से दिखाई दी।

उपस्थित गणमान्य

इस मौके पर रत्ना उपाध्याय, संजय व्यास, देवेन्द्र सिंह सिसौदिया, लक्ष्मीकांत पंडित, डॉ. अखिलेश राव, आदित्य उपाध्याय, नीरज, श्रद्धा चिचानी इत्यादि मौजूद रहे। साहित्यकारों, पत्रकारों, उद्योग जगत और विधि क्षेत्र से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने इस स्मृति कार्यक्रम को समाज के विभिन्न वर्गों से जोड़ दिया।

सुरेश उपाध्याय का साहित्यिक परिचय

आयोजन में वक्ताओं ने बताया कि सुरेश उपाध्याय कवि, व्यंग्यकार और रचनाकार रहे। उनका लेखन और पत्रकारिता उन्हें देशभर में पहचान दिलाती रही। जीवन पर्यंत उन्होंने बागली को गौरवान्वित किया। उनकी बेबाकी और पत्रकारिता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। कीर्तिशेष साहित्यकार के रूप में उनकी स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम उनके रचनाकर्म को फिर से समाज के सामने लाने का एक प्रयास है।

मालवा की साहित्यिक धरती पर ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है, क्योंकि यहां की माटी से अनेक रचनाकार निकले हैं। स्मृतिरूपेण में पुस्तक लोकार्पण और सम्मान समारोह के माध्यम से सुरेश उपाध्याय की स्मृति को साहित्यिक जगत में एक नई ऊर्जा मिली है।

आगे क्या

पुस्तक ‘शब्द साधक सुरेश उपाध्याय’ के लोकार्पण के बाद अब यह पुस्तक पाठकों तक पहुंचेगी और सुरेश उपाध्याय के लेखन से नई पीढ़ी का परिचय होगा। आयोजकों और साहित्यकारों का मानना है कि किसी रचनाकार की स्मृति को जीवित रखने का सबसे अच्छा माध्यम उसका लिखा हुआ शब्द ही होता है, जो समय की सीमा से परे सदा स्मरण किया जाता है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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