भोपाल ब्यूरो
सार: चक्रवात अरनब के अवशेष के रूप में बने कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ के असर से मध्य प्रदेश में बारिश का दौर 4 नवंबर तक जारी रहेगा। मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल ने आज 1 नवंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के 15 जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, जबकि उत्तरी हिस्से के पांच जिलों में भी छिटपुट वर्षा की संभावना बन रही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में आज मौसम साफ रहने का अनुमान है, लेकिन तापमान में गिरावट के साथ ठंड का अहसास धीरे-धीरे बढ़ने लगा है।
आज किन जिलों में येलो अलर्ट
मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के अनुसार आज सीधी, सिंगरौली, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, अनूपपुर, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया, बालाघाट, सिवनी, मंडला, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा जिलों में येलो अलर्ट लागू है। इन जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है और बिजली गिरने का भी अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग ने इन जिलों के लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की है। बीते दिन भी इनमें से कई जिलों में बूंदाबांदी दर्ज की गई थी, जिससे हवा में नमी बनी हुई है।
येलो अलर्ट का मतलब है कि मौसम पर नजर रखने की जरूरत है। यह चेतावनी बताती है कि गरज-चमक और हल्की बारिश से रोजमर्रा के कामों पर असर पड़ सकता है, इसलिए लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। खासकर खुले मैदानों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों के लिए यह चेतावनी अहम है, क्योंकि गरज-चमक के दौरान खुले में रहना सुरक्षित नहीं माना जाता।
उत्तरी हिस्से में भी छिटपुट बारिश के आसार
पूर्वी जिलों के साथ-साथ प्रदेश के उत्तरी हिस्से में भी आज बारिश की संभावना बन रही है। मुरैना, भिंड, ग्वालियर, दतिया और शिवपुरी जिलों में कहीं-कहीं छिटपुट वर्षा हो सकती है। इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान नहीं है, लेकिन बादलों की आवाजाही और हल्की बौछारों से मौसम में बदलाव महसूस किया जाएगा। ग्वालियर-चंबल अंचल में दिन के समय हल्की धूप और शाम ढलते ही तापमान में गिरावट का रुझान बना हुआ है।
इसके उलट भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, उज्जैन, नर्मदापुरम, जबलपुर और सागर सहित प्रदेश के कई जिलों में आज मौसम साफ रहने का अनुमान है। इन इलाकों में कहीं-कहीं हल्के बादल छा सकते हैं, लेकिन बारिश की संभावना नहीं के बराबर है। सुबह के समय हल्की धुंध या हल्का कोहरा देखने को मिल सकता है, जबकि दिन चढ़ने के साथ धूप खिलने की उम्मीद है।

क्यों बना हुआ है बारिश का माहौल
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय प्रदेश के मौसम पर दो प्रणालियों का असर है। एक ओर दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवात अरनब के अवशेष के रूप में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, तो दूसरी ओर उत्तर हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके साथ ही पश्चिमी पवनों में ट्रफ के रूप में एक और पश्चिमी विक्षोभ मौजूद है। इन्हीं प्रणालियों के मेल से पूर्वी और उत्तरी मध्य प्रदेश में बादल बन रहे हैं और गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति पैदा हो रही है।
मौसम विभाग का आकलन है कि मौजूदा मौसमी गतिविधियों को देखते हुए 4 नवंबर तक प्रदेश में मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है। इस दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और बूंदाबांदी की संभावना है। दो नवंबर से बारिश की गतिविधियों में कमी आने के आसार हैं, लेकिन छिटपुट बरसात की संभावना 4 नवंबर तक बनी रहेगी। फिलहाल प्रदेश में व्यापक या भारी बारिश की स्थिति के संकेत नहीं हैं, इसलिए यह दौर हल्की से मध्यम बारिश तक ही सीमित रहने की उम्मीद है।
बीते दिन कैसा रहा प्रदेश का मौसम
शुक्रवार और शनिवार के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर सहित पूर्वी संभागों के जिलों में बादल-बारिश का दौर देखने को मिला। सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, नर्मदापुरम, राजगढ़, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड और दतिया में भी कहीं-कहीं वर्षा हुई। मुरैना में 31 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली, जबकि रीवा, सतना, पचमढ़ी, उमरिया, ग्वालियर और दतिया में दिन का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया।
इससे पहले पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी, जब चक्रवात अरनब के असर से कई जिलों में तेज बारिश हुई थी। उस दौर में पूर्वी हिस्से में गरज-चमक के साथ अति तीव्र वर्षा देखने को मिली थी। अब चक्रवात कमजोर पड़कर लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन उसके अवशेष से बना सिस्टम अब भी प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि अक्टूबर के आखिरी दिनों से नवंबर की शुरुआत तक गर्मी, सर्दी और बरसात का मिला-जुला ट्रेंड देखने को मिल रहा है।
बड़े शहरों में कैसा रहेगा मौसम
राजधानी भोपाल में आज मौसम बिल्कुल साफ रहने का अनुमान है। आंधी-बारिश की कोई संभावना नहीं बन रही है। पिछले दिन भोपाल का अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 5.4 डिग्री सेल्सियस कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.1 डिग्री सेल्सियस कम है। आने वाले दिनों में तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिलेगी, जिससे ठंड का अहसास बढ़ जाएगा। सुबह के वक्त हल्की धुंध देखने को मिल सकती है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तेज और खिली हुई धूप निकलने की उम्मीद है।
इंदौर और उज्जैन संभाग में धूप, बादलों की आवाजाही और हल्की उमस का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। इंदौर सामान्य से 4.7 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रहा है। मालवा-निमाड़ के इलाकों में दिन के वक्त हल्की गर्मी महसूस हो सकती है, तो रात और सुबह के वक्त तापमान में गिरावट के कारण हल्की सिहरन भी महसूस हो सकती है। इन जिलों में बारिश की कोई संभावना नहीं है और आसमान काफी हद तक साफ है।
जबलपुर सामान्य से 5.3 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हुआ है, जबकि ग्वालियर 2.8 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रहा है। ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस अधिक है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 32.0 डिग्री सेल्सियस खरगोन में दर्ज किया गया, तो सबसे कम न्यूनतम तापमान 16.0 डिग्री सिवनी में रिकॉर्ड हुआ। जबलपुर, मंडला, बालाघाट, शहडोल और डिंडौरी संभाग में हल्की नमी और घने बादल छाए हुए हैं।
ठंड ने भी दी दस्तक
बारिश के साथ-साथ प्रदेश में ठंड ने भी दस्तक दे दी है। भोपाल सहित रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम और बैतूल जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठंड का अहसास होने लगा है। इन क्षेत्रों में दिनभर बादल छाए रह सकते हैं, जिससे रात के समय ठंड में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। सुबह के समय घास पर हल्की ओस की बूंदें भी देखने को मिलने लगी हैं, जो इस बात का संकेत है कि ठंड धीरे-धीरे पैर पसार रही है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि नवंबर के दूसरे हफ्ते से ठंड का असर और बढ़ेगा। अभी दिन के तापमान में गिरावट और रात के पारे में बढ़ोतरी का मिला-जुला रुझान देखने को मिल रहा है, जो बदलते मौसम की पहचान है। रात और सुबह के वक्त हल्की ठंडी हवाएं चलने से मौसम सुहावना हो गया है, खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश में जहां आसमान साफ है। बदलते मौसम में सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी हो गया है, क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
गरज-चमक के दौरान बरतें सावधानी
मौसम विभाग ने येलो अलर्ट वाले जिलों के लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहना चाहिए। बिजली गिरने की आशंका वाले समय में पक्की छत के नीचे रहना सबसे सुरक्षित माना जाता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि गरज-चमक के दौरान खेतों में काम रोककर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
बदलते मौसम में सेहत का ध्यान रखने के लिए दैनिक आहार में मौसमी फल और ताजी हरी सब्जियां शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। निश्चित नींद का समय और पर्याप्त आराम शरीर को मौसम के बदलाव के साथ ढालने में मदद करता है। सुबह-शाम की हल्की ठंड के लिए अपने पास एक हल्की चादर या जैकेट रखना अच्छा रहता है। इसके साथ ही सुबह और शाम के समय मच्छरों से बचाव के लिए भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव के दौर में मच्छरों की सक्रियता बनी रहती है।
आगे क्या: 4 नवंबर तक दौर, फिर बढ़ेगी ठंड
मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार 4 नवंबर तक प्रदेश में बारिश का यह दौर जारी रह सकता है, हालांकि दो नवंबर के बाद इसकी तीव्रता कम होने की उम्मीद है। पूर्वी हिस्से में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और उत्तरी जिलों में छिटपुट बौछारों का सिलसिला 4 नवंबर तक थम-थम कर चल सकता है। इसके बाद गतिविधियों में कमी आएगी और आसमान साफ होने लगेगा। नवंबर के दूसरे हफ्ते से ठंड का असर बढ़ने का अनुमान है, जिससे सुबह-शाम की सर्दी और महसूस की जाएगी।
गौरतलब है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 24 जून से 3 अक्टूबर तक, यानी करीब 100 दिन तक प्रदेश में सक्रिय रहा। इस दौरान कुछ जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया, तो कई जिले वर्षा के औसत आंकड़े को भी नहीं छू पाए। मानसून की विदाई के बाद भी अक्टूबर और नवंबर की शुरुआत में गर्मी, सर्दी और बरसात का मिला-जुला ट्रेंड बना हुआ है। मौसम विभाग की सलाह है कि लोग मौसम के पूर्वानुमान और अलर्ट पर नजर बनाए रखें, ताकि अचानक बदलते मौसम में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
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