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नाशिक में आज सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण: राष्ट्रपति मुर्मू के हाथों शुरुआत, 21 महीने का महापर्व

नाशिक सिंहस्थ कुंभ ध्वजारोहण सांकेतिक चित्र सांकेतिक चित्र: नदी तट पर धार्मिक आयोजन

नाशिक ब्यूरो

महाराष्ट्र के नाशिक शहर में आज का दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद खास है। गोदावरी नदी के तट पर बसे नाशिक और पास के त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले का शुभारंभ हो रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे का आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार वे आज नाशिक पहुंचेंगी और ध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगी। इसके बाद 1 नवंबर को वे हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भी एक कार्यक्रम में भाग लेंगी। नाशिक में ध्वजारोहण के साथ ही कुंभ पर्व की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी, हालांकि मुख्य स्नान पर्वों की तारीखें आगे के महीनों में पड़ेंगी।

आज का पूरा कार्यक्रम: दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर ध्वजारोहण

आज के समारोह की समय-सारिणी पहले से तय है। सुबह से ही स्थापित देवताओं का पूजन और धार्मिक विधियां शुरू हो जाएंगी। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट के बीच राष्ट्रपति और प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति में संकल्प, गणेश पूजन, पंचार्घ्य समर्पण और तीर्थ पूजन होगा। इसके बाद दोपहर ठीक 12 बजकर 2 मिनट पर रामकुंड, पंचवटी में मुख्य सिंहस्थ महाध्वजारोहण होगा।

ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम त्र्यंबकेश्वर की ओर बढ़ेगा। दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर कुशावर्त तीर्थ में ध्वजस्तंभ पूजन का आयोजन रखा गया है। शाम को गोदावरी तट पर महागोदाआरती होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन के कार्यक्रम के अनुसार इस समारोह में करीब साढ़े पांच सौ लोगों का शंखनाद और करीब साढ़े छह हजार आदिवासी बंधुओं की भव्य दिव्य आरती विशेष आकर्षण रहेगी।

समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्य मौजूद रहेंगे। कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन के साथ अन्य मंत्रियों की उपस्थिति भी रहेगी। प्रशासन की ओर से बताया गया है कि ध्वजारोहण समारोह के लिए नाशिक में बड़ी संख्या में विशिष्ट अतिथियों के आने की व्यवस्था की गई है।

21 महीने तक चलेगा महापर्व, पहला अमृत स्नान अगस्त 2027 में

इस बार का नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला अपनी लंबी अवधि के कारण भी चर्चा में है। जारी कार्यक्रम के अनुसार यह पर्व 31 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2028 तक चलेगा, यानी करीब 21 महीने तक धार्मिक आयोजन और मेले की गतिविधियां चलती रहेंगी। ध्वज अवतरण के साथ पर्वकाल का समापन 24 जुलाई 2028 को होगा।

जारी समय-सारिणी के अनुसार पहला अमृत स्नान 2 अगस्त 2027 को होगा। इसके बाद आगे के स्नान पर्वों की तारीखें भी तय की गई हैं। लंबी अवधि के कारण प्रशासन ने मेले की व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से चलाने की योजना बनाई है। नाशिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों स्थानों पर गोदावरी तट पर स्नान, पूजन और धार्मिक आयोजनों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

नाशिक सिंहस्थ कुंभ ध्वजारोहण सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र: नदी तट पर धार्मिक आयोजन

सिंहस्थ का धार्मिक महत्व: गोदावरी तट का महापर्व

परंपरा के अनुसार सिंहस्थ कुंभ का आयोजन तब होता है, जब बृहस्पति सिंह राशि में होते हैं। इसी कारण इस मेले को सिंहस्थ कहा जाता है। माना जाता है कि गोदावरी नदी के तट पर लगने वाला यह मेला श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी होता है। नाशिक का रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर का कुशावर्त तीर्थ इस मेले के दो प्रमुख केंद्र हैं।

रामकुंड पंचवटी क्षेत्र में स्थित है, जहां ध्वजारोहण हो रहा है। त्र्यंबकेश्वर में ज्योतिर्लिंग मंदिर और कुशावर्त तीर्थ का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंभ के दौरान इन तीर्थों में स्नान और दर्शन का विशेष महत्व बताया जाता है। यही कारण है कि देशभर से साधु-संत, अखाड़ों के प्रतिनिधि और श्रद्धालु इस मेले से जुड़ते हैं।

तीन दिन के विधि-विधान से हो रही है शुरुआत

ध्वजारोहण समारोह अकेला आयोजन नहीं है, बल्कि तीन दिन के धार्मिक विधि-विधान का मुख्य पड़ाव है। 30 अक्टूबर से ही ध्वजदंड प्रतिष्ठापना और नगर प्रदक्षिणा के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है। शास्त्रोक्त विधि से तीन दिन तक धार्मिक अनुष्ठान चलेंगे।

31 अक्टूबर को मुख्य ध्वजारोहण के बाद 1 नवंबर को प्रातः पूजन, हवन, पूर्णाहुति और गोदाआरती जैसे विधि-विधान होंगे। आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार इन तीन दिनों में अखाड़ों के साधु-संत, पुरोहित संघ के प्रतिनिधि और प्रशासन के अधिकारी एक साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। इससे मेले की औपचारिक शुरुआत को धार्मिक गरिमा के साथ संपन्न करने की कोशिश की गई है।

सुरक्षा और प्रशासन की तैयारियां

इतने बड़े समारोह के लिए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। नाशिक कुंभ मेला प्राधिकरण, जिला प्रशासन और महानगर पालिका मिलकर समारोह का आयोजन कर रहे हैं। विशिष्ट अतिथियों के आगमन, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।

राष्ट्रपति के नाशिक दौरे के दौरान पुलिस अकादमी में विश्राम की व्यवस्था भी कार्यक्रम में शामिल है। शाम की गोदाआरती के लिए भी श्रद्धालुओं के बैठने और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि ध्वजारोहण समारोह के बाद भी मेले की तैयारियां लगातार जारी रहेंगी, ताकि आगे के स्नान पर्वों के समय किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

मध्य प्रदेश के लिए भी खास: उज्जैन सिंहस्थ 2028 से जुड़ाव

नाशिक का सिंहस्थ महापर्व मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी खास महत्व रखता है, क्योंकि इसके बाद उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां चल रही हैं। उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियां के तहत शिप्रा नदी पर नए घाटों और अधोसंरचना के बड़े कामों की योजना बनाई गई है। उज्जैन में भूमि-पूजन के कार्यक्रमों में भी सरकार की ओर से बड़ी घोषणाएं की जा चुकी हैं।

दोनों ही सिंहस्थ मेले बारह वर्ष के चक्र से जुड़े हैं और दोनों का धार्मिक महत्व एक जैसी परंपरा से आता है। नाशिक में ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ महापर्व उज्जैन के श्रद्धालुओं के लिए भी एक संकेत की तरह देखा जा रहा है कि आने वाले वर्षों में कुंभ परंपरा के बड़े आयोजन देश के अलग-अलग तीर्थों पर होते रहेंगे।

राष्ट्रपति का आगे का कार्यक्रम: 1 नवंबर को कुरुक्षेत्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा दो दिन का है। नाशिक में ध्वजारोहण के बाद 1 नवंबर को वे हरियाणा के कुरुक्षेत्र जाएंगी, जहां हरियाणा के गठन के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हीरक जयंती समारोह आयोजित होगा। इस तरह राष्ट्रपति का यह दौरा धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों तरह के आयोजनों से जुड़ा हुआ है।

कुरुक्षेत्र में होने वाला समारोह हरियाणा के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। नाशिक से कुरुक्षेत्र तक का यह दौरा इस बात का संकेत देता है कि राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समान महत्व दिया जा रहा है।

आगे क्या: श्रद्धालुओं के लिए लंबा पर्वकाल

ध्वजारोहण के साथ कुंभ पर्व की शुरुआत तो हो जाएगी, लेकिन इसका मुख्य आकर्षण आगे के महीनों में रहेगा। पहला अमृत स्नान अगस्त 2027 में होगा, जिसके लिए अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं। लंबी अवधि को देखते हुए प्रशासन ने मेले को चरणों में आयोजित करने की रणनीति अपनाई है।

श्रद्धालुओं के लिए यह जानना जरूरी है कि ध्वजारोहण के बाद भी नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में धार्मिक आयोजन चलते रहेंगे। गोदावरी तट पर स्नान, दर्शन और धार्मिक सभाओं का क्रम लंबे समय तक जारी रहेगा। आने वाले दिनों में मेले से जुड़ी और घोषणाएं और समय-सारिणी भी सामने आ सकती है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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