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मध्य प्रदेश में अब 100 मंजिल तक की इमारतें बन सकेंगी: मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान, भोपाल-इंदौर के 12 जिलों में महानगरीय विकास की तैयारी

सांकेतिक चित्र: आधुनिक शहर का दृश्य सांकेतिक चित्र: आधुनिक शहर का दृश्य

इंदौर ब्यूरो

सार: इंदौर में आयोजित मध्य प्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शहरी विकास की नई दिशा का ऐलान किया है। अब पर्याप्त चौड़ी सड़कों और निर्धारित मानकों के साथ राज्य में 100 मंजिल तक की इमारतों के निर्माण की अनुमति की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ भोपाल और इंदौर के आसपास छह-छह जिलों को जोड़कर महानगरीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, और गरीबों के लिए किफायती आवास के साथ आधुनिक टाउनशिप बसाई जाएंगी।

100 मंजिल तक की इमारतों का क्या है ऐलान

मध्य प्रदेश में अब तक सामान्य तौर पर 30 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती थी। इस सीमा ने शहरों के ऊपर की ओर बढ़ने की राह को रोक रखा था, जबकि जमीन की मांग लगातार बढ़ रही थी। अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने भवन निर्माण के नियमों में अधिक लचीलापन देने की दिशा में कदम उठाए हैं। अब अगर सड़क की चौड़ाई और दूसरी जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो 100 मंजिल तक की इमारतों या बहुमंजिला परिसरों के निर्माण की अनुमति देने की व्यवस्था की जा रही है।

इस फैसले का सीधा अर्थ यह है कि शहर अब जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ सकेंगे। इससे एक ही भूखंड पर अधिक घर, अधिक कार्यालय और अधिक सुविधाएं बन सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे शहरी जमीन का बेहतर इस्तेमाल होगा और विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। हालांकि अनुमति शर्तों से बंधी रहेगी — सड़क की चौड़ाई, सुरक्षा मानक और अन्य निर्धारित पैमाने पूरे होने पर ही ऊंची इमारतों को मंजूरी मिलेगी।

भवन नियमों में क्या-क्या बदला

कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने शहरी विकास से जुड़े तीन महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेजों के ड्राफ्ट भी जारी किए। इनमें मध्य प्रदेश अर्बन अफोर्डेबल हाउसिंग एंड हैबिटेट पॉलिसी 2026, ट्रीटेड वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग एंड रीयूज पॉलिसी 2026 और यूनिफाइड लैंड डेवलपमेंट एंड बिल्डिंग प्रमोशन रूल्स 2026 शामिल हैं। इन दस्तावेजों से साफ है कि सरकार आवास, पानी के दोबारा इस्तेमाल और भवन निर्माण की प्रक्रिया को एक साथ सुधारना चाहती है।

इसी अवसर पर नीति आयोग की सिटी इकोनॉमिक रीजन पहल के तहत तैयार इंदौर इकोनॉमिक रीजन 2047 का इकोनॉमिक मास्टर प्लान भी जारी किया गया। इसके अलावा भोपाल और इंदौर नगर निगम की बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट भी सामने रखी गई। सम्मेलन में शहरी वित्त, संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल, संस्थागत सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने से जुड़े छह समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर हुए। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कई उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं, जिनमें शहरी ढांचे में निवेश और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।

सांकेतिक चित्र: आधुनिक शहर का दृश्य
सांकेतिक चित्र: आधुनिक शहर का दृश्य

पहले भोपाल-इंदौर के 12 जिले, फिर जबलपुर-ग्वालियर

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की संभावना सिर्फ इंदौर और उज्जैन तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर-भोपाल आर्थिक कॉरिडोर के साथ महानगरीय इलाकों तक फैली है। फिलहाल इस योजना में भोपाल और इंदौर के छह-छह जिलों को शामिल किया जा रहा है। इसके बाद जबलपुर और ग्वालियर का विकास भी इसी योजना के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।

महानगरीय क्षेत्रों का मकसद यह है कि बड़े शहरों के आसपास के जिले भी नियोजित तरीके से विकसित हों। इन क्षेत्रों में सुनियोजित विकास के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। आर्थिक कॉरिडोर के आसपास कई तरह की टाउनशिप की योजना बनाई जा रही है, जिससे बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के नए रास्ते खुलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में शहरों का विकास सुनियोजित तरीके से होना जरूरी है, ताकि लोगों को आवास, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

गरीबों के लिए किफायती आवास सबसे बड़ी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि शहरी विकास के साथ गरीब तबके के नागरिकों को सस्ते और किफायती आवास उपलब्ध कराना सरकार की पहली प्राथमिकता है। आने वाले समय में जितनी भी नई टाउनशिप विकसित की जाएंगी, उनमें अक्षय ऊर्जा, शुद्ध पेयजल और यातायात के उन्नत साधनों की पुख्ता व्यवस्था रहेगी। उपचारित पानी के इस्तेमाल और बेहतर परिवहन व्यवस्था पर भी जोर दिया जाएगा।

टाउनशिप के भीतर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के बजाय आधुनिक आवासीय सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित बस्तियां विकसित की जाएंगी, जो भविष्य में विकास का मॉडल बनेंगी। इन बस्तियों में रोजगार के अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, ताकि लोगों को शहरों में व्यवस्थित और सुरक्षित आवास मिल सके।

स्वामित्व योजना: करीब 50 लाख रजिस्ट्रियों की तैयारी

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए स्वामित्व योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में यह अधिकार दिया था कि जो जिस जगह पर काबिज है, उसका नाम रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज होगा। इसी कड़ी में राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए रजिस्ट्री करवाई जा रही है।

स्वामित्व योजना के तहत राज्य में लगभग 50 लाख रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। इससे लोग अपने मकान पर बैंक ऋण भी ले सकेंगे और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि मालिकाना हक मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे अपनी संपत्ति का उपयोग बेहतर तरीके से कर पाएंगे।

कॉन्क्लेव में चार बड़ी थीमों पर मंथन

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सम्मेलन में चार बड़ी थीमों पर मंथन हुआ। टियर-2 शहरों के विकास के अंतर्गत री डेंसिफिकेशन, टीओडी, टीडीआर, आवास, पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारे, रेरा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, एनओसी में कमी और एफएआर को लेकर चर्चा हुई। डिजिटल गवर्नेंस के अंतर्गत ऑटोमेटिक बिल्डिंग परमिशन, ऑनलाइन एनओसी, कॉलोनी एक्ट, जीआईएस आधारित प्लानिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर नीति निर्धारण की बात हुई।

जलवायु के अनुकूल शहरों के लिए जल के पुनः उपयोग, अमृत 2.0, नमो हरित नगर, सिटी फॉरेस्ट, वायु गुणवत्ता, ई-व्हीकल, कचरे से ऊर्जा, सौर ऊर्जा और सीबीजी इकोसिस्टम पर चर्चा की गई। वहीं नगरीय निकायों के लिए शहरी निवेश और फाइनेंस के अंतर्गत अर्बन चैलेंज फंड, पीपीपी मॉडल, टेंपल बॉन्ड, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड, बहुपक्षीय बैंकों से फंडिंग और वायबिलिटी गैप फंडिंग के विकल्पों पर भी मंथन हुआ।

सौर ऊर्जा और वित्तीय संसाधन जुटाने के नए मॉडल

सम्मेलन का शुभारंभ सोलर राउंड टेबल से हुआ, जिसमें सौर ऊर्जा क्षेत्र के 20 से अधिक निवेशकों ने भाग लिया। बैठक में नगरीय निकायों को सौर ऊर्जा से जोड़ने, बिजली व्यय को कम करने और नगरीय विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नवाचारी मॉडल पर विचार-विमर्श किया गया। फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से नगरीय विकास को नई दिशा देने पर जोर दिया गया।

बैठक में लगभग 200 नगरीय निकायों के लिए बिजली आपूर्ति के उद्देश्य से पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड की पहल पर भी चर्चा हुई। इस मॉडल के माध्यम से विभिन्न नगरीय निकायों की वित्तीय आवश्यकताओं को एक साथ जोड़कर संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इसके अलावा बिरसिंहपुर जलाशय में प्रस्तावित 200 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना के साथ 50 मेगावाट और 100 मेगावाट-घंटा क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1,564 करोड़ रुपये बताई गई।

कृषि भूमि बचेगी, शहर अब ऊपर की ओर बढ़ेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक फ्लोर एरिया रेशियो की अनुमति से कृषि भूमि को बचाने और विकास के नए रास्ते खोलने में मदद मिलेगी। जब शहर ऊपर की ओर बढ़ेंगे, तो खेती की जमीन पर विस्तार का दबाव कम होगा। यह बात खास तौर पर उन शहरों के लिए अहम है, जहां आबादी तेजी से बढ़ रही है और जमीन सीमित होती जा रही है।

ऊंची इमारतों से एक ही जगह पर अधिक लोगों को आवास मिल सकेगा, और बुनियादी ढांचे की लागत भी प्रति परिवार कम होगी। साथ ही नियोजित टाउनशिप में सड़क, पानी, बिजली और परिवहन की व्यवस्था पहले से तय होगी, जिससे अव्यवस्थित विकास की समस्या से बचा जा सकेगा। सरकार का दावा है कि मध्य प्रदेश शहरीकरण के क्षेत्र में देश के लिए रोल मॉडल बनकर उभर रहा है।

आगे क्या: नियमों को अंतिम रूप और महानगरीय योजना

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भवन निर्माण के नए नियमों को अंतिम रूप कब दिया जाएगा और महानगरीय क्षेत्रों की योजना जमीन पर कैसे उतरेगी। ड्राफ्ट नीतियों के जारी होने के बाद अब उनके अंतिम रूप, अधिसूचना और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। निवेशकों के साथ हुई बैठकों के बाद शहरी ढांचे में निवेश की घोषणाएं भी सामने आ सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उद्योग-अनुकूल नीतियों के चलते राज्य में 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। अगर ये प्रस्ताव जमीन पर उतरते हैं, तो भोपाल-इंदौर महानगरीय क्षेत्र के साथ जबलपुर और ग्वालियर के विकास को भी गति मिलेगी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि 100 मंजिल तक की इमारतों की व्यवस्था किन शहरों में पहले लागू होती है और किन शर्तों के साथ ऊंची इमारतों को मंजूरी दी जाती है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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