इंदौर ब्यूरो
सार: शताब्दी वर्ष के समापन की कड़ी में आज, बुधवार 28 अक्टूबर को इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में स्वयंसेवकों का महा-एकत्रीकरण होने जा रहा है। शाम साढ़े चार बजे तक स्वयंसेवकों के जुटने का कार्यक्रम है, जिसमें शारीरिक प्रदर्शन, योग, सामूहिक गायन और बौद्धिक मार्गदर्शन होगा। इसके बाद 2 से 4 नवंबर तक इंदौर में ही संघ की अखिल भारतीय बैठक होगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में साल भर चले कार्यक्रमों की शृंखला का समापन आज इंदौर में एक बड़े एकत्रीकरण के साथ होने जा रहा है। इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में बुधवार को स्वयंसेवकों का विशाल समूह एकत्र होगा। इस आयोजन को संघ के सौ वर्ष पूरे होने के उत्सव का औपचारिक समापन माना जा रहा है। इंदौर महानगर क्षेत्र की सभी शाखाओं को अपने स्वयंसेवकों को शाम साढ़े चार बजे तक डेली कॉलेज परिसर में पहुंचने का निर्देश दिया गया है। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कई वरिष्ठ पदाधिकारी पहले ही इंदौर पहुंच चुके हैं। आयोजन की तैयारियों को लेकर शहर में भी चर्चा है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर स्वयंसेवकों का एक स्थान पर जुटना इंदौर के लिए एक उल्लेखनीय अवसर माना जा रहा है।
खबरों के अनुसार इस महा-एकत्रीकरण में लगभग एक लाख स्वयंसेवकों के जुटने की संभावना जताई गई है। यह आंकड़ा आयोजकों की अपेक्षा और उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है, न कि गिनती का अंतिम आंकड़ा। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार इंदौर विभाग के पाँच जिलों के सक्रिय स्वयंसेवक इस आयोजन में शामिल होंगे। स्वयंसेवक अपनी-अपनी शाखाओं पर एकत्र होकर समूह में आयोजन स्थल तक पहुंचेंगे। इस तरह की व्यवस्था से आयोजन स्थल पर अनुशासित और व्यवस्थित उपस्थिति सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।
आज शाम डेली कॉलेज में क्या होगा
कार्यक्रम की रूपरेखा संघ की परंपरागत शैली में तैयार की गई है। सबसे पहले ध्वज प्रणाम होगा, जिसके बाद शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया जाएगा। स्वयंसेवक सामूहिक रूप से व्यायाम और योग का प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद ‘चरैवेति-चरैवेति’ का सामूहिक गायन होगा, जिसे इस एकत्रीकरण का ध्येय वाक्य बनाया गया है। ‘चरैवेति’ का अर्थ है चलते रहो — निरंतर आगे बढ़ते रहो। यह संदेश स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है और शताब्दी वर्ष के समापन के अवसर पर इसका विशेष महत्व बताया जा रहा है।
शारीरिक प्रदर्शन और सामूहिक गायन के बाद बौद्धिक सत्र होगा। इसमें वरिष्ठ पदाधिकारी संघ की विचारधारा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। अखिल भारतीय बैठक से पहले मेजबान शहर में इस तरह का बौद्धिक सत्र आयोजित करना संघ की स्थापित परंपरा रही है। इसी परंपरा के तहत इंदौर में यह विशेष सत्र रखा गया है। बौद्धिक मार्गदर्शन के माध्यम से स्वयंसेवकों को आगे के काम की दिशा और संगठन की प्राथमिकताओं के बारे में बताया जाएगा।
क्यों खास है डेली कॉलेज का चुनाव
आयोजन स्थल के रूप में डेली कॉलेज का चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह संस्थान इंदौर और पूरे मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र है। डेली कॉलेज की पहचान एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के रूप में है, जहां से बड़ी संख्या में युवा जुड़े हुए हैं। इस जगह पर कार्यक्रम आयोजित करके संघ यह संकेत दे रहा है कि उसकी भविष्य की रणनीतियों में युवा पीढ़ी को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
उपलब्ध जानकारियों के अनुसार संघ आने वाले समय में अपनी पहुंच को विशेष रूप से युवा पीढ़ियों के बीच मजबूत करना चाहता है। इसके लिए पारंपरिक बौद्धिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों पर नए सिरे से जोर देने की योजना है। डेली कॉलेज जैसे युवा-केंद्रित स्थल पर महा-एकत्रीकरण का आयोजन इसी दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। युवा वर्ग से सीधा जुड़ाव संगठन के अगले चरण की रणनीति का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।

शताब्दी वर्ष: सौ साल का सफर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन वर्ष 1925 में हुई थी। डॉ. हेडगेवार जी ने इसकी स्थापना की थी और उनके बाद गुरुजी ने लंबे समय तक संगठन का नेतृत्व किया। पिछले एक साल में संगठन ने अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इन कार्यक्रमों की शृंखला में शाखा स्तर के आयोजन, सामाजिक सेवा के काम, विचार गोष्ठियां और बड़े सम्मेलन शामिल रहे हैं। इंदौर में बुधवार को होने वाला आयोजन इस शृंखला का अंतिम कार्यक्रम माना जा रहा है।
शताब्दी वर्ष के दौरान संगठन ने अपने काम को समाज के सामने रखने और नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर दिया है। इंदौर का महा-एकत्रीकरण इसी शृंखला का समापन बिंदु है, जिसके बाद संगठन अपने अगले चरण की रणनीति पर काम करेगा। सौ वर्ष के सफर के बाद संगठन के सामने चुनौती यह है कि वह अपनी परंपराओं को बनाए रखते हुए बदलते समय के साथ कैसे आगे बढ़े। इंदौर का आयोजन इसी सवाल का एक सार्वजनिक उत्तर माना जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की उपस्थिति के माध्यम से संगठन की निरंतरता और ऊर्जा को दर्शाया जाएगा।
इंदौर विभाग के पाँच जिलों से स्वयंसेवक
इस एकत्रीकरण में इंदौर विभाग के पाँच जिलों के सक्रिय स्वयंसेवक शामिल होंगे। शाखाओं पर एकत्र होकर समूह में आयोजन स्थल पर पहुंचने की व्यवस्था की गई है। इससे आयोजन में अनुशासन और व्यवस्था बनी रहेगी। स्वयंसेवकों के लिए यह आयोजन केवल एक सभा नहीं, बल्कि शताब्दी वर्ष के समापन का सामूहिक अनुभव होगा। ध्वज प्रणाम, शारीरिक कौशल प्रदर्शन और बौद्धिक मार्गदर्शन — तीनों ही तत्व संघ की कार्यपद्धति की पहचान माने जाते हैं और आज के कार्यक्रम में तीनों का समावेश किया गया है।
इंदौर में इससे पहले भी संघ के बड़े कार्यक्रम हो चुके हैं। 25 अक्टूबर को इंदौर में पथ संचलन निकाला गया था, जिसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया था। उस आयोजन के बाद अब डेली कॉलेज का महा-एकत्रीकरण शताब्दी वर्ष के समापन की अगली कड़ी है। दोनों आयोजनों के बीच एक निरंतरता दिखती है — पहले शहर की सड़कों पर कदमताल और अब एक ही परिसर में विशाल एकत्रीकरण।
2 से 4 नवंबर: अखिल भारतीय बैठक
इस सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक संघ की बहुप्रतीक्षित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान विशेष रूप से युवा पीढ़ियों के बीच संगठन की पहुंच को और मजबूत करने की रणनीतियों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। बैठक में देशभर से आए पदाधिकारी संगठन के आगामी काम, विस्तार की योजना और सामाजिक गतिविधियों पर चर्चा करेंगे।
अखिल भारतीय बैठक संघ की एक महत्वपूर्ण वार्षिक बैठक मानी जाती है, जिसमें नीतिगत और संगठनात्मक फैसले लिए जाते हैं। इंदौर में इस बैठक का होना शहर के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देशभर के पदाधिकारियों का एक स्थान पर जुटना शहर की गतिविधियों को भी प्रभावित करेगा। बैठक से पहले आज का महा-एकत्रीकरण एक तरह से उस बैठक की भूमिका तैयार करेगा, जिसमें स्वयंसेवकों की बड़ी उपस्थिति के माध्यम से संगठन की ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन होगा।
चरैवेति का संदेश और आगे की राह
इस एकत्रीकरण का ध्येय वाक्य ‘चरैवेति-चरैवेति’ रखा गया है। इसका अर्थ है कि चलते रहो, रुकना नहीं है। यह संदेश संघ की कार्यशैली का मूल माना जाता है — निरंतर प्रयास, निरंतर सेवा और निरंतर राष्ट्रकार्य। शताब्दी वर्ष के समापन पर इस संदेश को दोहराने का अर्थ यह है कि सौ वर्ष पूरे होने के बाद भी संगठन का काम थमा नहीं है, बल्कि आगे की राह पर चलने का संकल्प लिया जा रहा है।
आगे की राह में संगठन का ध्यान युवा पीढ़ी से जुड़ाव, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों के विस्तार और सामाजिक सेवा के कामों को आगे बढ़ाने पर रहने की संभावना है। इंदौर की अखिल भारतीय बैठक में इन्हीं विषयों पर रणनीति तय होने की उम्मीद है। आज का महा-एकत्रीकरण इस रणनीति की शुरुआत का सार्वजनिक मंच माना जा रहा है, जहां स्वयंसेवक एक साथ इस संकल्प को दोहराएंगे कि शताब्दी वर्ष के बाद भी उनका काम निरंतर जारी रहेगा।
इंदौर के लिए क्या मायने रखता है यह आयोजन
इंदौर के लिए यह आयोजन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, यह शहर को संघ के शताब्दी वर्ष के समापन का गवाह बनाता है, जो एक ऐतिहासिक अवसर है। दूसरा, इसके बाद होने वाली अखिल भारतीय बैठक से शहर में देशभर के पदाधिकारियों का आगमन होगा, जिससे शहर की गतिविधियां बढ़ेंगी। तीसरा, डेली कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में आयोजन से शहर के युवाओं का इस अवसर से सीधा जुड़ाव होगा।
इंदौर पहले से ही मध्यप्रदेश का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों की लंबी परंपरा रही है। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन और अखिल भारतीय बैठक का इंदौर में होना इस परंपरा को और मजबूत करता है। आज शाम डेली कॉलेज परिसर में होने वाला महा-एकत्रीकरण इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी। आयोजन के बाद 2 नवंबर से शुरू होने वाली बैठक पर भी सबकी नजर रहेगी, क्योंकि उसमें संगठन की आगे की दिशा तय होगी।
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